भारत ही नहीं आलू के ज्यादा उत्पादन से पाकिस्तान और बांग्लादेश भी परेशान

Arvind shukklaArvind shukkla   9 March 2017 5:20 PM GMT

भारत ही नहीं आलू के ज्यादा उत्पादन से पाकिस्तान और बांग्लादेश भी परेशानलखनऊ समेत यूपी के कई जिलों में कोल्ड स्टोर फुल हो चुके हैं।

लखनऊ। देश के ज्यादातर लोगों को जब पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के परिणामों का इंतजार है, यूपी और पंजाब समेत कई राज्यों के किसान अपना आलू रखने के लिए कोल्ड स्टोर के बाहर लाइऩ में लगे हैं। यूपी के लगभग कोल्ड स्टोरेज फुल हो चुके हैं, जबकि अभी हजारों एकड़ फसल खेतों लगी है।

अभी आलू किसानों के पास दो ही रास्ते हैं, आलू स्टोर भेजें या जो रेट मिल रहा है उसी में बेच दें। बाहर भी मांग नहीं है क्योंकि पाकिस्तान से लेकर बांग्लादेश तक में आलू की अच्छी पैदावार हुई है।
राजेंद्र शर्मा, आलू आढ़ती, आजादपुर मंडी, दिल्ली

यूपी, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश से लेकर बिहार तक में इस बार आलू की अच्छी पैदावार हुई है। बंपर उत्पदान से आलू के रेट इतने कम हो गए हैं कि खरीददार खोजे नहीं मिल रहे हैं। लखनऊ, इंदौर और भटिंडा से लेकर दिल्ली का आजादपुर मंडी तक में ट्रकों की लाइन लगी हुई है तो कोल्ड स्टोर के बाहर पिछले कई दिनों से किसान अपना नंबर आने के इंतजार में हैं। यूपी में ज्यादार कोल्ड स्टोरेज फुल हो चुके हैं, या पहले से वो पर्ची काट चुके किसानों का ही आलू रख रहे हैं।

यूपी में अभी भी हजारों एकड़ फसल खेत में खुदने को बाकी है।

बाराबंकी के सूरतगंज ब्लॉक के पल्हरी गांव में रहने वाले आनंद शुक्ला ने अपना आलू सीतापुर जिले के एक स्टोर पहुंचाया है तो तुरकौली ग्राम पंचायत के राम सागर ने बहराइच के नानापारा इलाके के एक स्टोर में किसी तरह अपना 400 कट्टे रखने का जुगाड़ किया है। जबकि उन्होंने अपना 300 कुंटल आलू 280 रुपये प्रति कुंटल में बेच दिया है।

उत्तर प्रदेश में 1700 से ज्यादा कोल्ड स्टोरेज हैं, जबकि प्रदेश में दो राजकीय स्टोरेज भी हैं जो लखनऊ और मेरठ में बने हुए हैं,। देश में कुल 5000 के करीब कोल्ड स्टोरेज हैं, जिनमें 60 फीसदी यूपी में पश्चिम बंगाम में हैं। जबकि उत्पदान क्षमता से कई गुना ज्यादा हुआ है।

बाराबंकी के एक कोल्ड स्टोर में आलू रखते मज़दूर। फोटोः अजय राजपूत

उत्तर प्रदेश में 1700 से ज्यादा कोल्ड स्टोरेज हैं, सबसे ज्यादा कोल्ड स्टोरज आलू बेल्ट कहे जाने वाले आगरा मंडल में हैं। यहां 505 निजी स्टोर हैं। जबकि प्रदेश में दो राजकीय स्टोरेज भी हैं जो लखनऊ और मेरठ में बने हुए हैं, इनकी भंडारण क्षमता 4000 और 2000 मीट्रिक टन है। देश में कुल 5000 के करीब कोल्ड स्टोरेज हैं, जिनमें 60 फीसदी यूपी में पश्चिम बंगाम में हैं। जबकि उत्पदान क्षमता से कई गुना ज्यादा हुआ है।

उत्पादन ज्यादा हो या कम मरता किसान ही है। इस अच्छा उत्पादन हुआ तो रेट नहीं मिला। कम से कम 7-8 रुपये का रेट मिलना चाहिए। सरकार को चाहिए गेहूं की तरह आलू की एमएसपी तय करे। हर हालात में किसान ही क्यों तबाह हो ?
केदार सिरोही, आम किसान यूनियन, इंदौर, मध्यप्रदेश

