स्थानीय भाषाओं में प्रतियोगी परीक्षाओं की मांग को लेकर संसद में डीएमके और एआईडीएमके का हंगामा

स्थानीय भाषाओं में प्रतियोगी परीक्षाओं की मांग को लेकर संसद में डीएमके और एआईडीएमके का हंगामा

लखनऊ। सिर्फ हिंदी और अंग्रेजी भाषा में डाक विभाग की हुई एक परीक्षा के विरोध में डीएमके और एआईडीएमके ने संसद में हंगामा किया। मंगलवार को राज्यसभा में एआईडीएमके, डीएमके सांसदों के साथ कई और दलों के सदस्यों ने इस परीक्षा का विरोध किया और अन्य स्थानीय भारतीय भाषाओं में भी इस परीक्षा को कराने की मांग की।

इसके बाद सरकार ने इस परीक्षा को रद्द कर दिया और विभिन्न भारतीय भाषाओं में नए सिरे से परीक्षा कराने की घोषणा की। इसके बाद सदन में सामान्य तरीके से कामकाज होने लगा। इस मुद्दे पर चार बार सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सदन में घोषणा की कि 14 जुलाई को हुई परीक्षा रद्द कर दी गयी है और नए सिरे से होने वाली परीक्षा तमिल सहित सभी क्षेत्रीय भाषाओं में होगी।

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार ने इस मुद्दे पर गौर किया और 14 जुलाई को डाक विभाग के लिए हुई परीक्षा को रद्द कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि आगे नए सिरे से होने वाली परीक्षा सभी क्षेत्रीय भाषाओं में होगी। प्रसाद ने कहा कि मोदी सरकार तमिल सहित सभी क्षेत्रीय भाषाओं का सम्मान करती है।

उनकी इस घोषणा के बाद एआईडीएमके नेता नवनीत कृष्णन और वी मैत्रेयन, माकपा नेता टी रंगराजन, द्रमुक नेता टी शिवा, भाकपा नेता डी राजा और कांग्रेस नेता आनंद शर्मा, भाजपा नेता भूपेंद्र यादव, सपा नेता रामगोपाल यादव आदि ने सरकार को यह संवेदनशील मुद्दा सुलझाने के लिए धन्यवाद दिया।

हालांकि रामगोपाल यादव ने मांग की कि भोजपुरी भाषा को आधिकारिक भाषा की सूची में शामिल किया जाए। इसके बाद सदन में सुचारू रूप से कामकाज हुआ।

(भाषा से इनपुट के साथ)

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