Passion Fruit: उत्तर प्रदेश में पैशन फ्रूट की खेती, किसानों के लिए नई कमाई का जरिया
Preeti Nahar | Jan 19, 2026, 19:12 IST
उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में अब पैशन फ्रूट की खेती का नया चलन शुरू हुआ है। इटोंजा के किसान अनिल कुमार ने इस अलग और स्वादिष्ट फल को अपने खेतों में उगाने का निर्णय लिया है। जानिए आप भी कैसे कर सकते हैं पैशन फ्रूट की खेती। साथ ही जानिए किन खाने की चीजों में पैशन फ्रूट का इस्तेमाल कर बिजनेस किया जा सकता है।
Passion Fruit: उत्तर प्रदेश के खेतों में पैशन फ्रूट की खेती ने किसानों के लिए एक नया रास्ता खोला है। अमेरिका और ब्राजील में उगने वाला यह अनोखा फल अब उत्तर प्रदेश की धरती पर भी लहलहा रहा है। इटोंजा के किसान अनिल कुमार ने इंटरनेट पर रिसर्च के बाद इस फल की खेती शुरू की है। उन्होंने पिछले साल जुलाई में पैशन फ्रूट के 100 पौधे लगाए थे और अब फरवरी तक उनकी पहली फसल तैयार हो जाएगी। यह फल न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट है, बल्कि इसका जूस और जेली भी बनाई जा सकती है, जिससे किसानों को अच्छी कमाई की उम्मीद है।
अनिल कुमार बताते हैं कि उन्हें हमेशा कुछ अलग करने की प्रेरणा मिलती रहती है। पहले वे कीवी की खेती के बारे में सोच रहे थे, लेकिन अपने यहां के तापमान के हिसाब से कीवी उपयुक्त नहीं था। इसके बाद उन्होंने पैशन फ्रूट के बारे में इंटरनेट पर पढ़ा और इसके तापमान की अनुकूलता देखकर इसे मंगवाया। उन्होंने पिछले साल 24 जुलाई को पैशन फ्रूट के पौधे लगाए थे और अब फल पकने की कगार पर हैं।
अनिल कुमार पारंपरिक खेती में हो रहे नुकसान से बचने के लिए मल्टीलेयर फार्मिंग (बहुस्तरीय खेती) का सुझाव देते हैं। उनका मानना है कि किसान अपने खेतों में कई तरह की सब्जियां उगाकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। वे कहते हैं, "किसी को भी समझाने के लिए जब तक कि जिज्ञासा अगले के अंदर नहीं होगी तो कोई कुछ नहीं कर सकता है। हर चीज होती है अपनी जिज्ञासा। मेरी अपनी सोच यही है कि अलग हट के कुछ किया जाए हमेशा।"
फिलहाल लखनऊ और आसपास के छोटे शहरों में पैशन फ्रूट लोगों ने देखा भी नहीं है। लेकिन दिल्ली जैसे बड़े शहरों में यह फल ₹170 से ₹220 प्रति किलो तक बिक रहा है। अनिल कुमार को उम्मीद है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के बाजारों में भी इसकी अच्छी मांग होगी। उन्होंने अभी 100 पेड़ लगाए हैं, लेकिन इस बार की फसल को देखकर वे इसे एक एकड़ तक बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।
पैशन फ्रूट की खेती में बहुत ज्यादा खास देखभाल की जरूरत नहीं होती है। अनिल कुमार के अनुसार, "कोई बहुत स्पेशल देखभाल इसमें नहीं है। फिलहाल अब ये हो जाएगा यहां पे। उसके बाद में इसके कीड़े और ये आते हैं वो तो अलग की बात हुई। लेकिन अभी तलक ऐसा कोई इसमें वो नहीं आया है जो हमको प्रॉब्लम पैदा करे।" इस फल की बेल को चढ़ाने के लिए एक मजबूत ढांचा (स्ट्रक्चर) बनाना पड़ता है, जिसमें लोहे के पाइप और तार का इस्तेमाल होता है। 100 पौधों के लिए लगभग सात क्विंटल एंगल और दो क्विंटल तार की जरूरत पड़ती है।
पैशन फ्रूट की फ्लावरिंग (फूल आना) सितंबर के अंत से शुरू होकर नवंबर-दिसंबर तक चलती है। फल फरवरी से पकना शुरू हो जाता है और जून तक फसल चलती रहती है। हालांकि, साल में एक ही बार मुख्य फसल आती है, लेकिन यह लगभग तीन महीने तक खेत में रहती है। फसल कटाई के बाद, बीच की खाली जगह में शिमला मिर्च, मक्का या पत्तागोभी जैसी फसलें उगाई जा सकती हैं।
पैशन फ्रूट को सीधे फल के रूप में खाया जा सकता है। इसका पल्प निकालकर जूस बनाकर पीना बहुत फायदेमंद होता है। इसके अलावा, इसे सुखाकर या प्रोसेस करके जेली बनाने के बिजनेस में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। अनिल कुमार का जुनून और नई खेती की ओर उनका झुकाव दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। वे कहते हैं, "खेती पाती चाकरी और घोड़े की तंग अपने आप संभारिए। चाहे लाख लोग हो संग।"
पैशन फ्रूट की खेती का अनोखा विचार
पैशन फ्रूट की खेती का आइडिया
मल्टीलेयर फार्मिंग का महत्व
बाजार में पैशन फ्रूट की मांग
बाजार में पैशन फ्रूट की खेती की माँग
पैशन फ्रूट की देखभाल और लागत
फसल का समय और इंटरक्रॉपिंग
पैशन फ्रूट का फूल