0

अचानक से मुरझा रहे हैं टमाटर के पौधे, हो सकती है ये बीमारी, समय रहते करें प्रबंधन

Dr SK Singh | Jan 28, 2026, 11:55 IST
Share
टमाटर विल्ट रोग से टमाटर के उत्पादन पर असर पड़ता है, लेकिन समय रहते इसका प्रबंधन करके नुकसान से बचा जा सकता है।
प्रतिरोधी किस्में लगाने से रोग की गंभीरता कम होती है और उत्पादन सुरक्षित रहता है।<br>
कई बार टमाटर के पौधे अचानक से मुरझाने लगते हैं और धीरे-धीरे इसका असर पूरी फ़सल पर दिखाई देने लगता है, किसान समझ नहीं पाते कि किस वजह से ये हो रहा है, जिससे कई बार उन्हें नुकसान भी उठाना पड़ता है।

टमाटर के पौधों का मुरझाना फ्यूज़ेरियम विल्ट नाम की बीमारी के कारण होता है, जोकि टमाटर विल्ट एक मिट्टी से फैलने वाली बीमारी होती है, जिससे पौधों के तने और पत्ते मुरझा जाते हैं और पौधों का विकास और उत्पादन प्रभावित होता है। टमाटर विल्ट के मुख्य दो रूप होते हैं:

फ्यूज़ेरियम विल्ट (Fusarium Wilt)

यह रोग Fusarium oxysporum f. sp. lycopersici (FOL) नाम के कवक के कारण होता है। यह रोग मिट्टी में रहकर लंबे समय तक जीवित रहता है और रोग-ग्रस्त मिट्टी में दोबारा संक्रमण देता है।

बैक्टीरियल विल्ट (Bacterial Wilt)

यह रोग Ralstonia solanacearum बैक्टीरिया के कारण होता है। यह प्रायः गर्म और नम मौसम में तेजी से फैलता है और पौधे का तना अंदर से गलने लगता है।

दोनों रोग टमाटर उत्पादन को गंभीर रूप से कम कर सकते हैं, खासकर वर्षा ऋतु एवं गर्मी में, जब मिट्टी नमी अधिक रहती है।

लक्षण, कैसे पहचानें?

फ्यूसेरियम विल्ट के लक्षण

पौधे के निचले पत्ते पीले होते हैं और झड़ते हैं, तना ऊपर-नीचे मुरझा जाता है। कटी हुई तने के कटे भाग से भूरा-लाल रंग का वाहिकीय पट होना दिखाई देता है, यह फ्यूसेरियम संक्रमण का स्पष्ट संकेत है। इसके साथ ही ये रोग धीरे-धीरे ऊपर की ओर फैलता है।

बैक्टीरियल विल्म के लक्षण

अचानक पौधों की पत्तियाँ और तना क्षणिक झुलस जाते हैं। तने को काटने पर गूदेदार पदार्थ निकल सकता है (स्ट्रीम टेस्ट पॉजिटिव)। हल्के-हल्के घेरों में रोग फैलता है।

रोग का विज्ञान-कैसे फैलता है?

मृदा-जनित संक्रमण: रोगाणु मिट्टी में लंबे समय तक जीवित रहते हैं और पौधे की जड़ों के माध्यम से प्रवेश करते हैं।

नमी और तापमान प्रभाव: अधिक नमी और गर्म मौसम रोग को बढ़ावा देता है।

संक्रमित उपकरण/बीज: संक्रमित बीज, उपकरण, या पौधे से रोग फैलता है।

फसल चक्र: बार-बार एक ही फसल लगाने से रोग बढ़ता है।

वैज्ञानिक उन्नति-प्रतिरोधी किस्मों, जैव-नियंत्रण, सूक्ष्म पोषक तत्वों और बेहतर कृषि प्रथाओं के साथ-अब इसे टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।
वैज्ञानिक उन्नति-प्रतिरोधी किस्मों, जैव-नियंत्रण, सूक्ष्म पोषक तत्वों और बेहतर कृषि प्रथाओं के साथ-अब इसे टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।