कमोबेश यही हालात मध्यप्रदेश के भी हैं। मध्यप्रदेश में किसानों के संगठन आम किसान यूनियन से जुड़े केदार सिरोही बताते हैं, “हालात बद्तर होते जा रहे हैं। मध्यप्रदेश में 20-21 लाख टन आलू उत्पादन होने की उम्मीद है लेकिन प्रदेश के पौने दो सौ स्टोर की स्टोरेज क्षमता 10 लाख टन है। ऊपर से यूपी के आगरा से बड़े पैमाने पर आलू यहां आ जाता है, सरकार रेट नहीं दे सकती हो पर्याप्त स्टोर ही बनवा दे।”

पंजाब में जलंधर कैंट के खुसरोपुर में आलू के बड़े किसान सतीष कक्कड़ के पास 7 एकड़ आलू था वो भी परेशान हैं। वो बताते हैं, वैसे देखा जाए तो आलू की पैदावार कम हुई है लेकिन रकबा इतना ज्यादा था कि पूरे देश में आलू को गया।”

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हालात ये हो गए हैं कि किसान अब किसी कीमत पर आलू बेचकर बस खेत खाली करना चाहता है ताकि दूसरी फसल ले सके। आजादपुर मंडी में रोजाना 100 ट्रक आलू पहुंच रहा है।

“आलू किसानों के पास अब दो ही रास्ते हैं, या तो जो भाव मिल रहा है उस पर बेच दें या कोल्ड स्टोर पहुंचा दें, क्योंकि गर्मी बढ़ने पर खेतों का आलू सड़ना तय है।” दिल्ली का आजादपुर मंडी में आलू कारोबारी राजेंद्र शर्मा बताते हैं।

हालांकि राहत की ख़बर ये है कि दिल्ली में रेट में मामूली सुधार हुआ है। फिलहाल आलू 225 रुपये कुंटल से लेकर 425 रुपये कुंटल तक बिक रहा है। आगे के हालात कैसे होंगे पूछऩे पर राजेंद्र शर्मा बताते हैं, “हालात कमोबेश ऐसे ही रहेंगे, अभी आलू स्टोर जा रहा है तो बाजार में 10-15 पैसे का सुधार हुआ है। बाहर (विदेश) भी आलू भेजने की गुंजाइश नहीं है, पाकिस्तान से लेकर बांग्लादेश तक में इतना आलू हुआ है कि उन्हें जरुरत नहीं है।”

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आलू किसानों कि कोशिश हैं कि ज्यादा से ज्यादा आलू स्टोर पहुंचा दिया जाए, जिससे शायद आगे चलकर घाटा पूरा हो। केदार सिरोही कहते हैं, “घाटा शायद ही पूरा हो, अगर आलू किसान की लागत निकालनी हो तो कम से कम 7 से 8 रुपये में किसान का आलू बिके लेकिन बिक रहा है दो रुपये में।”

“हर हालात में मरता किसान ही है, ज्यादा उत्पादन हुआ तो किसान गया, कम हुआ तो भी वो जान देने को मजबूर होता है। सरकार को चाहिए की मार्केट खोले किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करे, अगर उसे आम लोगों को सस्ता आलू देना है तो सब्सिडी दे, किसान के हित भी तो ध्यान रखा जाए।” वो आगे जोड़ते हैं। किसान और कारोबारियों के मुताबिक पिछले 20 वर्षों में ये सबसे कम कीमतें हैं, इससे पहले 1997 में आलू की कीमतें 15 पैसे किलो तक पहुंच गई थीं।

कोल्ड स्टोर के बाहर ट्रैक्टर पर अपनी बारी का इंतजार करता आलू किसान।

पाकिस्तान 500,000 टन आलू करना चाहता है निर्यात

पाकिस्तान में आलू की अच्छी पैदावार और गिरती कीमतों को स्थिर रखने के लिए लाखों कुंटल आलू विदेशों को निर्यात करने की योजना बनाई है। पाकिस्तानी मीडिया ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं अऩुसंधान मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी के हवाले से लिखा है कि सरकार को तत्काल 500,000 टन आलू निर्यात करने की कदम उठाने चाहिए वर्ना कमोडिटी की कीमतें स्थानीय बाजारों में टूट जाएंगे। एक अऩुमान के मुताबिक पाकिस्तान की घरेलू खपत करीब 3 मिलियन टन सालाना है जबकि इस बार 3.7 मिलियन से ज्यादा उत्पादन होने की उम्मीद है।

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