जूट और सनई की खेती से आत्मनिर्भर बन सकते हैं किसान, दुनियाभर में बढ़ रही मांग

Ashwani NigamAshwani Nigam   9 Jan 2017 3:43 PM GMT

जूट और सनई की खेती से आत्मनिर्भर बन सकते हैं किसान, दुनियाभर में बढ़ रही मांगफोटो साभार: इंटरनेट।

लखनऊ। अंतराष्ट्रीय बाजार से लेकर भारतीय महाद्वीप में जूट से बने सामानों की भारी मांग है। जूट से फैशनेबल कपड़े, चप्पल, सजावटी सामान और पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला परंपरागत बोरा बनाया जा रहा है लेकिन देश में जूट की खेती घटती जा रही है। ऐसे में केन्द्र सरकार की सहायता से उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने देश-विदेश में जूट की इस बढ़ी हुई मांग कोे पूरा करने के लिए जूट और सनई की खेती को बढ़ावा देने के लिए काम करना शुरू कर दिया है।

केन्द्र सरकार की जूट तकनीकी मिशन और विशेष जूट कार्यक्रम के तहत प्रदेश के 5 जिलों में जूट और 30 जिलों में सनई की खेती के लिए चयन किया गया है। इन जिलों में किसानों को विभाग जूट और सनई की खेती को प्रोत्साहित करने के साथ ही मदद भी देगा।

उत्तर प्रदेश कृषि सचिव रजनीश गुप्ता ने बताया “प्रदेश में जूट और सनई रेशा वाली फसलों के विकास के लिए योजना चल रही है। इस योजना से किसानों को लाभ मिलेगा साथ ही प्रदेश में रेशा उत्पादन और रेशा की गुणवत्ता में वृद्धि भी इस योजना से होगी।”

प्रदेश के इन जिलों में होगी जूट की खेती

देश में जूट की खेती मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, असम, ओड़िशा, मेघालल और त्रिपुरा में होती थी। दो दशक पहले तक उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी इसकी खेती होती थी लेकिन सरकारी उपेक्षा और बदलते समय के साथ यह खेती लगभग बंद हो गई। ऐसे में एक बार फिर से उत्तर प्रदेश में जूट की खेती की शुरुआत होगी। सिंचाई की अच्छी उपलब्धता को देखते हुए बहराइच, श्रावस्ती, बाराबंकी, सीतापुर और लखीमपुर-खीरी में होगी जूट की खेती की योजना बना रही है। वहीं सनई के लिए गोण्डा, बहराइच, श्रावस्ती, बाराबंकी, सीतापुर, लखीमपुर-खीरी, हरदोई, वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, इलाहाबाद, प्रतापगढ़, कौशाम्बी, फतेहपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, संतरविदास नगर, बांदा, हमीरपुर, महोबा, जालौन, गोरखपुर, महराजगंज, देवरिया, कुशीनगर, सिद्धार्थ नगर, अलीगढ़ और मथुरा में सनई की खेती के लिए चयन किया गया है।

प्रदेश के कुटीर उद्योग को मिलेगा बढ़ावा

लखनऊ। प्रदेश के जिन जिलों का चयन जूट और सनई की खेती के लिए चयनित किया गया है वहीं की जमीन और जलवायु जूट की खेती के लिए अनुकूल और बेहतर उत्पादन देने में सक्षम है। जूट की खेती होने से जहां कृषि और व्यापार में पैकेजिंग और भण्डारण के लिए इस्तेमाल होने वाली बोरियों के लिए कच्चे माल की आपूर्ति प्रदेश से होगी वहीं जूट के थैले, सजावटी सामान, कपड़े और दूसरे हस्तशिल्प के जरिए प्रदेश के कुटीर उद्योग भी इससे बढ़ावा मिलेगा। देश में इस समय जूट की 91 मिले हैं। साल 2015 से अक्टूबर 2016 तक कुल 716 मीट्रिक टन जूट का उत्पादन हुआ है।

विश्व का 49 प्रतिशत जूट उत्पादन भारत में

विश्व में कुल जूट उत्पादन का लगभग 49 प्रतिशत उत्पादन भारत में होता है। आज भी देश में लगभग 40 लाख किसान आठ लाख हेक्टेयर में जूट उपजा रहे हैं। देश में आज भी जूट से विभिन्न प्रकार के उत्पाद तैयार करने वाले कारखानों में ढाई लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला हुआ है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के किसान भी जूट की खेती करके इस नगदी फसल के जरिए आपनी आर्थिक स्थिति को भी बेहतर करेंगे।

दो साल से प्रदेश में जूट की खेती हो गई थी जीरो

भारत सरकार के अंतगर्त आने वाले डायरेक्टरेट ऑफ जूट विकास विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पिछले तीन साल से उत्तर प्रदेश में जूट की खेती नहीं हो रही है। इसके अनुसार साल 2012-13 में उत्तर प्रदेश में 0.4 हेक्टेयर में जूट की खेती हुई थी और कुल जूट का उत्पादन 2025 कुंतल था। ऐसे में प्रदेश में जूट की खेती को फिर से शुरू करने के लिए प्रयास किया जा रहा है। प्रदेश में जूट की खेती के लिए कृषि योग्य बेकार भूमि का उपयोग किया जाएगा। जूट की खेती के बारे में जानकारी देते हुए आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौघोगिकी विश्वविद्यालय फैजाबाद के मृदा विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. आलोक कुमार ने बताया “रेशा वाली फसलों खासकर जूट और सनई की खेती से खेत की मृदा उवर्तरकता में वृद्धि होती है।”

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