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कई साल बाद किसानों को मिला आलू का अच्छा रेट, आगे और बढ़ सकती हैं कीमतें

Virendra SinghVirendra Singh   20 Feb 2020 8:12 AM GMT

कई साल बाद किसानों को मिला आलू का अच्छा रेट, आगे और बढ़ सकती हैं कीमतें

बाराबंकी/लखनऊ। आलू का चालू सीजन किसानों के लिए रेट के हिसाब से अच्छा जा रहा है। किसानों के मुताबिक करीब 10 साल बाद खुदाई के वक्त (फरवरी) आलू 900-1000 रुपए कुंतल बिक रहा है। पिछले कई वर्षों से आलू 400-600 रुपए कुंतल के आसपास बना हुआ था। हालांकि उत्पादन 30-35 फीसदी कम हो गया है।

आलू के बड़े किसान रामचंद्र वर्मा के पास 12 एकड़ आलू था, जिसे वो कच्चा ही इसी हफ्ते बेच चुके हैं। रामचंद्र बताते हैं, "इस बार रेट अच्छी जा रहा है। फरवरी महीने में अगर 1000 कुंतल का भाव मिले तो किसान का फायदा है। मुझे लगता है जब आलू स्टोर में रखा जाएगा तो रेट और बढ़कर 1300-1400 रुपए तक पहुंच सकते हैं।" रामचंद्र यूपी के बाराबंकी में रहते हैं।

सब्जियों के राजा कहे जाने वाले आलू का उत्पादन भारत के उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, गुजरात, बिहार, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक समेत कई राज्यों में होता है। लेकिन यूपी में सबसे ज्यादा उत्पादन किया जाता है।

आलू बेल्ट फर्रुखाबाद में अहमदपुर देवरिया गांव के किसान विनोद कटियार के पास 6 एकड़ आलू था। विनोद कटियार फोन पर बताते हैं, "ये सही है कि इस बार आलू का रेट अच्छा जा रहा है। पिछले एक हफ्ते से 1000-1200 कुंतल का रेट है। लेकिन इसका दूसरा पहलू ये है कि उत्पादन कम हुआ है। पहले जहां एक एकड़ में 300 कट्टे (50 किलो) निकलते थे इस बार 200 ही निकल रहे हैं।"

इस बार आलू के सीजन में मौसम लगातार बिगड़ा रहा। पहले कई दौर की बारिश ने आगरा और फर्रुखाबाद समेत कई जिलों में नुकसान पहुंचाया था। जिसके बाद कई जिलों में पाले का भी असर रहा है। कई दूसरे राज्यों में भी उत्पादन प्रभावित हुआ है।


उत्तर प्रदेश सरकार के उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के निदेशक एसवी शर्मा के मुताबिक प्रदेश में 2019-20 में 575 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू बोया गया, जिसके सापेक्ष 160.00 लाख मिट्रिक टन आलू का उत्पादन सम्भावित है।

निदेशक एसवी शर्मा ने बताया कि वर्तमान में 1911 निजी शीतगृह हैं, जिनका भंडारण क्षमता 156.86 लाख मिट्रिक टन हैं।" उन्होंने किसानों को कोल्ड स्टोरेज में पहुंचाने से पहले कई तरह की हिदायत बरतने की सलाह दी है।

आलू उत्पादन में पूर्वी उत्तर प्रदेश में बाराबंकी का पहला स्थान है। इटावा, आगरा, फर्रुखाबाद, कन्नौज, मैनपुरी, फिरोजाबाद, एटा, कासगंज, अलीगढ़ और हाथरस में भी बंपर आलू उत्पादन होता है। जनवरी के महीने में यूपी के अलग-अलग जिलों में 1300-1400 रुपए का औसत रेट रहा था।

आलू की खेती में प्रति एकड़ करीब 30000-40000 रुपए की लागत आती है और बेहतर फसल उत्पादन की बात करें तो 100 से 150 कुंतल तक पैदावार भी हो जाती है।

बाराबंकी जिले में बड़े पैमाने पर आलू की खेती करने वाले बेलहरा कस्बे के किसान राम सागर वर्मा बताते हैं, "पिछले कई वर्षों से हमें आलू की खेती में सिर्फ लागत निकल पा रही थी, लेकिन इस बार अच्छे मुनाफे की संभावनाएं बनी हैं। जनवरी में 1400 ऊपर का रेट गया जो इधर मेरी जानकारी में पहली बार था।'

स्थानीय कारोबारियों के मुताबिक साल में 2007 में आलू का अच्छा रेट मिला था। इससे पहले साल में 2014 में आलू फुटकर में 40 रुपए किलो बिकने लगा था लेकिन उसका फायदा किसानों को नहीं मिल पाया था क्योंकि बढ़े रेट का फायदा कोल्ड स्टोरेज और कारोबारियों को मिला था।

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साल 2016-17 में माटी मोल हो गया था आलू

साल 2016-17 में आलू की कीमतें देशभर में माटी मोल हो गई थीं। कई जगहों किसानों ने अपने खेत में फसल जुतवा दी थी। पंजाब और हरियाणा में 10 दिनों के अंदर 70 किसानों की आत्महत्या की ख़बर भी आई थी। उत्तर प्रदेश में भी आगरा और फिरोजाबाद में कोल्ड स्टोरेज के बाहर आलू मुफ्त में फिंकवा दिए गए थे क्योंकि किसान अपना आलू छुड़ाने नहीं पहुंचे थे।

किसानों के लगातार हंगामे के बाद उत्तर प्रदेश में सरकार सरकारी दरों पर आलू की खरीद भी कराई थी।

अप्रैल 2017 को योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट में प्रदेश में सरकारी दर पर आलू खरीद को मंजूरी दी थी, जिसके बाद 487 रुपए प्रति कुंतल की कई जगहों पर खरीद हुई थी। इससे पहले साल 2014 में दिल्ली-मुंबई में आलू फुटकर में 40 रुपए किलो बिकने लगा था, जिसके बाद सरकार को आलू आयात करना पड़ा था।

उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की भंडारण के लिए सलाह

उद्यान निदेशक ने आलू उत्पादकों को सलाह दी है कि वे अपने आलू को 15 फरवरी से (अगैती प्रजाति) जमीन से सुरक्षा पूर्वक निकाल कर छप्परनुमा स्थान पर छायानुमा जिसकी ऊंचाई 1.20 मीटर का हो में ढेर बनाकर एक सप्ताह तक रखना चाहिए, जिससे आलू में लगी मिट्टी स्वतः निकल जाये। छनाई-बिनाई के बाद भन्डारण के लिये केवल बीज आकार मोटा एवं छोटा आलू कन्दों को अलग-अलग भंडारण करना चाहिए।

उन्होंने बताया कि आलू कन्दों को बोरों में भरने से पूर्व 03 प्रतिशत बोरिक एसिड अथवा आरगेनिक मरक्यूरियल कम्पाउन्ड की दवा के घोल में 30 मिनट तक अवश्य उपचारित किया जाये। भण्डारण के 45 दिन बाद आलू के बोरों की प्रथम पल्टाई अवश्यक होनी चाहिए।

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