वीडियो: बेमौसम होगी सब्जियों की खेती, 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजिटेबल' बनकर तैयार

किसानों को किसी भी मौसम में सब्जियों की फसल की अच्छी नर्सरी के लिए भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी। कन्नौज सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फार वेजीटेबल केंद्र बनकर तैयार है।

Ajay MishraAjay Mishra   3 Sep 2018 10:34 AM GMT

कन्नौज (उत्तर प्रदेश)। सब्जियों की खेती करने वालों के सामने पौध की कई बार समस्या आ आती है। जो किसान पॉली हाउस या ग्रीन हाउस में अगैती नर्सरी कर ले जाते हैं वो बाजार में अच्छा मुनाफा भी कमाते हैं, जबकि आम किसानों के लिए ये संभव नहीं हो पाता है। लेकिन अब आम किसानों को किसी भी मौसम में अच्छी नर्सरी के लिए भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी। कन्नौज में बनाए जा रहे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फार वेजीटेबल केंद्र से उनकी कई समस्याएं हल हो जाएंगी।

उत्तर प्रदेश में इत्र के लिए दुनियभर में प्रसिद्ध कन्नौज में इजरायल के तकीनीकी सहयोग से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजिटेबल का निर्माण लगभग पूरा होने वाला है। यहां पर एक बार में तीन पौधे मिल सकेंगे।

उत्तर प्रदेश के कन्नौज में इजरायल की तकनीकी से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फार वेजिटेवल (सब्जी) बनाया गया है, जिससे भारत के किसानों को काफी फायदा होगा। एक बार में तीन लाख बेमौसम पौध से तैयार किए जा सकेंगे। सेंटर में न सिर्फ किसानों के लिए नर्सरी तैयार होगी बल्कि देश भर से आए किसानों को ट्रेनिंग भी दी जाएगी। यहां पर 1152 वर्ग मीटर में हाईटेक नर्सरी बनाई गई है तो 1008 वर्ग मीटर में नेचुरली वेंटीलेटेड पॉली हाउस है। वाक इन टनल 250 वर्ग मीटर में और इंसेक्टनेट हाउस 500 वर्ग मीटर का है। इसके साथ ही ऑटोमेटिक आटोमाइजेशन यूनिट की स्थापना मेसर्स शील बायोटेक की ओर से की जा रही है।

कन्नौज के जिला उद्यान अधिकारी मनोज कुमार चतुर्वेदी बताते हैं, ''उमर्दा क्षेत्र में 8.628 हेक्टेयर जमीन में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजीटेवुल का निर्माण 780 लाख की लागत से हो रहा है। करीब 549 लाख रूपये खर्च किया जा चुका है। कार्य तकरीबन पूरा हो रहा है।''

ये भी पढ़ें-वीडियो: लौकी से कमाई का तरीका, आधे एकड़ खेत से हर दिन निकलती हैं 200-300 लौकियां

वो आगे बताते हैं, ' केंद्र में आधुनिक तरीके से सब्जी उत्पादन होगा। इंडो इजरायल कॉरपोरेशन तकनीकी के सहयोग से काम हो रहा है। इजरायल के काउंसलर डेन एलुफ भी यहां की विजिट कर चुके हैं। समय-समय पर वहां के वैज्ञानिक भी यहां आएंगे।''

भारत सरकार के बजट से बनकर तैयार हो रहे इस केंद्र में प्रशिक्षण के साथ ही प्रदर्शन भी किसानों को कराया जाएगा। तकनीकी के सहयोग से किसानों को सब्जियों की खेती करना सिखाया जाएगा। उद्यान विभाग के मुताबिक यहां तैयार होने वाली पौध निरोग और स्वस्थ होंगी, जो कई गुना ज्यादा उत्पादन भी देंगी। नर्सरी में खाद पानी और दवा आदि देने के लिए इजरायल से स्वचलित मशीनें मंगाई गई हैं।' किसानों की सुविधा के लिए यहां हर वक्त 25 किसानों के ठहरने की व्यवस्था करेगी, जबकि साल में एक बार सेमिनार भी होगा।

