Top

मृदा संरक्षण जागरूकता अभियान: "खेती में घटते उत्पादन और बढ़ती लागत की बड़ी वजह है बीमार मिट्टी"

अगर आप किसान हैं तो आपने गौर किया होगा कि कई बार खेत में अच्छा बीज और खाद डालने के बावजूद अच्छा उत्पादन नहीं होता, इसकी एक बड़ी वजह है एक मिट्टी की खराब सेहत। मृदा स्वास्थ्य परीक्षण करवाकर, संतुलित खादों का इस्तेमाल किसान उत्पादन बढ़ा सकते हैं।

Mohit ShuklaMohit Shukla   23 March 2021 1:32 PM GMT

मृदा संरक्षण जागरूकता अभियान: खेती में घटते उत्पादन और बढ़ती लागत की बड़ी वजह है बीमार मिट्टीराजस्थान में जयपुर जिले के चौमू ब्लॉक में आयोजित समारोह को संबोधित करते वक्ता। फोटो- गांव कनेक्शन

चौमू (राजस्थान)। "खेती में घटते उत्पादन और बढ़ती लागत की एक बड़ी वजह मिट्टी की खराब सेहत है। किसान खेतों में अंधाधुंध उर्वरक डालकर न सिर्फ ज्यादा पैसे खर्च कर रहे हैं, बल्कि अपनी उपजाऊ जमीन को बंजर भी बनाते जा रहे हैं। इन सबसे बचने का गुरु मंत्र है कि किसान मिट्टी की जांच कराएं और उसके हिसाब से उर्वरकों का प्रयोग करें।" कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. बाबू राम ने कहा।

किसानों को मृदा जांच के फायदे गिनाते हुए डॉ बाबू राम ने कहा, "जब तक किसान मिट्टी की जरुरत के हिसाब से खादों का प्रयोग नहीं करते। खेती की लागत कम नहीं होगी। साथ ही उत्पादन भी घटेगा।"

डॉ. बाबू राम राजस्थान के जयपुर जिले के चौमू ब्लॉक जयसिंहपुरा में मृदा संरक्षण जागरूकता अभियान के दौरान आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। ये कार्यक्रम देश के ग्रामीण मीडिया संस्थान गाँव कनेक्शन और कृषि क्षेत्र में काम कर रही संस्था कृषि तंत्रा की साझा मुहिम के तहत आयोजित किया गया था। किसानों से सरोकार रखने वाले दोनों संस्थान मिलकर किसानों को जागरूक करने के लिए 11 राज्यों में रैली का आयोजन कर रहे हैं। कश्मीर से शुरू हुई ये रैली 40 दिनों बाद कन्याकुमारी में समाप्त होगी।

संबंधित खबर- मृदा संरक्षण जागरूकता अभियान: 'माटी बोल पाती तो अपने साथ हो रहे अन्याय का विरोध करती'

जयपुर में आयोजित समारोह में अथितियों को परापंरागत पगड़ी बांधकर स्वागत करते स्थानीय लोग। फोटो- गांव कनेेक्शन

जागरुकता अभियान की शुरुआत तीन मार्च को शेर-ए- कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर साइंस एंड टेक्नोलॉजी जम्मू-कश्मीर के कुलपति प्रो जेपी शर्मा ने हरी झंडी दिखाकर किया था। अब यह साइकिल रैली कश्मीर से लेकर उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, राजस्थान, गुजरात, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र आदि राज्यों से होते हुए 40 दिन के बाद कन्याकुमारी में खत्म होगी। जम्मू-कश्मीर में ही कृषि तंत्रा द्वारा निर्मित अत्याधुनिक स्वाइल टेस्टिंग मशीन कृषि रास्ता को भी किसानों के लिए सार्वजनिक किया गया था।

जयपुर में आयोजित इस जागरूकता अभियान के दौरान जयसिंहपुरा से लेकर नरसिंहपुरा तक साइकिल रैली का आयोजन किया गया। इस दौरान आयोजित जागरूकता रैली में किसानों के साथ ही स्थानीय छात्रों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया।

रैली में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेने पहुचे प्रशिक्षु आईएएस अभिषेक सुराणा ने कहा, "चौमू ब्लॉक सब्जी का गढ़ माना जाता है। यहां से सब्जियां देश के कोने-कोने में सप्लाई की जाती है। सब्जी उत्पादक किसान साल में एक बार मिट्टी का परीक्षण अवश्य कराएं।" इस दौरान उन्होंने कृषि तंत्रा और गाँव कनेक्शन के साझा प्रयास की भी सराहना की।

माटी की पुकार: मृदा संरक्षण जागरूकता अभियान के दौरान आयोजित साइकिल रैली। फोटो- गांव कनेक्शन

कार्यक्रम में शामिल किसानों और दूसरे अतिथियों को संबोधित करते हुए एग्री इनपुट देने वाली कंपनी फ्रेशोकार्ड से जुड़े अधिकारी रवि ढाका ने कहा, "जैसे हम लोग बीमार होते हैं तो तुरंत डॉक्टर को दिखाते हैं और बेहतर इलाज पाने के लिए हम अपने शरीर का चेकअप कराते हैं वैसे ही हमारी भूमि का सिस्टम है। मौजूदा समय में हमारी भूमि इतनी बीमार कि उसे प्रॉपर चेकअप कराकर इलाज की जरूरत है।"

कृषि रास्ता स्वाइल टेस्टिंग मशीन की खूबियां

कृषि तंत्रा द्वारा निर्मित की गई 'कृषि रास्ता' महज 50 मिनट में 12 प्रकार के परीक्षण करके उसके रिजल्ट बता देती है। जबकि सामान्य मशीनें तीन तरह की चांच ही करती हैं और उनके नतीजें आने में काफी दिन लगते हैं। जबकि कृषि रास्ता जिंक, कॉपर, सल्फ़र, कार्बन, आयरन, बोरान, पोटेशियम आदि की तुरंत जांच कर रिजल्ट देती है। जांच रिपोर्ट के साथ ही कृषि वैज्ञानिक मुफ्त सलाह देते हैं।


मृदा जांच और जागरूकता के लिए केंद्र सरकार की योजनाएं

देश में राष्ट्रीय स्तर पर मृदा जांच के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्य योजना की शुरुआत 19 फरवरी 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के सूरतगढ़ जिले से की थी। 9 मार्च को लोकसभा में भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी के एक सवाल के जवाब में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि साल 2015-17 के बीच पहले चरण में 10.74 लाख किसानों को मृदा कार्ड दिए गए थे तो 2017-19 के बीच दूसरे चरण में 11.93 किसानों को मृदा कार्ड दिए गए। साल 2019-20 के दौरान मॉडल ग्राम का कार्यन्वयन कर प्रत्येक ब्लॉक से एक 6954 गांवों से नमूने लेकर जागरुकता कार्यक्रम चलाए गए जबकि 2020-21 के दौरान जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ाने के लिए 98530 गांवों में प्रदर्शन और किसान परीक्षण का आयोजन का निर्यण लिया गया है।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि मृदा परीक्षण समेकित पोषण प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए योजना अगले वित्त वर्ष में भी जारी रहेगी। वर्ष 2021-21 का अनुमान बजट 324.43 करोड़ रुपए है।



संबंधित खबरें- मिट्टी जांच की इस तकनीक से कुछ सेकेंड में पता चल जाएगा आपके खेत में है किस तत्व की कमी



Next Story

More Stories


© 2019 All rights reserved.