चीन ने भारतीय कपास का आयात रोका

अमित सिंहअमित सिंह   2 July 2016 5:30 AM GMT

चीन ने भारतीय कपास का आयात रोकाgaon connection

लखनऊ। चीन ने भारतीय कपास का आयात रोककर घरेलू इस्तेमाल के लिए अपने पास रिज़र्व पड़े कॉटन की नीलामी शुरू कर दी है। चीन की हज़ारों टेक्सटाइल मिलों ने भारतीय कपास का आयात रोककर नीलामी में मिल रहे कपास का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है, जिसका असर 60 से 70 लाख किसानों के साथ-साथ भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। सबसे ज़्यादा असर गुजरात और महाराष्ट्र के किसानों पर पड़ा है। महाराष्ट्र भारत का सबसे ज़्यादा कपास पैदा करने वाला राज्य है। 

आर्थिक मामलों के जानकार और नाबार्ड के पूर्व चीफ जनरल मैनेजर के के गुप्ता कहते हैं, “चीन में जो कुछ हो रहा है उसका सीधा असर भारतीय कृषि क्षेत्र पर पड़ेगा। मांग में कमी आने से कपास की कीमतें गिर जाएंगी और किसान का मुनाफ़ा भी।भारतीय कपास का सबसे बड़ा इंपोर्टर चीन है। अगर चीन रिज़र्व कॉटन का इस्तेमाल कर रहा है तो कपास की खेती करने वाले किसानों के लिए ये ख़बर अच्छी नहीं है।’’

चीन की चाल से किसान बदहाल 

चीन की इस हरकत का सबसे बड़ी ख़ामियाज़ा किसानों को चुकाना पड़ रहा है। हालात ये हैं कि किसानों को लागत तक निकालना मुश्किल हो रहा है। 

गुजरात के जाम नगर के किसान शम्शुद्दीन (45 वर्ष) बताते हैं, “जब तक हमारे कपास का निर्यात चीन को हो रहा था तब तक हमें प्रति 20 किलो कपास के लिए 1400 से 1600 रुपए तक का दाम मिल रहा था, लेकिन जैसे ही निर्यात रुका है कीमतें गिरकर 850 रुपए प्रति 20 किलो पहुंच गई है। खेती की लागत तो छोड़िए बीज के पैसे भी नहीं मिल पा रहे हैं।’’ गुजरात के भावनगर के एक और किसान विनोद भाई भी कपास की कीमतें गिरने से परेशान हैं। 

विनोद भाई कहते हैं, “स्पिनिंग मिल वाले हमसे कपास नहीं ले रहे हैं। हम लोगों ने कपास की बड़ी मात्रा स्टॉक करके रखी थी। हमें ये उम्मीद थी कि पीक सीज़न में हमें कपास के बढ़िया दाम मिलेंगे। लेकिन हो इसका उल्टा रहा है। एक परेशानी ये भी है कि माल पुराना होने से उसकी चमक कम पड़ जाती है जिसकी वजह से कीमत भी अच्छी नहीं मिलती है।’’

चीन की ओर से सुस्त मांग के कारण भारत से अभी तक 45 लाख गांठ कपास का ही निर्यात किया गया है। एक गांठ में 170 किलोग्राम कपास होता है। सितंबर में समाप्त होने वाले चालू कपास विपणन वर्ष में कुल निर्यात पिछले वर्ष से 29 प्रतिशत घटकर 70 लाख गांठ रहने की संभावना है। 

भारत दुनिया का सबसे बड़ा कपास उत्पादक और दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है। भारत से पिछले फसल साल कुल कपास निर्यात 99 लाख गांठ था। विश्व में कपास के अधिक स्टॉक और चीन की मांग में भारी गिरावट के कारण निर्यात में कमी आई है। वैश्विक निकाय, अंतरराष्ट्रीय कपास परामर्शक समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कपास के भारी स्टॉक के कारण अंतर्राष्ट्रीय कपास की कीमतों पर दबाव पड़ा है जो औसतन 68-70 सेंट प्रति पौंड है। 

सीसीआई सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य पर किसानों से कपास खरीदती है। सीसीआई ने कहा कि उसने फसल वर्ष 2014-15 में 90 लाख गांठ की खरीद लक्ष्य के मुकाबले समर्थन मूल्य पर 86.9 लाख गांठों की खरीद की है। आर्थिक मामलों के जानकार एके अवस्थी कहते हैं, “चीन की ग्रोथ का सबसे अहम जरिया उनका मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर है। चीन की मौजूदा विकास दर 6.2 फीसदी है जो भारत से भी कम है। इस वजह से भी चीन ने भारत से कपास आयात करना बंद कर दिया है।” 

बीते 4 साल में सबसे कम निर्यात

रेटिंग एजेंसी इक्रा की ताज़ा रिपोर्ट कहती है कि चीन की मिले रिजर्व में नीलाम हो रही कॉटन को उठा रहे हैं जिससे भारत का कॉटन और कॉटन यार्न निर्यात प्रभावित होने की कगार पर पहुंच गया है। रिपार्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2016 में भारत के स्पंन यार्न उत्पादन की वृद्धि दर पिछले चार साल में सबसे कम लगभग 3.2 फीसदी रही। घरेलू खपत के कमजोर होने और निर्यात में सीमित वृद्धि होने की वजह से ऐसा हुआ है। इसके अलावा मासिक उत्पादन और खपत के आंकड़े वित्त वर्ष 2016 की दूसरी छमाही में कोई ख़ास बढ़ोतरी का संकेत नहीं दे रहे हैं। इस छमाही में कुल यार्न उत्पादन में 1.4 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई जबकि पहली छमाही में ये 4.9 फीसदी थी। चीन के कॉटन रिजर्व नीलामी का असर भारतीय स्पिनिंग मिलों के मार्जिन पर भी पड़ेगा। 

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