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हिमाचल प्रदेश: सेब की कीमतों को लेकर 25 किसान यूनियनों ने खोला मोर्चा, कश्मीर की तर्ज पर रेट तय करने की मांग

सेब की कम कीमतों से परेशान हिमाचल प्रदेश के सेब बागानों ने विरोध तेज कर दिया है। किसान प्रदेश में सेब के कारोबार में शामिल कंपनियों पर लगाम लगाने और हिमाचल में कश्मीर की तर्ज पर एमआईएस योजना के तहत सेब के रेट घोषित करने की मांग कर रहे हैं।

Arvind ShuklaArvind Shukla   13 Sep 2021 2:28 PM GMT

हिमाचल प्रदेश: सेब की कीमतों को लेकर 25 किसान यूनियनों ने खोला मोर्चा, कश्मीर की तर्ज पर रेट तय करने की मांग

हिमाचल प्रदेश की 25 किसान यूनियन ने 'संयुक्त किसान मंच' की अगुवाई में शिमला, कुल्लू, मनाली समेत कई जगहों पर प्रदर्शन किया फोटो: अरेंजमेंट

हिमाचल प्रदेश में सेब की गिरती कीमतों से परेशान सेब बागान सड़क पर उतर आए हैं। हिमाचल प्रदेश की 25 किसान यूनियन ने 'संयुक्त किसान मंच' की अगुवाई में शिमला, कुल्लू, मनाली समेत कई जगहों पर प्रदर्शन किया। किसानों ने अदानी व अन्य कंपनियों तथा मंडियों में किसानों के शोषण पर रोक लगाए व हिमाचल प्रदेश में भी कश्मीर की तर्ज पर मंडी मध्यस्थता योजना (MIS) लागू किए जाने की मांग की है। हिमाचल प्रदेश में सेब कीमतों को लेकर विवाद उस वक्त शुरु हुआ जब 24 अगस्त को अडानी की कंपनी एग्री फ्रेश ने अपने रेट जारी किए थे।

हिमाचल प्रदेश में किसान यूनियनों के संगठन 'संयुक्त किसान मंच' के संयोजक हरीश चौहान ने गांव कनेक्शन से कहा, "प्रदेश के सेब किसान बहुत परेशान हैं। हमारी मांग है कि कश्मीर के तर्ज पर ए,बी,सी कैटेगरी के रेट की कीमत 60, 40 और 24 रुपए प्रति किलो तय की जाए। अभी हमारे साथ 25 किसान संगठन है। जल्द ही हमें सब्जी और दूसरे किसान संगठनों का समर्थन मिल जाएगा।" उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश में किसानों ने शिमला, कुल्लू, चंबा और समेत सेब बाहुल्य क्षेत्र में प्रदर्शन किया है। सीएम के नाम ज्ञापन सौंपे हैं। रोडू और जुब्बल में बड़े पैमाने पर प्रदर्शऩ हुआ है।

मुख्यमंत्री के नाम सौंपे ज्ञापन में किसान संयुक्त मंच ने मांग की है कि प्रदेश की विपणन मंडियों में एपीएमसी कानून को सख्ती से लागू किया जाए। मंडियों में खुली बोली लगाई जाए व किसान से गैर कानूनी रूप से की जा रही मनमानी वसूली, जिसमें मनमाने लेबर चार्ज, छूट, बैंक डीडी व अन्य शुल्क (चार्जेज) को तुरन्त समाप्त किया जाए।

इसके साथ ही किसानों के आढ़तियों व खरीददारों के पास बकाया पैसों का भुगतान तुरन्त करवाया जाए। जिन खरीददार व आढ़तियों ने बकाया भुगतान नहीं किया है उनके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाए। अदानी व अन्य कंपनियों के CA स्टोर (कोल्ड स्टोर) में इसके निर्माण के समय शर्तों के अनुसार बागवानों को 25 प्रतिशत सेब रखने के प्रावधान को तुरंत सख्ती से लागू किया जाए। सेब किसानों का आरोप है कि ये कोल्ड स्टोर इसलिए छूट के साथ लगाए गए थे किसानों का सेब रखा जाएगा लेकिन यहां पर बड़े व्यापारी हावी हैं।

सेब किसान न सिर्फ इस साल सेब की कम कीमतों से परेशान है बल्कि सेब व अन्य फलों, फूलों व सब्जियों की पैकेजिंग में इस्तेमाल किये जा रहे कार्टन व ट्रे की कीमतें से भी परेशान हैं। किसानों ने भारी ओलावृष्टि व वर्षा, असामयिक बर्फबारी, सूखा व अन्य प्राकृतिक आपदाओं से किसानों व बागवानों को हुए नुकसान का सरकार मुआवजा दे।

