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लौकी के फलों पर काले धब्बे क्यों बनते हैं? वैज्ञानिक सलाह से करें नुकसान पर नियंत्रण

Dr SK Singh | Jan 07, 2026, 15:25 IST
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लौकी की फ़सल पर काले धब्बे और फल सड़न की समस्या तेजी से बढ़ रही है। एन्थ्रेक्नोज और गमी स्टेम ब्लाइट जैसे फफूंद रोग पत्तियों, तनों और फलों को प्रभावित कर किसानों को भारी आर्थिक नुकसान पहुँचा सकते हैं।
लौकी की फसल में काले धब्बे और फल सड़न क्यों बढ़ रही है? जानिए एन्थ्रेक्नोज और गमी स्टेम ब्लाइट से बचाव के तरीके
लौकी भारत ही नहीं दुनिया भर में उगायी जाने वाली सब्ज़ी फ़सल है, इसके फल विटामिन, खनिज और जलयुक्त पोषक तत्वों का बेहतरीन ज़रिया होते हैं और यह सब्जी व्यवसाय व घरेलू उपयोग दोनों के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। लेकिन गर्म-उष्ण मौसम और उच्च आर्द्रता वाले क्षेत्रों में लौकी पर काले धब्बों और फल सड़न के रूप में गंभीर रोग देखने को मिलते हैं, जो किसानों को आर्थिक नुकसान पहुँचाते हैं।

इन लक्षणों के प्रमुख कारण अक्सर एन्थ्रेक्नोज (Anthracnose) और गमी स्टेम ब्लाइट (Gummy Stem Blight – GSB) नामक कवकीय रोग होते हैं, जो फफूंदों के कारण उत्पन्न होते हैं और फसल की पैदावार को प्रभावित करते हैं।

रोग कारक फफूंद और रोग की जानकारी

एन्थ्रेक्नोज (Anthracnose)

एन्थ्रेक्नोज एक सामान्य कवकीय रोग है, जो Colletotrichum प्रजाति द्वारा होता है। यह रोग पत्तियों, तनों और फलों पर गहरे रंग के धँसे हुए धब्बे उत्पन्न करता है। धब्बों के चारों ओर सुनहरा या हल्का किनारा बन सकता है, और यदि उच्च आर्द्रता बनी रहे तो यह जल्दी फैलता है।

गमी स्टेम ब्लाइट (Gummy Stem Blight – GSB)

GSB एक घातक रोग है, जो Stagonosporopsis cucurbitacearum (पहले Phoma cucurbitacearum या Didymella bryoniae के रूप में जाना जाता था) नामक कवक द्वारा होता है। यह रोग पत्तियों, तनों और फलों पर चिपचिपे, गहरे रंग के धब्बों और सड़े हुए भागों को जन्म देता है और फल के नीचे तक फैल सकता है। गमी स्टेम ब्लाइट को लौकी में “ब्लैक रॉट” के नाम से भी जाना जाता है। इन दोनों रोगों के कवक फसल अवशेषों, मिट्टी और संक्रमित बीजों में जिंदा रह सकते हैं, तथा वर्षा, ओस और हवा के माध्यम से फैलते हैं।

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इन लक्षणों का न करें नज़रअंदाज़

एन्थ्रेक्नोज: पत्तियों पर गोल या अनियमित लाल-भूरे धब्बे बनते हैं। फल पर धब्बे गहरे भूरे/काले हो जाते हैं, जो फल की गुणवत्ता घटाते हैं। तेज़ आर्द्रता में ये धब्बे फफूंद के स्फूर्त रूप से फैलते हैं।

गमी स्टेम ब्लाइट: पत्तियों पर पील-भूरे धब्बों से शुरू होकर गहरे भूरे/काले हो जाते हैं। तने पर गोंद जैसा चिपचिपा स्राव पैदा होता है। फल पर छोटे धब्बे से शुरू होकर वे बड़े काले तथा गीले क्षेत्रों में बदल जाते हैं। रोग गंभीर होने पर बेलों की पत्तियाँ झड़ सकती हैं और फल गिर सकते हैं।अधिकतर फफूंद रोग गर्म और आर्द्र मौसम में तेजी से फैलते हैं, विशेषकर जब ओस लंबे समय तक मौजूद रहे और पौधों के बीच हवा का प्रवाह कम हो।

उन्नत रोग प्रबंधन

रोगप्रतिरोधी/सहनशील किस्मों का चयन

नवीनतम शोध में कुछ लौकी के जीनोटाइपों को GSB तथा अन्य रोगों के लिए सहनशील पाया गया है। उदाहरण के लिए, कुछ BG-95, BG-114-1 और BG-114-3 जैसे किस्में GSB के प्रति प्रतिरोध दिखाती हैं। प्रतिरोधी किस्मों का उपयोग बीमारी के स्तर को अधिकतम रूप से कम करने और रसायन पर निर्भरता को घटाने में मदद करता है।

