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शैक्षिक भ्रमण में महिलाओं ने जाने वर्मी कंपोस्ट, बोरी बगीचा और फल मक्खी ट्रैप के फायदे

Virendra ShuklaVirendra Shukla   9 Jan 2020 2:08 PM GMT

शैक्षिक भ्रमण में महिलाओं ने जाने वर्मी कंपोस्ट, बोरी बगीचा और फल मक्खी ट्रैप के फायदे

टांड़पुर (बाराबंकी)। जैविक खेती के महत्व को न सिर्फ लोग समझ रहे हैं, बल्कि उस क्षेत्र में हाथ भी तेजी से बढ़ाने लगे हैं। खास बात यह है कि जैविक खेती में महिलाओं के कदम भी आगे बढ़े हैं। लखनऊ से शैक्षिक भ्रमण पर बाराबंकी पहुंची आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं ने केंचुआ खाद, फल मक्खी ट्रैप, बोरा बगीचा आदि के फायदे जाने।

लखनऊ में बक्शी का तालाब तहसील क्षेत्र में रहने वाली प्रियंका ने अपने घर में किचन गार्डन तो बना रखा था, जिसमें वो जैविक तरीके से सब्जियां उगा रही थीं, लेकिन उसमें लगने वाले कीड़ों से वो बहुत परेशान थीं। बाराबंकी के टांडपुर गांव में उन्होंने फल मक्खी ट्रैप और स्ट्रिकी टैप के बारे में जानकारी मिली। गणेश आजीविका समूह से जुड़ी रोली शुक्ला (एफएलसीआरपी) ने महिलाओं को बताया, "अगर बोरी बगीचे या किचन गार्डन में कीट लगने लगें तो फल मक्खी ट्रैप लगाना चाहिए। इसमें मादा मक्खी की गंध होती है, जिससे नर कीट खिंचे चले आते हैं और ट्रैप में फंस जाते हैं। इससे कीटों की संख्या नियंत्रित रहती है।"


यूपी में क्षेत्रीय ग्रामीण विकास संस्थान, बक्शी का तालाब के सौजन्य से लखनऊ जिले की 70 महिलाओं के समूह को बाराबंकी में शैक्षिक भ्रमण के लिए ले जाया गया। इस दौरान महिलाओं ने टांडपुर गांव में किसान राम सांवले शुक्ला के यहां केंचुआ खाद, जीवामृत, मट्का खाद, वेस्टडीकंपोजर बनाने का डेमो और उसके फायदे बताए गए।

इसके साथ ही इन महिलाओं ने गांव मं यूपी आजीविका मिशन से जुडी सखी मंडल की महिलाओं की पोषण वाटिकाएं भी दिखाई गईं। आजीविका कृषक मित्र (कृषि सखी) नीलम देवी ने अपने घर के पीछे बनी पोषण वाटिका भी दिखाई। उन्होंने महिलाओं को बताया कि जिनके घर में जगह कम है वो अपने बोरी बगीचा लगा सकते हैं। इस विधि में एक बोरी में गोबर और मिट्टी मिलाकर आधा भरा जाता है, फिर उसे धूप वाली जगह पर रख दिया जाता है। जिसमें मौसम के अनुरूप, तरोई, लौकी, कद्दू समेत कई सब्जियां उगाई जा सकती हैं।

आजीविका मिशन के तहत बनाए गए समूह से जुड़ी महिलाओं को खेती, बागवानी और जैविक खेती के लिए प्रेरित किया जाता है। इसी समूह से जुड़ी महिलाओं को कृषि सखी, पशु सखी और दूसरे दायित्व भी मिलते हैं। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के ब्लाक प्रबंधक रमाकांत दीक्षित ने बताया कि, शैक्षिक भ्रमण से महिलाओं को दूसरे का किया हुआ देखने को मिलता है। जिससे उन्हें खुद भी वैसा ही अपने घर में करने की प्रेरणा मिलती है।"

आजीविका मिशन से जुड़े रिषभ शुक्ला ने बताया कि आज लखनऊ के मोहनलालगंज, माल ब्लाक और गोसाईगंज की 70 महिलाओं को दूसरे जिले में लाया गया था। महिलाओं के लिए आज का भ्रमण लाभदायक रहा है। कई महिलाओं ने जैविक खेती की शुरुआत की बात कही है।"

सभी 70 महिलाओं ने सूरतगंज ब्लाक के ही तुरकौली गांव में महिला किसान प्रियंका सिंह के मुर्गी फार्म का भी भ्रमण किया। प्रियंका सिंह ने महिलाओं को मुर्गी पालन, रखरखाव के बारे में महिलाओं के साथ अपने अनुभव साझा किए। इस दौरान रेखा रावत, सोनी सिंह, शर्मावती, आदि ने जैविक खेती को लेकर खूब सवाल किए।

आजीविका टीम के ब्लॉक मिशन प्रबंधक दिवाकर वर्मा ने कहा- महिलाओं को हम लोग इस लिए लगातार प्रेरित कर रहे हैं क्योंकि अगर उन्हें जैविक खेती और पोषण वाटिका का महत्व समझ में आ गया तो वो घर की कई समस्याओं का समाधान कर सकती हैं। हर घर में थोड़ी बहुत खाली जगह होती है, महिलाएं इसका इस्तेमाल कर सब्जी के पैसे और पोषण युक्त सब्जियां आसानी पा सकती है।


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