अडानी की कंपनी ने पिछले साल 16 रुपए कम का दिया था रेट

हिमाचल प्रदेश का सेब और सेब के किसान उस वक्त चर्चा में आए जब 24 अगस्त को अड़ानी की सेब का कारोबार करने वाली कंपनी अडानी एग्री फ्रेश ने पहले दौर की खरीद के लिए सेब की कीमतें घोषित की। सुप्रीम क्वालिटी के सेब की कीमत पिछले साल के 88 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 16 रुपए कम यानि 72 रुपए प्रति किलो थी। किसानों का कहना है इस वर्ष जबकि डीजल से लेकर पेस्टीसाइड और पैकिंग मैटेरियल महंगा हो चुका है, कीमतें बढ़ाने के बजाए घटाई जा रही है। जिसके बाद किसानों ने विरोध शुरु किया था। किसानों का आरोप था कि अड़ानी के द्वारा सेब के दाम कम किए जाने से खुले मार्केट भी सेब की कीमतों में गिरावट आ गई है। गांव कनेक्शन ने इस संबंध में 27 अगस्त को विस्तृत खबर प्रकाशित की थी। अडानी के बाद अन्य कई कंपनियों ने भी सेब की कीमतें अडानी के समकक्ष रखी थीं।

अडानी एग्री फ्रेश द्वारा 10-12 सितंबर के लिए जारी रेट, जिसमें सुप्रीम क्वालिटी के सेब की कीमत 74 रुपए फिक्स की गई है।

अडानी ने 2 रुपए का रेट बढ़ाया

'संयुक्त किसान मंच' के संयोजक हरीश चौहान ने गांव कनेक्शन को बताया, "किसानों की नाराजगी को देखते हुए पिछले दिनों अड़ानी की कंपनी सेब की कीमतों में 2 रुपए की बढ़ोतरी की थी। अब वो 74 का रेट दे रहे हैं। मार्केट में सेब की क्वालिटी के हिसाब से रेट हैं जो 500 रुपए से लेकर 2000 रुपए पेटी (25 किलो औसत) तक हैं।"

अडानी की कंपनी अंडानी एग्री फ्रेश लिमिटेड ने 10 से 12 सितंबर के लिए अपने सीए स्टोर में प्रीमियम (80-100 फीसदी रंग) का 74 रुपए, सुप्रीम (60-80 फीसदी रंग) 59 रुपए किलो और इसी तरह क्वालिटी के हिसाब से कम होते गए हैं न्यूनतम रेट (अंडर साइज) 12 रुपए किलो का रेट तय किया था।

वहीं देव भूमि कोल्ड चेन प्राइवेट लिमिटेड ने सुप्रीम क्वालिटी (80-100 रंग LMS) शिमला के सेब को 75 रुपए और किन्नौर के लिए 76 रुपए रेट तय किया है। 80-100 फीसदी रंग वाले सेब को क्रमश 65 और 66 रुपए तय किया है। इसी तरह सेब की क्वालिटी की हिसाब से रेट हैं जो न्यूनतम 12 रुपए किलो तक जाते हैं। (ज्यादा जानाकरी के लिए नीचे ग्राफ देखिए)

देव भूमि कोल्ड स्टोरेज द्वारा घोषित क्वालिटी सेब के लिए दरें।

सेब बागान मालिकों के संगठन प्रोग्रेसिव ग्रोवर एसोसिशएन (PGA) इंडिया के प्रेसिडेंट लोकेंद्र सिंह बिष्ठ कहते हैं, "अडानी और दूसरी कंपनियां 3-4 दिन के लिए रेट घोषित करती हैं। हमारी मुख्य मांग कश्मीर की तर्ज पर सेब का रेट तय करने की है, उससे कई समस्याएं खत्म हो जाएंगी।" बिष्ठ के मुताबिक मार्केट में पिछले पखवाड़े की अपेक्षा इधर रेट सुधरे हैं और अच्छी क्वालिटी को 1500-2000-2200 का रेट मिल जा रहा है।

हिमाचल प्रदेश में इस साल करीब 4 करोड़ पेटी सेब होने का अनुमान है। पिछले साल यहां तीन करोड़ से सवा तीन करोड़ पेटी सेब हुआ था। इस वर्ष पैदावार ठीक है लेकिन मौसम की मार के बाद किसानों को मार्केट में एकाएक आई गिरावट से जोर का झटका लगा है।

हिमाचल प्रदेश में सेब बागान मालिकों के संगठन प्रोग्रेसिव ग्रोवर एसोसिशएन (PGA) इंडिया के प्रेसीडेंट लोकेंद्र बिष्ट ने गांव कनेक्शन को बताया था कि "सबसे अच्छी क्वालिटी का रेट 72 रुपए और सबसे निचले (under size) सेब का रेट तो सिर्फ 12 रुपए किलो ही है। बाग में तो हर तरह का सेब निकलता है। तो किसान अपनी पूरी फसल का औसत रेट 30-50 रुपए किलो का बैठता है।"

