बिहार: नियुक्ति पत्र के लिए धरना दे रहे टीईटी अभ्यर्थी, स्टेशन पर रात गुजार रहीं महिलाएं

Umesh Kumar RayUmesh Kumar Ray   24 Jan 2021 6:00 AM GMT

30 साल की कामिनी कुमारी के लिए पिछले पांच दिन से रात का ठिकाना पटना जंक्शन का प्लेटफॉर्म है और दिनभर वह जंक्शन से करीब 3 किलोमीटर दूर गर्दनीबाग में धरना देती हैं।

कामिनी 18 जनवरी को ही मुजफ्फरपुर से आई हैं और तब से पटना में ही हैं। उन्होंने गांव कनेक्शन को बताया, "मेरे दो बच्चे हैं। दोनों को घर पर छोड़कर यहां रह रहे हैं। पुलिस ने सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक ही धरने पर बैठने की इजाजत दी है, इसलिए शाम को पटना जंक्शन पर चले जाते हैं। रात में प्लेटफॉर्म पर ही सोते हैं और सुबह में फिर गर्दनीबाग आ जाते हैं।"

कामिनी, बिहार टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (बीटीईटी)/ सेंट्रल टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (सीटीईटी) उत्तीर्ण कर नियुक्ति पत्र की राह देख रहे हजारों अभ्यर्थियों में से एक हैं, जो बिहार सरकार की तरफ से शुरू की गई प्रारंभिक (प्राइमरी) शिक्षक नियोजन प्रक्रिया से गुजर चुके हैं और नियोजन प्रक्रिया में पास कर चुके अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट भी जारी हो चुकी है। लेकिन, अब सरकार काउंसलिंग कर इन्हें नियुक्ति पत्र नहीं दे रही है। बिहार सरकार ने साल 2019 में 94,000 प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति का फैसला लिया था और पिछले साल इन पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की थी, जो इस साल जनवरी के पहले हफ्ते में खत्म हो चुकी है।

प्राथमिक शिक्षकों की नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए संबंधित राज्यों में होने वाली टीईटी परीक्षा या सीटीईटी की परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। 45 प्रतिशत अंकों के साथ माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण, स्नातक (आर्ट/साइंस) या बीएड (बैचलर इन एजुकेशन) कर चुके लोग इस परीक्षा की पात्रता रखते हैं। जब सरकार प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति के लिए वैकेंसी निकालती है, तो टीईटी की परीक्षा ली जाती है।

धरना दे रहे इन अभ्यर्थियों का आरोप है कि काउंसलिंग कर नियुक्ति पत्र देने में सरकार विलम्ब कर रही है। नियुक्ति पत्र देने की मांग पर मेरिट लिस्ट में शामिल अभ्यर्थी 18 जनवरी से धरना दे रहे हैं। इस धरने में महिलाएं भी शामिल हैं। कई महिलाएं तो बच्चों को साथ लेकर धरना देने आई हुई हैं। कामिनी भी धरना देने वाली महिलाओं में से एक है। कामिनी के लिए ये नौकरी काफ़ी मायने रखती है।

दरअसल, जब 10 साल पहले कामिनी की शादी हुई थी तो वह मैट्रिक पास थीं। शादी कर ससुराल आईं, तो उन्होंने आगे पढ़ने की इच्छा जताई। उनकी ससुराल वाले इसके लिए तैयार हो गये। वह कहती हैं, "मैं आगे भी पढ़ना चाहती थी। सास-ससुर ये बात बताई, तो उन्होंने मुझे आगे भी पढ़ाने का फैसला लिया। पति ने भी मुझे पढ़ाई जारी रखने में मदद की। वे काम करने के लिए बाहर भी नहीं गए। गांव में ही खेती-बाड़ी की और कुछ काम-धाम किया ताकि मुझे पढ़ाई में कोई दिक्कत न हो। लेकिन, अब तक नौकरी नहीं लगने से घर में सब लोग तनाव में हैं। मैं खुद परेशान हूं कि घर-परिवार कैसे चलेगा। नौकरी नहीं मिलेगी, दो बच्चों की परवरिश कैसे करूंगी।"

