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Fish Farming: ठंड में मछलियों को बचाने के उपाय और आर्थिक नुकसान से बचने की तकनीक

Preeti Nahar | Jan 16, 2026, 19:19 IST
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उत्तर प्रदेश का मछली पालन उद्योग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन दिसंबर की ठंड मछलियों के लिए चुनौती बन सकती है। उत्तर-प्रदेश के अनुभवी मोहम्मद आसिफ से जानिए कैसे जनवरी की कड़ी ठंड में मछली पालन व्यवसाय को बिना किसी नुकसान के जारी रख सकते हैं। साथ ही जानिए मछली को सर्दी से बचाने के कुछ जरूरी उपाय।
सर्दी में मछली का रख-रखाव
मछली पालन अब एक उभरता हुआ व्यवसाय बन गया है, लेकिन बढ़ती कड़ाके की ठंड मछलियों के स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर सकती है। मछली फार्मिंग में रेहू, ग्लास कार्फ़, सिल्वर, पंगेसियस, मिर्गन और कातला जैसी मछलियों का पालन किया जाता है, जिनकी सर्दी में बाज़ारों में अच्छी मांग रहती है। बाराबंकी के अनुभवी मछलीपालक मोहम्मद आसिफ बताते हैं कि ठंड में मछलियों का विकास रुक जाता है, वे खाना कम खाती हैं और फंगस व बैक्टीरिया का खतरा बढ़ जाता है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसलिए, ठंड के मौसम में विशेष सावधानियां बरतना ज़रूरी है।

1 तालाब के पानी का तापमान स्थिर रखना

ठंड के मौसम में मछली पालन के लिए सबसे ज़रूरी ख्याल रखना होता है तालाब के पानी के तापमान काे मेंटेन रखना। सर्दियों के मौसम में तालाब के पानी का तापमान मिनिमम 20 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 26 से 27 डिग्री सेल्सियस रहना चाहिए। मिनिमम तापमान 20 से नीचे 18 डिग्री सेल्सियस भी हुआ तो मछलियाँ मर सकती है। इसीलिए ठंड के मौसम में सबसे पहले तालाब के पानी का तापमान स्थिर रखना बहुत ज़रूरी है। ख़ासकर जब आप बोरवेल का पानी तालाब में इस्तेमाल कर रहे हैं तो तापमान को मेंटेन करना बहुत ज़रूरी है।

2 फंगस और परजीवी से सुरक्षा

उन्होंने आगे बताया कि ज्यादा सर्दी होने पर मछलियाँ एक झुंड में बैठी रहती है, ऐसे में सक्रंमण का खतरा बढ़ जाता है। बदलते मौसम में मछलियों को फफूँद और परजीवी संक्रमण से बचाने के लिए तालाब में लिक्विड सैनीटाइज़र का इस्तेमाल करें। हर 15 से 20 दिन के अंतराल पर आयोडीन युक्त लिक्विड सैनीटाइज़र को तालाब के पानी में मिलाएँ। तालाब के पानी में नमक का इस्तेमाल बहुत जरूरी हो तभी करें, क्योंकि तापमान कम होगा तो नमक पानी में आसानी से घुल नहीं पाएगा, जो मछली के स्वास्थ को ख़राब कर सकता है।

3 मछली की डाइट को कैसे मेंटेन करें?

मछली पालक को बदलते मौसम के अनुसार मछलियों की डाइट का विशेष ख्याल रखना होता है। अधिक सर्दी होने पर मछलियों को फीडिंग नहीं करानी चाहिए। क्योंकि सर्दियों में मछली का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। इस मौमस में मछलियाँ अपने शरीर में मौजूद फैट से ही एनर्जी लेती है। उनको अलग से फीडिंग कराने की जरूरत नहीं होती।

4 पंगेसियस मछली पालक तालाब खाली करें

अगर कोई पंगेसियस मछली का पालन कर रहे हैं, तो उन्हें अधिक ठंड के मौसम में तालाब से निकाल देना बेहतर है, क्योंकि इस प्रजाति में संक्रमण सबसे ज़्यादा फैलता है। अच्छी जल निकासी वाली जगहों पर मछली पालन सुरक्षित रहता है।

5 तालाब की सफाई और मछलियों की नियमित जांच

जहां पानी की निकासी ठीक नहीं है, वहां जोखिम नहीं लेना चाहिए। रोजाना तालाब की सफाई और मछलियों की नियमित जांच ज़रूरी है। तालाब के आसपास बांस, पॉलिथिन या प्लास्टिक की शेडिंग लगाने से पानी का तापमान स्थिर रहता है और ठंड का असर कम होता है।

6 पानी में ऑक्सीजन का स्तर बनाए रखना

ठंड के मौसम में पानी में ऑक्सीजन का स्तर बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होती है। मोहम्मद आसिफ बताते हैं कि ठंड में पानी में ऑक्सीजन कम हो जाती है, इसलिए एरेटर या ऑक्सीजन सप्लाई उपकरणों का रोजाना इस्तेमाल करना चाहिए। इससे मछलियां स्वस्थ रहेंगी और उनकी ग्रोथ भी अच्छी होगी।

7 सर्दियों में जाल चलाने का सही तरीका

कार्प मछली वाले तालाब में ठंड के मौसम में हर 15 दिन के अंतराल पर हल्के ढंग से जाल चलाना चाहिए। इससे मछलियों की बढ़वार और स्वास्थ्य की जानकारी मिलती रहती है, लेकिन ज्यादा बार जाल नहीं चलाना चाहिए ताकि मछलियों को तनाव न हो।

8 तकनीकी परामर्श

सर्दी के मौसम में मछली पालन करने के लिए मत्स्य विशेषज्ञ से तकनीकी जानकारी हासिल करने के बाद ही मछली पालन करें। जिससे किसी नुकसान का सामना ना करना पड़े।
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