किसानों के लिए अच्छी खबर, यूपी की कृषि निर्यात नीति में संसोधन, क्लस्टर बनाने में मिलेगी मदद

यूपी से कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने क्लस्टर बनाने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। पहले एक कलस्टर बनाने के लिए 20 हेक्टयर एक मुश्त जमीन की जरुरत थी, इस शर्त को खत्म कर दिया गया है।

किसानों के लिए अच्छी खबर, यूपी की कृषि निर्यात नीति में संसोधन, क्लस्टर बनाने में मिलेगी मदद

 कृषि उत्पादन के अलावा, प्रसंस्करण,स्टोरेज, मार्केटिंग से लेकर ट्रांसपोटेशन तक में सरकार सुविधाएं देती है।

लखनऊ (यूपी)। उत्तर प्रदेश में ऐसे किसानों के लिए राहत की खबर है जो अपनी कृषि उपज को विदेशों में निर्यात करना चाहते हैं। सरकार ने निर्यात क्लस्टर योजना के तहत किसानों की सुविधा के लिए क्लस्टर बनाने के लिए एक साथ 20 हेक्टेयर की शर्त खत्म कर दी गई। अब पूरे ब्लॉक में अलग-अलग किसानों की 50 हेक्टेयर जमीन होने पर कलस्टर बनाया जा सकेगा।

उत्तर प्रदेश में मंत्रिपरिषद ने उ.प्र. कृषि निर्यात नीति-2019 में संशोधन किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। किसानों के हित में कृषि उत्पादों के निर्यात को सरल एवं सुगम बनाने के लिए नीति में ये संशोधन किये गये हैं।

यूपी कृषि निर्यात नीति-2019 के तहत निर्यात क्लस्टर्स के लिए न्यूनतम 50 हेक्टेयर की कृषि भूमि होनी चाहिए वो भी 20-20 हेक्टेयर जमीन ऐसी हो, जिसकी मेड़ें आपस में मिली हों। लेकिन एक साथ इतनी जमीन मिलना मुश्किल हो रहा था। जिसके चलते प्रदेश में निर्यात क्लस्टर बन ही नहीं पा रहे थे। कैबिनेट ने इसमें बदलाव कर 20-20 हेक्टयर की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। संसोधित नीति के तहत विकास खण्ड एरिया में न्यूनतम 50 हेक्टेयर की कृषि भूमि होने का प्राविधान किया गया है। जिसमें कई गांवों के छोटे किसान हो सकते हैं।

गांव कनेक्शन से बात करते हुए कृषि एवं विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार निदेशालय में निदेशक डॉ. सुग्रीव शुक्ला ने कहा, "अभी तक जो कलस्टर के लिए जो प्रोत्साहन दिया जा रहा था उसमें पहले शर्त थी की पहले कलस्टर 50 से 100 हेक्टेयर का बनेगा। उसमें 20-20 हेक्टयर की निरंतरता होनी चाहिए यानि कोई टुकड़ा 20 हेक्टेयर से छोटा नहीं होगा। लेकिन यूपी में लोगों के पास लैंड होर्डिंग ही कम है यहां छोटे-छोटे किसान हैं। तो कलस्टर बन ही नहीं पा रहे थे, इसलिए सरकार ने ये शर्त ही हटा दी है।"

वो आगे बताते हैं, "नए नियमों के तहत अब किसी ब्लॉक के 50-100 गांवों में जो भी एक या हो हेक्टयेर वाले किसान हैं उन्हें मिलाकर कलस्टर बनाया जा सकेगा। क्योंकि निर्यात की सबसे बड़ी जरुरत होती है कि क्वालिटी प्रड्यूस और डिजायर क्वालिटी यानि गुणवत्ता युक्त मांग के अनुरुप ज्यादा उत्पादन होना ही चाहिए।"


डॉ. सुग्रीव शुक्ला के मुताबिक यूपी में निर्यात की अपार संभावनाएं हैं और किसान तेजी से नई तकनीकी और सरकार की योजनाएं के जरिए बेहतर उत्पादन करने लगे हैं।

वो कहते है, पिछले दिनों लखीमपुर से 40 टन केला विदेश भेजा गया। हमें लग रहा है, अगले कुछ दिनों में हम लोग केले में ही निर्यात दोगुना हो जाएगा। इसके अलावा तमाम दूसरी फसले हैं, जिनके निर्यात के लिए सरकार बड़े पैमाने पर सब्सिडी देती है।"

यूपी में निर्यात क्लस्टर बनाने के लिए पहले 50 हेक्टेयर पर सरकार 10 लाख रुपए का अनुदान देती है, इसके बाद प्रति 50 हेक्टयर पर 6 लाख रुपए का अनुदान मिलता है। कृषि उत्पादन के अलावा, प्रसंस्करण,स्टोरेज, मार्केटिंग से लेकर ट्रांसपोटेशन तक में सरकार सुविधाएं देती है।

संसोधित नीति के तहत क्लस्टर्स के निकट स्थापित की जाने वाली नवीन प्रसंस्करण इकाइयों के लिए निर्यात आधारित प्रोत्साहन धनराशि दिए जाने, परिवहन अनुदान दिए जाने एवं क्लस्टर सूची में संशोधन की प्रकिया को सरल करने और समय पर किसानों को भुगतान कराने के लिए एक समिति का गठन किया गया है। अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव, कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार विभाग, उ.प्र. शासन की अध्यक्षता में इस स्टेट लेवल कमेटी का गठन किया जाएगा। सचिव निदेशक, कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार, उ.प्र. एवं अन्य सदस्य शासन द्वारा नामित अधिकारी इसके सदस्य होंगे।

प्रदेश की लैण्ड लॉक स्थिति जल मार्ग से निर्यात को बढ़ावा देने के लिए जल मार्ग से निर्यात हेतु परिवहन अनुदान 5 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये प्रति किलोग्राम पोर्ट तक उत्पाद पहुंचाने के मार्ग व्यय सहित किया गया है। ये सुविधा रेल मार्ग से भी पहुंचाने पर लागू होगी। सरकार का मानना है कि इससे निर्यात के लिए पोर्ट तक रेल/सड़क मार्ग से उत्पाद पहुंचाने पर किसानों पर पड़ने वाले अतिरिक्त खर्चे में एक हद तक पूर्ति हो सकेगी।

उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन मण्डी (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2020 के प्राविधानानुसार, उत्तर प्रदेश में उत्पादित एवं प्रसंस्कृत विनिर्दिष्ट कृषि उपज पर मण्डी शुल्क/विकास सेस के साथ-साथ प्रयोक्ता प्रभार से छूट को भी सम्मिलित किया गया है। इससे निर्यात को प्रोत्साहित किया जा सकेगा तथा प्रक्रिया के सरलीकरण हेतु निर्यात दायित्व सिद्ध किये जाने की प्रक्रिया का निर्धारण समय-समय पर शासन द्वारा किये जाने की व्यवस्था की गयी है।

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