मोदी सरकार के तीन साल ‘शेखी बघारने, शब्दों के आडंबर और अतिशयोक्ति’ से भरे : कांग्रेस  

मोदी सरकार के तीन साल ‘शेखी बघारने, शब्दों के आडंबर और अतिशयोक्ति’ से भरे : कांग्रेस  कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ।

नई दिल्ली (आईएएनएस)। विपक्षी दल कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीन साल को हर मोर्चे पर विफल करार देते हुए कहा कि यह केवल 'शेखी बघारने, शब्दों के आडंबर और अतिशयोक्ति' से भरा रहा और इस दौरान सिर्फ 'भाषण व आश्वासन' ही होते रहे, जबकि बेरोजगारी सहित कई अन्य समस्याएं जस की तस हैं, जिससे लोग परेशान हैं।

पार्टी ने केंद्र सरकार से बेरोजगारी के मुद्दे पर श्वेत-पत्र जारी करने की मांग की। कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ ने एक संवाददाता सम्मेलन में इसके लिए मोदी सरकार की आलोचना की कि आर्थिक सुस्ती के बावजूद उनकी सरकार तीन साल पूरे होने के उपलक्ष्य में 2,000 करोड़ रुपए खर्च कर रही है।

कमलनाथ ने कहा, "पिछले तीन वर्षों में मोदी सरकार की पहचान केवल शेखी बघारने, शब्दों के आडंबर और अतिशयोक्ति से है। झूठ बोलना, काम नहीं करने के बावजूद जश्न मनाना व दुष्प्रचार ही सरकार की पहचान है। इस दौरान उन्होंने सिर्फ भाषण और आश्वासन ही दिए हैं।"

उन्होंने कहा, "देश के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती बेरोजगारी है और सरकार की वजह से देश में रोजगार की दर पिछले 50 वर्षों की तुलना में निचले स्तर पर है, जबकि पिछले सात वर्षों की तुलना में यह सबसे निम्न स्तर पर है।"

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कमलनाथ ने कहा, "मोदी सरकार ने सालाना दो करोड़ रोजगार उपलब्ध कराने का वादा किया था, लेकिन 2015 में सिर्फ 1.35 लाख रोजगारों का ही सृजन हुआ। हमें 2028 तक 34 करोड़ रोजगारों के सृजन करने की जरूरत है, लेकिन घरेलू निवेश और बैंक ऋण भी ऐतिहासिक रूप से निम्न स्तर पर हैं।"

बढ़ती बेरोजगारी से निपटने के लिए सरकार अपनी योजनाएं जाहिर करें

कांग्रेस ने बढ़ती बेरोजगारी से निपटने के लिए सरकार की योजनाएं जाहिर करने की मांग की।उन्होंने कहा, "आईटी क्षेत्र में बेरोजगारी है और यहां सालाना 20,000 लोगों को रोजगार से हाथ धोना पड़ता है। हम प्रौद्योगिकी में नवाचार की वजह से रोजगारों के सृजन में पहुच रही बाधा पर सरकार की योजनाओं के बारे में जानना चाहते हैं।"

रोजगार नीति पर श्वेत-पत्र की मांग

उन्होंने कहा, "हम सरकार की रोजगार नीति पर श्वेत-पत्र की मांग करते हैं। देश के लोगों की भाषणों और आश्वासनों में कोई दिलचस्पी नहीं है। हम सरकार से यह जानना चाहते हैं कि वह अगले दो वर्षों में किस तरह से रोजगारों का सृजन करेगी।"

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