कामिनी देवी के साथ आधा दर्जन महिलाएं और भी हैं, जो प्लेटफॉर्म पर रात गुजारती हैं। "रात में प्लेटफॉर्म पर सोने में डर लगता है। फिर सर्दी भी अधिक है, तो नींद भी नहीं आती है, लेकिन क्या करेंगे। हमारी मजबूरी है," उन्होंने कहा।

कामिनी कुमारी (फ़ोटो- उमेश कुमार राय)

बिहार में प्राथमिक शिक्षकों के 3 लाख पद खाली

बिहार समेत देश के अन्य राज्यों में प्राथमिक शिक्षकों की भारी कमी है। पंजाब के एक आरटीआई कार्यकर्ता ने इसकी जानकारी मांगी तो पता चला कि पूरे भारत में प्राथमिक शिक्षकों के 10 लाख से अधिक पद खाली हैं। इनमें से अकेले बिहार में 3 लाख पद ख़ाली हैं। बिहार में 42,606 प्राथमिक और 28,638 माध्यमिक विद्यालय हैं।

प्राथमिक शिक्षकों की आखिरी नियुक्ति साल 2015 में की गई थी। इसके करीब 4 साल बाद दोबारा नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन ये प्रक्रिया एक बार फिर अधर में लटकती हुई दिख रही है।

स्कूलों में शिक्षकों की कमी के चलते बिहार में शिक्षा पर भी असर पड़ रहा है। पिछले साल फरवरी में पटना हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर चिंता जाहिर की थी। कोर्ट ने कहा था, "बिहार की शिक्षा व्यवस्था युवा पीढ़ी को बर्बाद कर रही है और इसमें तभी सुधार आएगा जब सभी सरकारी अधिकारी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजना शुरू करेंगे।"

मनोज कुमार उन अभ्यर्थियों में एक हैं, जिन्होंने टीईटी पास कर लिया है और अब नियुक्ति पत्र का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने गांव कनेक्शन से कहा, "प्राथमिक शिक्षकों के इतने ज्यादा पद रिक्त होने के बावजूद बिहार सरकार इन पदों पर कोई नियुक्ति नहीं कर रही है जबकि बिहार में शिक्षक की नौकरी करने के इच्छुक युवा लाखों में होंगे। साल 2019 से बहाली की प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन सरकार समय बढ़ाती रही। हम लोग आवेदन पर आवेदन करते रहे। करीब दो साल लग गए मेरिट लिस्ट निकालने में। लेकिन अब फिर सरकार टालमटोल कर रही है।"

"हम चाहते हैं कि सरकार कैंप लगाकर बहाली करे और नियुक्ति पत्र दे दे। इसके बाद वह दस्तावेजों का सत्यापन करती रहे," उन्होंने कहा।

राजेश रौशन मधुबनी से यहां धरना देने आये हैं। उन्होंने कहा, "पांच दिन से हम लोग धरने पर बैठे हैं। सरकार तक हमारी आवाज पहुंच रही है कि नहीं, हमें नहीं मालूम। हमारी सिर्फ इतनी मांग है कि जल्द से जल्द काउंसलिंग कर हमें नियुक्ति पत्र सौंप दिया जाए, ताकि हम लोग बच्चों को शिक्षा दे सकें।"

राजेश रौशन शिक्षक बनना चाहते हैं और इसलिए उन्होंने शिक्षा में स्नातक (बीएड) किया और जब वैकेंसी निकली, तो टीईटी भी दिया। वह कहते हैं, "मैं गरीब किसान परिवार से आता हूं। मेरे पिता ने कर्ज लेकर मुझे बीएड कराया। मैंने पटना में रहकर पढ़ाई की, उसका खर्च अलग हुआ लेकिन अब तक मुझे नौकरी नहीं मिली है।"

इन सभी अभ्यर्थियों का कहना है कि वे शिक्षा विभाग में कई दफा जा चुके हैं, लेकिन शिक्षा विभाग नियुक्ति पत्र को लेकर कोई जवाब नहीं दे रहा है। गांव कनेक्शन ने इस संबंध में शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी को फोन किया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार को टीईटी अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल ने प्राथमिक शिक्षा निदेशक रंजीत कुमार से मुलाकात की। इस मुलाकात में रंजीत कुमार ने 25 से 27 जनवरी के बीच नियुक्ति की दिशा में सकारात्मक पहल करने का आश्वासन दिया है।