किसानों की नाराजगी इस बात को लेकर थी कि बड़ी कंपनियां सीजन पर किसानों से सस्ता से खरीदती है लेकिन ऑफ सीजन में कई गुना महंगा बेचती हैं। बिष्ट ने कहा, "किसान से 50 रुपए औसत में खरीदा गए इसी सेब को अदानी 3-4 महीने बाद 150 से 200 रुपए में बेचता है। अगर प्रति किलो पर कोल्ड स्टोरेज का 20-25 रुपए किलो का खर्च भी मान ले तो कंपनी को दोगुना-तिगुना मुनाफा होता है। अडानी की कंपनी अगर सेब की खरीद के वक्त 4-5 रुपए का अच्छा रेट दे देती तो उसके मुनाफे पर फर्क नहीं पड़ता लेकिन किसान के लिए ये रकम बड़ी हो जाती। क्योंकि इस साल खर्च बहुत बढ़ गए हैं।"

अड़ानी एग्री फ्रेश (Adani Agri Fresh) ने 24 अगस्त से लेकर 29 अगस्त तक के लिए रेट घोषित किए थे। इस रेट पर बागानों से माल खरीदकर अड़ानी के कोल्ड स्टोरेज (सीए) में रखा जाता है। जो ऑफ सीजन (मार्च के बाद) निकालकर बेचा जाता है। अडाणी के रेवाली, सैंज (कुल्लू), रोहरू में कोल्ड स्टोरेज हैं। अदानी के अलावा कई और कंपनियां और बढ़े आढती भी पीक सीजन में माल स्टोर करके ऑफ सीजन में बेचते हैं।

हिमाचल प्रदेश में इस साल करीब 4 करोड़ पेटी सेब होने का अनुमान है। पिछले साल यहां तीन करोड़ से सवा तीन करोड़ पेटी सेब हुआ था। इस वर्ष पैदावार ठीक है लेकिन मौसम की मार के बाद किसानों को मार्केट में एकाएक आई गिरावट से जोर का झटका लगा है।


शिमला के युवा बागान मालिक प्रशांत सेहटा यंग एंड यूनाइटेड ग्रोवर एसोसिएशन, (YUGA) हिमाचल प्रदेश महासचिव भी हैं। उनके मुताबिक डीजल से लेकर पैकेजिंग मैटेरियल की कीमत काफी बढ़ गई है। इसके साथ ही पिछले साल की अपेक्षा पैकिंग मैटेरियल 30 फीसदी तक महंगा हो गया है।

प्रशांत कहते हैं, "पिछले साल जो कर्टन 52-55 रुपए का प्रति पड़ता वो 70 के आसपास पहुंच गया है। वहीं कर्टन में लगाई जाने वाली एपल ट्रे 4 रुपए 50 पैसे की जगह 5 से 6 रुपए में मिलने लगी है। यहां तक सामान्य गत्ता भी 10 रुपए महंगा हो गया है।"

जम्मू-कश्मीर की तरह हिमाचल में भी केंद्र करे खरीद

हिमाचल प्रदेश सरकार सेब की खरीद करती है। लेकिन वो सी ग्रेट (कटा-फटा) सेब खरीदती है। बिष्ट के मुताबिक इस बार ऐसे सेब के लिए हिमाचल सरकार (HPMC के जरिए) ने 50 पैसे प्रति किलो बढ़ाकर 9.50 रुपए का रेट तय किया है। लेकिन प्रदेश सरकार की अपनी लिमिटेशन हैं, वो फूड प्रोसेसिंग के लिए जो खरीद रही है वो किसानों के लिए बहुत बड़ा सपोर्ट है लेकिन हमें असली जरुरत है कि जम्मू-कश्मीर की तरह केंद्र सरकार भी सपोर्ट करें।"

केंद्र सरकार जम्म-कश्मीर में भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड (नेफेड-NAFED) के जरिए सेब की खरीद करती है। हिमाचल प्रदेश के किसान चाहते हैं, उसी तर्ज पर केंद्र सरकार वहां भी खरीद करे।

बिष्ट कहते हैं, "जम्मू-कश्मीर में केंद्र सरकार ए, बी और सी तीनों ग्रेड के रेट तय करती है। जो 24 से लेकर 64 रुपए तक होते हैं। तो कोई सरकारी मशीनरी शामिल होती है तो मार्केट सपोर्ट करता है। किसान को भरोसा रहता है।"

हिमाचल में एक बड़ी आबादी बागवानी और सीधे तौर पर सेब पर निर्भर है। ऊपरी हिमाचल के बड़े हिस्से में पर्यटन और सेब कमाई के दो ही मुख्य जरिया हैं। प्रदेश में 2 लाख हेक्टेयर में सेब के बागान हैं और करीब 4 करोड़ पेटी का उत्पादन अनुमानित है। सेब से जुड़ा सालाना कारोबार 6000 करोड़ का है। कोल्ड स्टोरेज वाली कंपनियां (अदानी भी) प्रदेश में 20 लाख पेटी भी माल नहीं खरीदती हैं।

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