यूपी में गेहूं खरीद ने पकड़ी रफ्तार, 28 अप्रैल तक 6.10 लाख मीट्रिक टन खरीद, किसानों को ₹1318 करोड़ भुगतान
May 01, 2026, 19:15 IST
उत्तर प्रदेश में गेहूं खरीद अभियान तेज हो गया है। 28 अप्रैल तक 6.10 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया है। किसानों को सीधे बैंक खातों में 1318 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। देवरिया जिले में खरीद सबसे अधिक हुई है। बेमौसम बारिश से प्रभावित गेहूं भी खरीदा जा रहा है।
यूपी गेहूं खरीद
उत्तर प्रदेश में रबी विपणन सत्र के दौरान गेहूं खरीद अभियान ने अब गति पकड़ ली है। सरकार की सक्रिय रणनीति और मजबूत व्यवस्थाओं के चलते 28 अप्रैल तक 6.10 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। पारदर्शी व्यवस्था और डिजिटल सिस्टम के कारण किसानों को समय पर भुगतान मिल रहा है, जिससे उनका भरोसा भी बढ़ा है।
सरकार ने इस अभियान में पारदर्शिता को प्राथमिकता देते हुए भुगतान की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल कर दी है। अब तक 1,15,854 किसानों को 1318 करोड़ रुपये की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए उनके बैंक खातों में भेजी जा चुकी है। इससे किसानों को बिचौलियों से मुक्ति मिली है और भुगतान समय पर सुनिश्चित हो रहा है।
प्रदेश के सभी खरीद केंद्रों पर तौल, भंडारण और भुगतान की व्यवस्था को मजबूत किया गया है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी किसान को अपनी उपज बेचने में परेशानी न हो और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रहें। व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाकर किसानों को आसानी से गेहूं बेचने का मौका दिया जा रहा है।
इस बार गेहूं खरीद में पूर्वांचल के जिलों ने शानदार प्रदर्शन किया है। देवरिया 55.82 प्रतिशत खरीद के साथ प्रदेश में पहले स्थान पर है। इसके अलावा बस्ती, प्रतापगढ़, बलरामपुर और संतकबीरनगर जैसे जिले भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। बेहतर प्रबंधन और पारदर्शी व्यवस्था के चलते किसानों की भागीदारी बढ़ी है।
बेमौसम बारिश के कारण गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित होने के बाद सरकार ने किसानों के हित में बड़ा फैसला लिया है। अब 70 प्रतिशत तक चमकविहीन और 20 प्रतिशत तक सिकुड़ा या टूटा गेहूं बिना किसी कटौती के खरीदा जा रहा है। इससे किसानों को नुकसान से बचाने में मदद मिल रही है।
पूरी खरीद प्रक्रिया को डिजिटल बना दिया गया है, जिससे किसान आसानी से पंजीकरण कर पा रहे हैं और उन्हें सीधे खातों में भुगतान मिल रहा है। साथ ही निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ मिल सके।