बचने के प्रभावी उपाय

प्रतिरोधी किस्मों का उपयोग

नवीन शोध में वैज्ञानिकों ने बैक्टीरियल विल्म-प्रतिरोधी टमाटर किस्में विकसित की हैं, प्रतिरोधी किस्में लगाने से रोग की गंभीरता कम होती है और उत्पादन सुरक्षित रहता है।

जैव-नियंत्रण (Bio-control) के उपाय

बैक्टीरिया/फफूँदी एजेंट

Trichoderma spp. (जैसे T. harzianum) का प्रयोग फ्यूसेरियम विल्म को कम करने में प्रभावी पाया गया है।

Bacillus spp. (जैसे B. amyloliquefaciens या B. subtilis) से भी रोग नियंत्रण में मदद मिलती है और जड़ के विकास को बढ़ावा मिलता है। जैव-नियंत्रण मृदा-स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है और रसायन-नियंत्रक फफूँदियों की तुलना में अधिक सुरक्षित है।

पोषक तत्व और सूक्ष्म तत्व

कुछ शोधों में ज़िंक ऑक्साइड नैनोपार्टिकल्स, सैलिसिलिक एसिड, और ह्यूमिक एसिड के प्रयोग से पौधों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बेहतर हुई है। यह उपाय पौधों के सुरक्षात्मक तंत्र और कोशिकीय संरचना को मजबूत बनाता है।

मिट्टी प्रबंधन

सोलराइज़ेशन: साफ प्लास्टिक के साथ मिट्टी को गर्मी में ढकने से मृदा में रोगाणु कम होते हैं।

भारी मृदा और नमी नियंत्रण: उचित जलनिकासी और मिट्टी के ढांचे को बरकरार रखना।

कंपोस्ट/वर्मी कंपोस्ट का उपयोग: मिट्टी में स्वास्थ्य-वर्धक सूक्ष्मजीवों को बढ़ावा देता है।

बचने के लिए ज़रूरी कृषि कार्य

बीज उपचार: रोगाणुरहित बीजों का उपयोग और बीज का थर्मल/बायो ट्रीटमेंट।

फसल चक्र: लगातार टमाटर न लगाने से रोग दबता है।

रोग-ग्रस्त पौधों को हटाएँ और उन्हें जलाएँ, मिट्टी को संक्रमण मुक्त करें।

रासायनिक नियंत्रण- सावधानी के साथ

कीटनाशक/फफूँदनाशकों की आवश्यकता केवल तब हो जब रोग जल्दी फैल रहा हो।

इसका उपयोग कृषि विशेषज्ञ की सलाह पर ही करें ताकि प्रतिरोध और पर्यावरणीय प्रभाव को कम किया जा सके।

किसानों के लिए संक्षिप्त सुझाव

प्रतिरोधी किस्में संग्रहीत करें, रोग के जोखिम को लगभग 40-70% तक कम कर सकती हैं।

जैव-नियंत्रण को प्राथमिकता दें, यह मिट्टी-स्वास्थ्य और लंबे-समय में उत्पादन को सुरक्षित रखता है।

फसल चक्र अपनाएँ, हर सीजन में अलग-अलग फसल लगाने से रोग संचरण कम होता है।

समुचित जल प्रबंधन, अत्यधिक नमी रोकें; रोग फैले होने पर मिट्टी अधिक गीली न रखें।
Tags:
  • How do you treat wilt in tomatoes
  • How to fix a wilted tomato plant
  • आप टमाटर में विल्ट का इलाज कैसे करते हैं
  • Tomato wilt treatment
  • Tomato wilt causal organism
  • Tomato wilt symptoms
  • Tomato wilt chemical control
  • Tomato wilt disease
  • Tomato wilt pictures
  • Tomato wilt virus

Follow us
Contact
  • Gomti Nagar, Lucknow, Uttar Pradesh 226010
  • neelesh@gaonconnection.com

© 2026 All Rights Reserved.