प्याज की कीमतों पर नियंत्रण के लिए निर्यात पर रोक, जमाखोरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश

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प्याज की बढ़ती कीमतों को रोकने के लिए सरकार ने प्याज के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दिया है। साथ ही व्यापारियों के लिए स्टॉक सीमा भी तय कर दी है। राज्य सरकारों को जमाखोरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश भी दिए गये हैं।

रविवार को केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने प्याज की निर्यात नीति में अगले आदेश तक संसोधन करते हुए प्याज की सभी किस्मों के निर्यात पर रोक लगा दी है। केंद्रीय खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री रामविलास पासवान ने ट्वीट करने यह जानकारी दी।

तय हुई की प्याज की भंडारण सीमा

केंद्र सरकार ने प्याज के निर्यात पर रोक लगाने के साथ ही जमाखोरों पर लगाम लगाने के लिए भंडारण सीमा तय कर दी है और राज्य सरकार को जमाखोरी रोकने के निर्देश भी दिये हैं। सरकार ने अधिसूचना जारी कर खुदरा कारोबारियों के लिए 100 कुंतल और थोक कारोबारियों के लिए 500 कुंतल भंड़ारण सीमा तय की है।

केंद्र सरकार ने नेफेड के माध्यम से लगभग 56700 टन प्याज का बफर स्टॉक बनाया था। नेफेड के सहयोग से दिल्ली में आम लोगों को 24 रुपए प्रति किलो के भाव से प्याज दिया जा रहा है। यहां से हरियाणा और आंध्र प्रदेश को भी प्याज भेजा जा रहा है। सरकार के इस फैसले के बाद से बांग्लादेश और श्रीलंका को प्याज नहीं भेजा जायेगा।


निर्यात पर क्यों लगी रोक

देश के कई हिस्सों में इस समय प्याज की कीमत 70 से 80 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। 25 सितंबर को उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली, मुंबई और लखनऊ जैसे शहरों में खुदरा प्याज की कीमत 60 रुपए किलो है। मुंबई में यह 58 रुपए किलो और चेन्नई में 42 रुपए किलो बेचा जा रहा है। प्याज की बढ़ी कीमतों से आम लोग परेशान हैं। इसी को देखते हुए सरकार ने ये कदम उठाया है।

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