खरीफ 2025-26 में रिकॉर्ड उत्पादन: चावल, मक्का और गन्ने ने रचा नया इतिहास

Divendra Singh | Nov 27, 2025, 15:35 IST
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खरीफ 2025-26 के प्रथम अग्रिम अनुमान बताते हैं कि जलवायु चुनौतियों के बावजूद भारतीय कृषि ने असाधारण प्रदर्शन किया है। कुल खाद्यान्न उत्पादन 1733.30 लाख टन पहुँचने की उम्मीद है, जिसमें चावल, मक्का, दलहन और तेलहन सभी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
irst advanced estimates of Kharif crop production for 2025-26
irst advanced estimates of Kharif crop production for 2025-26
केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 26 नवंबर 2025 को खरीफ सीज़न 2025-26 के लिए मुख्य कृषि फसलों के प्रथम अग्रिम उत्पादन अनुमान जारी किए। जारी आंकड़े भारतीय कृषि के लिए बड़ी उपलब्धि माने जा रहे हैं, क्योंकि चुनौतीपूर्ण जलवायु परिस्थितियों, कहीं अत्यधिक वर्षा तो कहीं सूखा, के बावजूद कुल खरीफ खाद्यान्न उत्पादन 38.70 लाख टन बढ़कर 1733.30 लाख टन पहुँचना अनुमानित है।

चावल और मक्का: खरीफ के दो बड़े स्तंभ

2025-26 के दौरान खरीफ चावल उत्पादन 1245.04 लाख टन अनुमानित है, पिछले वर्ष की तुलना में 17.32 लाख टन अधिक।
इसी प्रकार मक्का उत्पादन 283.03 लाख टन पहुँचने के अनुमान के साथ खरीफ इतिहास में अब तक की सर्वाधिक वृद्धि दर्ज कर रहा है – यह पिछले वर्ष से 34.95 लाख टन ज्यादा है।

  • विशेषज्ञों के अनुसार मक्का उत्पादन में तेज़ वृद्धि का बड़ा कारण है
  • उच्च गुणवत्ता वाले हाइब्रिड बीज
  • प्रोसेसिंग और वैल्यू ऐडिशन उद्योग से बढ़ती मांग
  • पशु चारे और बायोइथेनॉल नीति से बढ़ा बाज़ार


मोटे अनाज, दलहन और तेलहन भी मजबूत

भारत 2023 के बाद से पोषक अनाज (मिलेट्स) की वैश्विक पहचान बढ़ाने में अग्रणी रहा है—उसका असर सीधे उत्पादन में दिख रहा है।

प्रथम अनुमान के अनुसार:

खरीफ मोटा / पोषक अनाज उत्पादन - 414.14 लाख टन

  • कुल खरीफ दलहन उत्पादन –-74.13 लाख टन
  • तूर – 35.97 लाख टन
  • उड़द – 12.05 लाख टन
  • मूंग – 17.20 लाख टन


तेलहन क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण सुधार दर्ज किया गया है

  • कुल खरीफ तेलहन उत्पादन - 275.63 लाख टन
  • इसमें मूंगफली - 110.93 लाख टन (पिछले वर्ष से +6.81 लाख टन)
  • सोयाबीन - 142.66 लाख टन


गन्ना, कपास और जूट: उद्योगों को नई ऊर्जा

गन्ना और कपास जैसे औद्योगिक फसलों के लिए उपलब्ध डेटा संकेत देता है कि कृषि सिर्फ खाद्य आपूर्ति नहीं बल्कि इंडस्ट्रियल ग्रोथ में भी निर्णायक भूमिका निभा रही है।

गन्ना उत्पादन - 4756.14 लाख टन (पिछले वर्ष से +210.03 लाख टन)

कपास - 292.15 लाख गांठें (170 किग्रा प्रति गांठ)

पटसन एवं मेस्ता - 83.45 लाख गांठें

गन्ना में वृद्धि न केवल चीनी उद्योग बल्कि एथेनॉल मिश्रण नीति के लिए भी महत्वपूर्ण है — जिसका लक्ष्य भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ाना है।

बड़े पैमाने पर सुधार क्यों संभव हुए?

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार यह उपलब्धि कई कारकों का परिणाम है:
प्रधानमंत्री के नेतृत्व में कृषि निवेश और बुनियादी ढांचे पर फोकस
किसान-हितैषी MSP और बाजार पहुंच सुधार
जलवायु-स्मार्ट कृषि तकनीकों और सूक्ष्म सिंचाई का विस्तार
बीज, उर्वरक और एडवाइज़री सेवाओं की समय पर आपूर्ति
डिजिटल कृषि, ड्रोन, और मौसम आधारित सलाह से उत्पादकता में बढ़ोतरी

उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य सिर्फ उत्पादन बढ़ाना नहीं बल्कि हर किसान की आय और समृद्धि सुनिश्चित करना है—आत्मनिर्भर भारत के मूल मंत्र के साथ।”

भविष्य दृष्टि : अगले चरण की कृषि

विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में कृषि विकास का केंद्र होगा
हाई-टेक खेती
जल संरक्षण
मिलेट्स आधारित पोषण अर्थव्यवस्था
कृषि निर्यात में बढ़ोतरी

अनुमान जारी करते समय मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ये आंकड़े राज्यों से प्राप्त डाटा, फील्ड अवलोकन और उपज रुझानों पर आधारित हैं, और कटाई प्रयोगों के बाद अंतिम अनुमान अपडेट किया जाएगा। विस्तृत जानकारी upag.gov.in पोर्टल पर उपलब्ध है।

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