'ऐसी ही गर्मी पड़ती रही तो फूलों की खेती करना छोड़ देंगे किसान'

इस साल मई-जून के महीने में कई राज्यों में तापमान 50 डिग्री तक पहुँच गया, इसका असर इस समय उगाई जानी वाली फ़सलों पर भी पड़ा है, फूलों की खेती भी उनमें से एक है। किसानों के लिए इस बार लागत निकाल पाना भी मुश्किल लग रहा है।

Divendra SinghDivendra Singh   6 Jun 2024 12:54 PM GMT

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सुबह के सात बजे हर दिन की तरह आज भी फूल मंडी में भीड़ है, ज़्यादातर ग्राहक किसानों के पास जा तो रहे हैं, लेकिन फूलों की हालत देखकर, बिना खरीदे आगे बढ़ जा रहे हैं। गर्मी और लू से मुरझाए फूलों की तरह किसानों के चेहरे भी मुरझा जा रहे हैं।

उन्हीं किसानों की भीड़ में हरदोई जिले के संडीला ब्लॉक के सनई गाँव के किसान छेदा भी शामिल हैं, जो हर दिन सुबह 6 बजे तक अपने गाँव से लगभग 60 किमी दूर पुराने लखनऊ की फूल मंडी पहुँच जाते हैं। लेकिन इस गर्मी ने इस बार उन्हें मायूस कर दिया है।

फूल इतने छोटे हैं कि 30-40 रुपये किलो बिकने वाले गेंदे के फूल 10-15 रुपये में बिक रहे हैं। सिर पर गमछा बांधे परेशान से छेदा गाँव कनेक्शन से कहते हैं, "बहुत गर्मी पड़ रही है, फूल छोटे हो गए हैं, पहले हफ्ते-दस दिन सिंचाई करनी पड़ती थी, लेकिन अब चौथे-पाँचवे दिन में पानी देना पड़ रहा है ; इतनी मेहनत के बाद भी पैसे नहीं मिल रहे।"


छेदा को हर दिन रात के दो-तीन दिन बजे तक उठना होता है, तब जाकर फूल तोड़कर वो सुबह-सुबह मंडी पहुँच पाते हैं। लेकिन ये सिर्फ छेदा अकेले की परेशानी नहीं, फूलों की खेती करने वाले ज़्यादातर किसानों का हाल बेहाल है।

लखनऊ की फूल मंडी से लगभग 210 किमी दूर यूपी के मैनपुरी ज़िले के सुल्तानगंज ब्लॉक के गाँव पद्मपुर छिबरिया के किसान रवि पाल का भी यही हाल है, पिछले साल भी उन्हें नुकसान हुआ था, इसलिए पहले जहाँ गर्मी में 15 बीघा में गेंदा लगाते थे, इस बार सिर्फ पाँच बीघा में लगाया है।

रवि गाँव कनेक्शन से बताते हैं, "इस बार गर्मी की वजह फूल की खेती करने वाले किसानों को बहुत परेशानी हो रही है, हर दूसरे-तीसरे दिन पानी लगाना पड़ रहा है; गर्मी से फूल छोटे हो रहे हैं, जिसकी वजह से कीमत नहीं मिल रही, अब तो लागत ही निकल जाए यही बड़ी बात होगी।"

इन राज्यों में ज़्यादा होती है फूलों की खेती

राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड द्वारा प्रकाशित राष्ट्रीय बागवानी के अनुसार, 2023-24 के दौरान भारत में फूलों की खेती का कुल क्षेत्रफल 285 हज़ार हेक्टेयर था और उत्पादन 3194 हज़ार मीट्रिक टन था। फूलों की खेती अब कई राज्यों में व्यावसायिक रूप से की जाती है, जिनमें कर्नाटक, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मिजोरम, गुजरात, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, झारखंड, हरियाणा, असम और छत्तीसगढ़ शामिल हैं। भारतीय फूलों की खेती उद्योग में गुलाब, रजनीगंधा, ग्लेडियोलस, एन्थूरियम, कारनेशन और गेंदा जैसे फूल शामिल हैं।


ऐसा नहीं है कि नुकसान सिर्फ गेंदा को ही हुआ है, इस समय गुलाब और रजनीगंधा का भी सीजन है, उनका भी यही हाल है। गुलाब की खेती करने वाले आकाश की माने तो गर्मी की वजह से कीटों का प्रकोप बहुत बढ़ गया है, वो कहते हैं, "12 बिस्वा में गुलाब लगाया है, इस समय हफ्ते में दवाई डालनी पड़ रही है, सिंचाई भी ज़्यादा लग रही; मंडी में हर एक किसान का यही हाल है।"