जिला उद्यान अधिकारी के मुताबिक केंद्र कई तरह से काम करेगा। ''किसान अपना बीज देगा, केंद्र पौध तैयार करेगा और उसको पैक करके वापस देगा। किसान से सरकारी लागत ली जाएगी। इस राशि से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का रखरखाव व देखभाल होती रहेगी। आगे सरकार से पैसा नहीं मिलेगा, जिससे केंद्र चलता रहे।'

'यहां किसानों को किसानों को सब्जी उत्पादन की नई जानकारियां दी जाएंगी। सब्जियों के ज्यादा बीज हाईब्रिड और महंगे हैं। उनकी नर्सरी कई बार किसान अच्छे से तैयार नहीं कर पाते, जिससे नुकसान हो जाता है। लेकिन यहां पर थोड़े पैसे देकर वो पौध ले सकेंगे।' डॉ. वीके कनौजिया, कृषि वैज्ञानिक

जिले के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ वीके कनौजिया बताते हैं कि ''यहां किसानों को किसानों को सब्जी उत्पादन की नई जानकारियां दी जाएंगी। सब्जियों के ज्यादा बीज हाईब्रिड और महंगे हैं। उनकी नर्सरी कई बार किसान अच्छे से तैयार नहीं कर पाते, जिससे नुकसान हो जाता है। लेकिन यहां पर थोड़े पैसे देकर वो पौध ले सकेंगे।' ये सेंटर उन किसानों के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद साबित होगा तो अगैती फसलें उगाते हैं। सर्दियों में अगैती गोभी के लिए जून-जुलाई में नर्सरी तैयार करने होती है लेकिन आम बारिश में ये फसल तैयार करना मुश्किल होता, लेकिन इस सेंटर या पॉली हाउस वाले किसान ये आसानी से कर सकते हैं।

डॉ. कनौजिया कहते हैं, ''किसान पहले डिमांड देकर अमुक वैरायटी का पौध भी प्राप्त कर सकता है। यह केंद्र सब्जी उत्पादन में मील का पत्थर साबित है।'

बस्ती में फल तो कानपुर में आलू का केंद्र बनेगा

डॉ. कनौजिया के मुताबिक सब्जी की तरह एक आलू और दूसरा फलों के लिए एक्सीलेंस सेंटर यूपी में बनाए जा रहे हैं। वो आगे बताते हैं, "पहले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर पोटैटो (आलू) कन्नौज कृषि विज्ञान केंद्र पर ही बनना था, लेकिन जगह की कमी और अन्य वजह से नहीं बन सका। अब यह कानपुर में बनेगा। जबकि पूर्वांचल के बस्ती में बस्ती में फल के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फ्रूट बन रहा है।

कन्नौज के तिर्वा इलाके के दहलेपुर्वा निवासी किसान सर्वेश यादव बताते हैं, जैसा बताया जा रहा है अगर ऐसा होता है तो हम किसानों के लिए अच्छी बात है। इससे सब्जी किसानों को काफी फायदा होगा।" कन्नौज में ही बढ़नपुर वीरहार के प्रधान हुकुम सिंह कहते हैं कि ''मैंने सुना है केंद्र पर दूर-दूर के किसान आएंगे ये तो पूरे जिले के लिए अच्छी बात होगी।'

बिजली कनेक्शन का अडंगा

केंद्र पर बिजली कनेक्शन नहीं हो सका है। डीएचओ मनोज कुमार चतुर्वेदी बताते हैं कि काऊ मिल्क प्लांट के सहयोग से कनेक्शन होना है, इसके लिए एनओसी की जरूरत है। प्रमुख सचिव दुग्ध विकास को डीएम साहब ने पत्र लिखा है। इस बाबत उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण निदेषक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने भी पत्र भेजा है।

ये भी पढ़ें- झारखंड की महिलाओं का आविष्कार, बांस के इस जुगाड़ में छह महीने तक नहीं सड़ेंगे आलू

ये भी पढ़ें- राजस्थान के किसान खेमाराम ने अपने गांव को बना दिया मिनी इजरायल, सालाना 1 करोड़ का टर्नओवर

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top