खरीफ फसलों के उत्पादन में आयेगी गिरावट, फिर भी किसानों को 12% तक मुनाफा होगा : रिपोर्ट

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खरीफ के उत्पादन में गिरवाट आने के बावजूद किसानों को इससे 10 से 12 फीसदी तक का मुनाफा होगा। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि ऊंचे दामों के कारण किसानों के लाभ में बढ़ोतरी होगी।

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि असमान मानसून सीजन के कारण 22 अगस्त तक धान की बुवाई का रकबा 6.4 फीसदी तक कम हुआ है। हालांकि कपास के निर्यात और देश में सोयाबीन, मक्का और जूट की मांग अच्छी रहने से खरीफ की फसलों को सही दाम मिलेगा। खरीफ सत्र के रकबे में धान रकबे का 30 फीसदी तक होता है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि खरीफ की पैदावार में 3-5 फीसदी तक की गिरावटआयेगी जिससे इसकी कीमतें बढ़ेंगी जिसका किसानों को फायदा होगा।

पिछले तीन वर्षों में खरीफ की बुवाई में अच्छी बढ़ोतरी हुई थी। वर्ष 2016 में 1650.2 लाख टन, वर्ष 2017 में 1681 लाख टन और वर्ष 2018 में रिकॉर्ड 1707 टन की पैदावार हुई थी। लेकिन इस साल मानसून में देरी हुई जिस कारण महाराष्ट्र, ओडिशा और आंध्र प्रदेश जैसे बड़े धान उत्पादक राज्यों में धान की रकबा घट गया। इसके अलावा पश्चिम बंगाल और मराठवाड़ा में फसलें कम बारिश के कारण प्रभावित हुई हैं।

खरीफ सीजन (जून से अक्टूबर तक) में मक्का, अरहर, गन्ना, धान, तिल, बाजरा और ज्वार की फसल होती है।

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रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि कीमतों में बढ़ोतरी होने के कारण कपास और मक्का फसलों का रकबा पिछले सत्र के मुकाबले ज्यादा होगा। कीमतें बढ़ने के कारण किसान इन फसलों की ओर ज्यादा ध्यान देंगे। वहीं अगस्त में ज्यादा बारिश होने के कारण मक्का और धान पर कीटों के हमले बढ़ने की भी आशंका जताई गई है।

अपनी रिपोर्ट में क्रिसिल के अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा, "दक्षिणी-पश्चिमी मानसून में देरी के कारण कुछ क्षेत्रों में अगस्त में हुई भारी बारिश के कारण खरीफ की फसल प्रभावित हुई है। मानसून की अच्छी बारिश वजह से रबी की फसल अच्छी होगी क्योंकि पानी का भंडारण अच्छा रहेगा।"

वहीं क्रिसिल रिसर्च की निदेशक हेतल गांधी ने लिखा हैं कि उत्तर भारत के किसानों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, क्योंकि वे सिर्फ एक फसल की खेती नहीं करते। वे पूरी तरह वर्षा पर ही निर्भर नहीं होते। वहीं, गुजरात, मध्यप्रदेश और राजस्थान में बाजरा, कपास और सोयाबीन की खेती अच्छा मुनाफा देगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि गन्ने की कीमतों में नरमी और मध्य महाराष्ट्र में बारिश से फसलों को हुए नुकसान से महाराष्ट्र के किसानों का मुनाफा डूब सकता है।

मौजूदा खरीफ सत्र 2019-20 के जुलाई पहले सप्ताह में तो खरीफ फसलों की बुवाई की स्थिति और खराब थी। तब उस समय तक खरीफ की बुवाई एक साल पहले की तुलना में 27 फीसदी कम थी और 234.33 लाख हेक्टेयर तक ही पहुंची थी। पिछले साल समान अवधि में 319.68 लाख हेक्टेयर थी। तब केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा था कि सूखे जैसी स्थिति को लेकर हम राज्यों के संपर्क में हैं।

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कृषि मंत्रालय में इसी महीने फसल वर्ष 2017-18 में खाद्यान्न का उत्पादन का अनुमान भी जारी किया गया था जिसमें खाद्यान्न उत्पादन 28.79 करोड़ टन होने का अनुमान है जोकि 2017-18 के लगभग बराबर ही है। लेकिन दलहनी फसलों की बुवाई की रकबे में भारी कमी दर्ज की गई।

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