कली नहीं खिलने से गुलाब के घटे दाम

दो तरह के गुलाब बिकते हैं, एक खुशबू वाले और एक कटिंग वाले, कटिंग वाले गुलाब का साइज़ इतना छोटा है कि जो फूलों का एक बंडल 50-60 रुपये से ज़्यादा में बिकता थे, इस समय 100 रुपये में 4-5 बंडल बिक रहे हैं, यानी एक बंडल 20-25 रुपये में बिक रहा है । लखनऊ के सरोजनी नगर ब्लॉक के पलेहंदा गाँव के कमल किशोर पिछले पाँच साल से गुलाब की खेती कर रहे हैं, वो बताते हैं, "इतनी गर्मी है कि कली बर (जल) जा रही है, फूल ही नहीं बन पा रहे हैं।"

पलेहंदा गाँव से लगभग 294 किमी दूर मध्य प्रदेश के सतना जिले के बगहा वार्ड नंबर एक में नीरज त्रिपाठी भी फूलों की खेती करते हैं, उनकी भी यही स्थिति है। उन्होंने बटाई पर खेत ले रखा है, उन्हें लग रहा है कि इस बार शायद बटाई का पैसा भी नहीं दे पाएंगे। वो गाँव कनेक्शन से कहते हैं, "अगर यही हाल रहा तो किसान गर्मी में फूलों की खेती करना ही छोड़ देगा; हर साल पारा बढ़ रहा, इससे किसान की लागत भी बढ़ रही है।"


फूलों का बड़ा निर्यातक है भारत

भारत ने 2022-23 में लगभग 707.81 करोड़ डॉलर के फूल निर्यात किए थे, प्रमुख आयातक देशों में अमेरिका, नीदरलैंड, यूएई, यूके और जर्मनी जैसे देश थे। 50 प्रतिशत से अधिक फूलों की खेती कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु और मध्य प्रदेश में होती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस बढ़ती गर्मी का असर फूलों के उत्पादन पर काफी पड़ने वाला है। राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान' (एनबीआरआई) के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एसके तिवारी कहते हैं, "इस समय में खेत में गुलाब गेंदा और रजनीगंधा की फसल है, जिस पर गर्मी का असर पड़ रहा है; गर्मी से बचने के लिए किसान को ज़्यादा सिंचाई करनी पड़ रही है।"

वो आगे कहते हैं, "जैसे कि दोपहर एक बजे से तीन बजे तक गुलाब के पौधे मुरझाए हुए दिखते हैं, किसान को लगता है कि अगर पानी दे देते हैं तो वो सही हो जाएगा, जबकि ऐसा नहीं होता है, इससे पौधे सूखने लग जाते हैं; यही हाल गेंदा की फसल के साथ भी है, गर्मियों के गेंदा के साथ वैसे भी परेशानी होती है, इस बार तो तापमान 50 से ज़्यादा हो गया, उसका असर तो इस पर पड़ेगा ही, गर्मी की वजह से फूलों का आकार भी छोटा रह जा रहा है।"


सिर्फ गुलाब और गेंदा ही नहीं सभी फूलों पर इसका असर पड़ रहा है। डॉ तिवारी कहते हैं, "यही हाल रजनीगंधा के साथ है, जिन किसानों ने इसी साल रजनीगंधा के बल्ब लगाए हैं तो अभी उनकी अच्छे से जड़ें भी नहीं विकसित हुईं होंगी तो उन पर ज़्यादा असर हो रहा है; इस समय बहुत से किसान पॉली हाउस में जरबेरा की खेती भी करते हैं, वैसे मिड मई से मिड जून तक इसकी देखरेख सबसे ज्यादा करनी पड़ती है, लेकिन इस बार मार्च से ही तापमान बढ़ गया है।"

इस उपाय से बढ़ सकता है उत्पादन

अभी भी कुछ उपाय अपनाकर किसान नुकसान से बच सकते सकते हैं। डॉ तिवारी सलाह देते हैं, "किसान इस समय ओवर इरिगेशन से बचें, अगर दोपहर में पौधे मुरझाए हुए दिखे तो सिंचाई न करें, इसी की वजह से पौधे मर जाते हैं।"

"खेत में मल्चिंग कर दें, इस समय जैसे गेहूँ कटने के बाद जो अवशेष बचे हैं, या फिर पेड़ की सूखी पत्तियों से मल्चिंग करें, इससे खेत में नमी बनी रहेगी, "उन्होंने आगे कहा।

गर्मी बढ़ने के साथ ही फसल पर कई तरह के कीटों का प्रकोप भी बढ़ जाता है। डॉ तिवारी बताते हैं, "इस समय जैसे आसपास के खेतों में कोई फसल नहीं होती, जिससे फूलों की खेत में नमी होने के कारण बहुत से कीट भी लग सकते हैं; इसलिए पौधों को सिर्फ ऊपर से न देखें बल्कि नीचे जड़ के पास भी देखते रहें, जहां कीट लगे हो सकते हैं।"

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