प्रतिबंधित कीटनाशकों के खेत में छिड़काव से जा रही पशु-पक्षियों की जान

प्रतिबंधित कीटनाशकों के खेत में छिड़काव से जा रही पशु-पक्षियों की जानप्रतिबंधित कीटनाशक के छिड़काव से राष्ट्रीय पक्षी मोर, और कुत्ते की जान चली गई।

देवांशु मणि तिवारी/भारती सचान

सुल्तानपुर/कानपुर देहात। मानव जाति और जीव जन्तुओं पर जानलेवा प्रभाव के कारण सरकार 18 कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद गाँवों में कीटनाशकों की बाज़ारों में इन दवाओं की बिक्री बेरोकटोक हो रही है।

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सुल्तानपुर जिले के रामजी वर्मा (45 वर्ष) एक बीघे में कद्दू की खेती करते हैं। पिछले हफ्ते कुद्दू की फसल में अचानक सुंडी का प्रकोप बढ़ता देख उन्होंने तुरंत अपने गाँव के पास की कीटनाशक की दुकान से कार्बाइल दवा खरीदकर फसल पर छिड़काव किया है। भारत सरकार ने कार्बाइल दवा को मधुमक्खी व जलीय जन्तुओं के लिए हानिकारक मानते हुए किसी भी प्रकार की खेती में प्रयोग पर प्रतिबंध लगाया है।

सुल्तानपुर जिले के रामजी की तरह ही प्रदेश के हज़ारों किसान जागरूकता की कमी के कारण फसल पर कीटनाशकों का अंधाधुंध प्रयोग कर रहे हैं। इससे फसल के साथ साथ जलीय जन्तु व मित्र कीटों के खत्म होने का खतरा बढ़ गया है। गाँवों में आसानी से कीटनाशकों की उप्लब्धता पर रामजी ने बताया,’’ कद्दू के अलावा हम केला भी उगाते हैं। खेती में प्रयोग करने के लिए हम कीटनाशक लंभुआ बाज़ार से खरीदते हैं।’’

केंद्रीय कृषि मंत्रालय की ओर से जनवरी में जारी किए गए राजपत्र में यह साफ बताया गया है कि केंद्र सरकार 18 कीटनाशकों (वेनोमाइल, कार्बाइल, डायजिनोन, फेनारिमोल, फेंथिओन, लिनुरोन, मेथोक्सी ईथाइल, मिथाइल पेराथिओन, सोडियम साइनाइड, थियोमेटोन, ट्राइडेमोर्फ, ट्राइफ्लूरेलिन, अलाक्लोर, डाइक्लोरोवस, फोरेट, फोस्फोमिडोन, ट्रायाज़ोफोज़, ट्राईक्लोरोफोर्न) को मानव जाति व जीव जन्तुओं के लिए भी जानलेवा माना है और इन्हें प्रतिबंधित किया है।

कीटनाशकों की बिक्री पर नाम ना बताने की शर्त पर एक निजी कीटनाशक विक्रेता ने बताया,’’ अभी मार्केट में कीटनाशकों के डीलरों के पास कार्बाइल, फोरेट, मिथाइल पेराथिओन और डाइक्लोरोवस जैसे कीटनाशकों के पुराने स्टॉक मौजूद हैं। इसलिए इन्हें जल्द से जल्द खत्म करने के लिए ये डीलर गाँवों की बाज़ारों में सस्ते दर पर ये कीटनाशक बेच रहे हैं।यही कारण है कि ये कीटनाशी गाँवों में आसानी से मिल रहे हैं।’’

तब राष्ट्रीय पक्षी की गई थी जान

हाल में कानपुर देहात जिले के थानाक्षेत्र के धन्नी निवादा गाँव में सकूर खां की मक्के की फसल में पक्षियों द्वारा नुकसान हो रहा था। इसके चलते उसने मक्का के दाने में दवा का छिड़काव कर दिया। मक्के की फसल को बचाने के लिए प्रयोग की गई दवा के संपर्क में आकर बीती होली के दिन एक राष्ट्रीय पक्षी मोर, राजकीय पक्षी सारस, तीतर और कुत्ते की जान चली गई।

25 लाख प्रतिवर्ष आते हैं चपेट में

विश्व बैंक द्वारा वर्ष 2015 में किए गए वैश्विक कीटनाशक प्रयोग पर अध्ययन के अनुसार, विश्व में करीब 25 लाख लोग प्रतिवर्ष कीटनाशकों के खतरनाक प्रभाव के चपेट में आ जाते हैं, जिनमें से पांच लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है। गाँवों में प्रतिबंधित कीटनाशकों को मानव जाति के लिए हानिकारक बताते हुए सुल्तानपुर जिले के कृषि रक्षा अधिकारी अरुण कुमार त्रिपाठी बताते हैं,’’ कई बार किसान फसल की अच्छी पैदावार और कीटनाशकों के प्रकोप को जल्द खत्म करने के लिए रसायनिक कीटनाशकों का प्रयोग करते हैं। इससे फसलों के साथ साथ इन कीटनाशकों के संपर्क में आने से लोगों को त्वचारोग होने का खतरा रहता है।’’

ये दवाएं लेती हैं इऩ पशु-पक्षियों की जान।

इसलिए लगाया प्रतिबंध

केंद्रीय कृषि मंत्रालय के इस आदेश में देश के सभी राज्य अधिकारियों, निर्माताओं और आयातकों यह सूचित किया गया है कि इन 18 कीटनाशकों में से 12 कीटनाशकों को इनके खतरनाक प्रभाव को देखते हुए एक जनवरी, 2018 तक इनका निर्माण रोका जाए व इन पर प्रतिबंध लगाया जाए। बाकी छह कीटनाशकों के लिए यह अवधि 31 दिसंबर, 2020 तक रखी गई है।

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