मणिपुर विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 38 विधानसभा क्षेत्रों में शनिवार को पड़ेंगे वोट 

Sanjay SrivastavaSanjay Srivastava   3 March 2017 4:26 PM GMT

मणिपुर विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 38 विधानसभा क्षेत्रों में शनिवार को पड़ेंगे वोट मणिपुर विधानसभा।

इंफाल (भाषा)। मणिपुर विधानसभा चुनाव 2017 के पहले चरण के लिए तैयारियां पूरी हो गई हैं, जहां कल कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान होगा। राज्य में मतदान कल सुबह सात बजे शुरू होगा। यहां चुनाव दो चरण में हो रहे हैं।

पहले चरण में 38 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होगा। इसके लिए इंफाल पूर्व, इंफाल पश्चिम, बिष्णुपुर और पहाड़ी जिलों छुरचंदपुर एवं कांगपोकपी में फैले इन इलाकों में 1,643 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं। पहले चरण में कुल 168 उम्मीदवार चुनाव मैदान में होंगे। मतदाताओं की कुल संख्या 19,02,562 है जिनमें से 9,28,562 पुरुष और 9,73,989 महिला मतदाता हैं, नए मतदाताओं की संख्या 45,642 है।

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कुल 60 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव की दौड़ में शामिल सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपना चुनाव प्रचार मुख्यत: यूनाइटेड नगा काउंसिल द्वारा लागू आर्थिक नाकेबंदी और इसे तोड़ने में राज्य सरकार की नाकामी पर फोकस किया है।

कथित विकास की कमी, बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, कोषों का दुरुपयोग और राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों कोे भी राजनीतिक पार्टियों ने उठाया है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी समेत पार्टी के कई नेताओं ने वर्ष 2015 में केंद्र सरकार एवं एनएससीएन (आईएम) के बीच हुए नगा फ्रेमवर्क समझौता की ‘‘गोपनीय प्रकृति'' और सामग्री पर सवाल उठाए हैं।

भाजपा नेताओं ने राज्य के दो राष्ट्रीय राजमार्गों पर तीन महीने से अधिक समय से चल रही आर्थिक नाकेबंदी को लेकर सत्तारुढ़ पार्टी पर निशाना साधा। वहीं कांग्रेस ने कहा है कि सरकार ने अपने 15 साल के शासन में कई विकास परियोजनाएं कार्यान्वित कीं और बिजली आपूर्ति में सुधार किया।

मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह ने अपनी हालिया चुनावी रैली में आरोप लगाया कि भाजपा कांग्रेस द्वारा शुरू एवं उद्घाटित की गईं, रेल परियोजनाओं जैसी परियोजनाओं का श्रेय लेना चाहती है। बहरहाल, पिछले साल अपना अनशन तोड़ ‘पीपल्स रिसर्जेंस एंड जस्टिस अलायंस' नामक पार्टी का गठन करने वाली मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला चानू पर सभी की निगाहें हैंं। ‘अफ्सपा' हटाने की मांग को लेकर इरोम शर्मिला 16 साल से अनशन पर थीं और अब वह चुनाव लड़ रही हैं।

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