लौकी की बड़ी समस्या: काले धब्बे, ब्लैक रॉट और उनका वैज्ञानिक समाधान
लौकी की बड़ी समस्या: काले धब्बे, ब्लैक रॉट और उनका वैज्ञानिक समाधान


खेत प्रबंधन और कृषि व्यवहार

खेत की स्वच्छता: खेती से पहले औरबाद में सभी संक्रमित अवशेषों को जला दें या खेत से हटा दें, ताकि रोगजनक मिट्टी में न रहें। खरपतवार नियंत्रण से फफूंद के लिए आश्रय कम होता है।

पर्याप्त दूरी और वेंटिलेशन: पौधों के बीच उचित दूरी रखें ताकि हवा का प्रवाह बढ़े और ओस जल्दी सूखे। बेलों को ट्रेलिस/मचान पर जैविक रूप से चढ़ाएं ताकि नमी कम हो।

सिंचाई प्रबंधन: ओवरहेड सिंचाई से बचें, साथ ही पत्तियों की बजाय जड़ क्षेत्र को पानी दें ताकि ऊपरी पत्तीओं पर नमी न रहे। जल गन्दा होने से फफूंदों का प्रसार बढ़ता है।

मिट्टी और बीज उपचार (Soil & Seed Treatment)

बीज उपचार: रोग शुद्ध, रोग-मुक्त बीज का उपयोग करें। बुवाई से पहले बीजों को कवकनाशी या जैविक एजेंट से उपचारित करें जैसे Trichoderma asperellum + Bacillus subtilis मिश्रण, जिससे रोग का प्रकोप प्राथमिक अवस्था में ही कम होता है।

मिट्टी में जैविक उपचार: रोपण में Trichoderma + Bacillus जैविक मिश्रण देना फफूंद रोगों के खिलाफ प्रभावी पाया गया है, FYM/कंपोस्ट में Trichoderma जोड़कर मिट्टी में डालने से रोगजनकों का दमन होता है।

जैविक और जैव-नियंत्रण उपाय

जैविक एजेंट्स: Streptomyces nigrescens NEAU-L66 जैसे जैव-नियंत्रक स्ट्रेन ने गमी स्टेम ब्लाइट पर लगभग 78% तक नियंत्रण efficacy दिखाया है और पौधों की प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करता है।

अन्य जैव-फफूंदनाशी: Bacillus subtilis आधारित उत्पाद तथा अन्य जैव-फफूंदनाशी जैविक समाधानों का प्रयोग पर्यावरण के अनुकूल नियंत्रण के रूप में किया जा सकता है।

रासायनिक नियंत्रण (Fungicide Application)

निवारक कवकनाशी: क्लोरोथालोनिल, मैनकोज़ेब, थियोफेनेट मिथाइल, टेबुकोनाज़ोल जैसे कवकनाशी रोग के प्रारंभिक चरण पर प्रभावी हैं।

रोग के लक्षण दिखाई देने पर उपचार

यदि यह रोग प्रारंभिक अवस्था में दिखाई दे तो टेबुकोनाज़ोल, प्रोपिकोनाज़ोल डोज़ के साथ स्प्रे किया जा सकता है। लगातार एक ही रसायन का उपयोग न करें- रेसिस्टेंस निर्माण से बचने के लिए रोटेशन जरूरी।

फसल चक्र (Crop Rotation) और मिट्टी में रोग भार घटाना: लौकी और अन्य कुकुरबिट फसलें एक ही खेत में लगातार नहीं लगाना चाहिए। कम से कम 2–3 साल तक कुकुरबिट से अलग अनाज या दलहन फसलें लगाकर मिट्टी में रोगजनकों का भार कम किया जा सकता है।

लौकी में काले धब्बों और फल सड़न की समस्या आमतौर पर गमी स्टेम ब्लाइट और एन्थ्रेक्नोज जैसे फफूंद रोगों के कारण होती है। इसके प्रभावी प्रबंधन के लिए समन्वित दृष्टिकोण (IDM/IPM) आवश्यक है जिसमें प्रतिरोधी किस्में, खेत प्रबंधन, बीज व मिट्टी उपचार, जैविक एजेंट व कवकनाशी का संयोजन शामिल है। नवीनतम शोधों के अनुसार जैविक नियंत्रक जैसे Streptomyces nigrescens तथा Trichoderma + Bacillus मिश्रण रोग नियंत्रण में सहायक सिद्ध हुए हैं और उत्पादन तथा लाभ-लाभ अनुपात को बढ़ाते हैं।

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