इस बीच अभ्यर्थियों ने कहा है कि जब तक काउंसलिंग और नियुक्ति पत्र वितरण की प्रक्रिया शुरू करने की तारीख तय कर ये काम शुरू नहीं होता है, तब तक वे धरना जारी रखेंगे।

बिहार के अलग-अलग जिलों से पटना में इकट्ठा हुए शिक्षक अभ्यर्थी (फ़ोटो- उमेश कुमार राय)

पहले भी धरना दे चुके हैं टीईटी अभ्यर्थी

नियुक्ति की मांग पर धरने पर बैठे टीईटी अभ्यर्थियों पर 19 जनवरी को पुलिस ने लाठीचार्ज किया था, जिसमें एक दर्जन से ज्यादा अभ्यर्थी जख्मी हो गये थे। अभ्यर्थियों का आरोप था कि धरना-प्रदर्शन के लिए उन्हें पुलिस से इजाजत मिली हुई थी, इसके बावजूद उन पर दमनात्मक कार्रवाई की गई। पूर्व उप मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पुलिसिया कार्रवाई की निंदा की थी।

ये पहली बार नहीं है कि टीईटी अभ्यर्थी नियुक्ति की मांग पर धरने पर बैठे हुए हैं। दो साल पहले भी इन अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन किया था। उस वक्त भी पुलिस ने उन पर लाठियां बरसाई थीं।

टीईटी अभ्यर्थी इंद्रजीत कुमार कहते हैं, "बिना धरना-प्रदर्शन के सरकार कोई कदम नहीं उठाती है। पिछले दो-तीन साल में हम लोग नियुक्ति की मांग पर कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन सरकार चुप्पी साधे बैठी है।"

"बच्चे पूछ रहे हैं, नौकरी कब करेंगे"

राहुल कुमार (फ़ोटो- उमेश कुमार राय)

शिक्षक की नौकरी के इंतजार में पटना शहर से करीब 30 किलोमीटर दूर फतेहरपुर के रहने वाले राहुल कुमार 40 साल के हो गये हैं। "मैं अब तक बेरोजगार भटक रहा हूं। कमाई का और कोई जरिया नहीं है जिससे दो पैसे कमा सकूं।"

राहुल के दो बच्चे हैं। बेटे की उम्र 12 साल और बेटी की उम्र 8 साल है। राहुल कभी गांव में रहकर तो कभी पटना आकर काम कर लेते हैं, तो उससे बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और घर का खर्च किसी तरह चल पाता है। काम के मामले में उनके पास विकल्प नहीं है क्योंकि वह जरूरतमंद हैं। वह कहते हैं, "जो काम मिलता है, कर लेता हूं। कंस्ट्रक्शन साइट पर ईंट-बालू ढोने का काम मिलता है, तो वह भी करना पड़ता है।"

राहुल कुमार ने 2011 टीईटी पास किया। इसके बाद सरकार ने आदेश निकाला था कि शिक्षकों को नियुक्ति से पहले प्रशिक्षण लेना होगा, तो वर्ष 2013-2015 में उन्होंने प्रशिक्षण लेकर डीएलएड की डिग्री हासिल कर ली। साल 2015 में ही उन्होंने सीटीईटी भी पास कर लिया। साल 2017 में उन्होंने बीटीईटी पास किया।

राहुल कुमार ने कहा, "मेरे बच्चे मुझसे हमेशा पूछते रहते हैं कि कब कुछ (नौकरी) कीजिएगा। मेरी पत्नी मुझे ताना मारती है। समाज के लोग मुझे ताना मार रहे हैं। मैं इन सवालों को सुनकर शर्मिंदा हो जाता हूं। इतनी डिग्री लेने के बाद भी इस उम्मीद में बैठे हैं कि अब सरकार नियुक्ति पत्र देगी। शिक्षक की नौकरी की उम्मीद में कोई दूसरा काम भी नहीं कर पाया। इस तरह धीरे-धीरे समय बीतता चला गया। बच्चे अब बड़े हो गये हैं। अब मेरी उम्र नहीं रही कि बाहर जाकर काम करूं।"

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