बड़ा सवाल : जब देश में दालों की बंपर पैदावार हो रही है तो उसे दूसरे देशों से खरीदने की क्या जरूरत

बड़ा सवाल : जब देश में दालों की बंपर पैदावार हो रही है तो उसे दूसरे देशों से खरीदने की क्या जरूरतऑल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की। एसोसिएशन

देश में पर्याप्त दलहन उत्पादन के बावजूद दाल आयात हो रही है। इसका साइड इफेक्ट ये पड़ रहा है कि देश के किसानों को दालों का सही दाम नहीं मिल रहा है। मध्य प्रदेश दाल उत्पादन में काफी आगे है। वहां के किसान भी इसे लेकर काफी परेशान हैं। ऐसे में वहां के संगठन सरकार से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।

ऑल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल, उपाध्यक्ष सुभाष गुप्ता और सचिव दिनेश अग्रवाल ने भारत सरकार से 5 लाख मिट्रिक टन दलहन- तुअर, उड़द एवं मूंग के आयात का कोटा एक अप्रैल 2018 से समाप्त करने का अनुरोध किया है, ताकि देश के किसानों को दलहन का समर्थन मूल्य (डैच) लागत मूल्य एवं वाजिब मूल्य मिल सके। पदाधिकारियों ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि संगठन द्वारा भारत सरकार से लगातार मांग की जा रही है कि देश के बाहर से तुअर, उड़द और मूंग के आयात को पूर्णतः बंद किया जाये। इस सम्बंध में संगठन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री माननीय सुरेश, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री रामविलास पासवान को ज्ञापन भेज चुका है। अगस्त 2017 में भारत सरकार ने तुअर के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था जिसमें 2 लाख मिट्रिक टन तुअर आयात की समय सीमा 31 मार्च 2018 निर्धारित की है, जबकि अभी तक 2 लाख मिट्रिक टन से अधिक तुअर देश के बाहर से भारत आ चुकी है।

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इस वर्ष देश में दलहनों का उत्पादन काफी अच्छा हुआ है। सरकार ने 2 लाख मिट्रिक टन तुअर के आयात की अनुमति दे रखी है। उसे एक अप्रैल 2018 के बाद बंद करने की आवश्यकता है। साथ ही सरकार द्वारा 3 लाख मिट्रिक टन उड़द एवं मूंग के आयात की भी समय सीमा 31 मार्च 2018 निर्धारित की है, उस ऑर्डर को भी समाप्त किया जाना चाहिए।

वर्तमान आदेशानुसार एक अप्रैल 2018 के बाद फिर से भारत सरकार के पूर्व निर्धारित कोटे के अनुसार 2 लाख मिट्रिक टन तुअर तथा 3 लाख मिट्रिक टन उड़द एवं मूंग देश के बाहर से भारत में आना प्रारंभ हो जायेगा, जिसके कारण देश के किसानों को दलहन का समर्थन मूल्य (डैच) मिलने संभावना और कम हो जायेगी। जबकि मप्र उच्च न्यायालय की भोपाल खण्डपीठ ने अपने निर्णय में स्पष्टतः आदेश दिया था कि किसानों को निर्धारित समर्थन मूल्य मिलना चाहिए। लगभग एक वर्ष से भी अधिक समय

से किसानों को उनकी कृषि उपज का समर्थन मूल्य नहीं मिल पा रहा है। वर्ष 2017-18 में देश के बाहर से दलहनों का आयात कम करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं, जिसके फलस्वरूप दिसंबर 2016 तक की तुलना में दिसंबर 2017 में आयात में 52% की कमी आयी है, किसानों को समर्थन मूल्य नहीं मिल पा रहाहै।

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देश में किसानों को वर्ष 2017 में बहुत अधिक नुकसान हुआ है, किसानों ने देश के अनेक राज्यों में आंदोलन और हड़ताल भी की है तथा मध्य प्रदेश के नीमच एवं मंदसौर में तो गंभीर और दुःखद घटनाएं भी घटी हैं। मूंग की नई फसल अच्छी आई है तथा उड़द की नई फसल भी बड़ी मात्रा में बिकने बाजार (मार्केट) में आ रही है। साथ ही सरकार का गोदामों में बहुत अधिक रखा स्टॉक भी टेण्डर पद्धति से अलग-अलग राज्यों में विक्रय हो रहा है। सभी किसानों को तुअर का समर्थन मूल्य 5450/- और मूंग का समर्थन मूल्य 5575/- और उड़द का समर्थन मूल्य 5450/- नहीं मिल पा रहा है। सरकारों को नई फसल समर्थन मूल्य पर प्रत्येक राज्य में किसानों से खरीदी करना चाहिए, ताकि किसानों को नुकसान से बचाया जा सके।

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