किसान आंदोलन समाप्त करने के लिए सरकार ने किसानों को दिया 10 सूत्रीय प्रस्ताव, जानिए क्या हैं ये प्रस्ताव?

विचार करने के बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने किया केंद्र सरकार के प्रस्ताव को खारिज, कहा- किसान आंदोलन को और तेज किया जाएगा और पूरे देश में इसका विस्तार किया जाएगा।

Daya SagarDaya Sagar   9 Dec 2020 11:00 AM GMT

सरकार ने किसान आंदोलन समाप्त करने के लिए किसान संगठनों को एक दस सूत्रीय प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव में एमएसपी और मंडी व्यवस्था को और मजबूत बनाने के साथ-साथ पराली जलाने से संबंधित कानून में किसानों के लिए विशेष ढील देने की बात की गई है। साथ ही यह भी कहा गया है कि सरकार कानून में संशोधन करके निजी मंडियों का भी रजिस्ट्रेशन करेगी और उन पर भी सेस और मंडी शुल्क लग सकेगा।

किसानों से फसल खरीदने वाले निजी व्यापारियों और स्टेकहोल्डर्स का रजिस्ट्रेशन से संबंधित कानून राज्य सरकारें भी बना सकेंगी, ऐसा प्रस्ताव केंद्र सरकार ने किसानों को दिया है। इसके साथ ही विवाद की स्थिति में किसान स्थानीय दीवानी न्यायालय में जाकर निजी व्यापारी या कंपनी के खिलाफ मुकदमा भी लड़ सकेंगे।

केंद्र सरकार ने अपने इस प्रस्ताव में किसानों की आशंका को खत्म करने की कोशिश करते हुए कहा है कि कानूनों में कही नहीं लिखा है कि किसानों की जमीन बड़े उद्योगपति कब्जा लेंगे, उसे बंधक बनाया जाएगा या उनकी कुर्की की जाएगी। सरकार ने अपने प्रस्ताव में लिखा है कि कृषि करार अधिनियम के अंतर्गत कृषि भूमि की बिक्री, लीज और मार्टगेज पर किसी प्रकार का करार नहीं हो सकता है। अगर कोई निर्माण होता भी है तो लीज समाप्त हो जाने पर जमीन की मिल्कियत किसानों के पास ही रहेगी।

वहीं कृषि करार अधिनियम की धारा 15 के तहत किसानों के भूमि के विरूद्ध किसी भी तरह की कुर्की नहीं की जा सकती। इस प्रावधान में व्यापारी के विरूद्ध बकाया राशि की स्थिति में 150 प्रतिशत जुर्माने का भी प्रवाधान है, जबकि किसानों के प्रति ऐसा कोई भी कठोर प्रावधान नहीं है। सरकार ने किसान यूनियनों से अपील की है कि वे इन प्रस्तावों को स्वीकार कर आंदोलन समाप्त करें। हालांकि सरकार ने साफ कहा है कि वह किसी भी तरह इन तीन कृषि कानूनों को वापस लेने नहीं जा रही है। कुल मिलाकर सरकार के प्रस्ताव का सार ये है-

१. राज्य सरकार चाहे तो प्राइवेट मंडियों पर भी शुल्क/फीस लगा सकती है।

२. राज्य सरकार चाहे तो मंडी व्यापारियों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर सकती है।

३. किसानों को कोर्ट कचहरी जाने का विकल्प भी दिया जाएगा।

४. किसान और कंपनी के बीच कॉन्ट्रैक्ट की 30 दिन के अंदर रजिस्ट्री होगी।

५. कॉन्ट्रैक्ट कानून में स्पष्ट कर देंगे कि किसान की जमीन या बिल्डिंग पर ऋण या गिरवी नहीं रख सकते।

६. किसानों के जमीन की कुर्की नहीं हो सकेगी।

७. एमएसपी की वर्तमान खरीदी व्यवस्था के संबंध में सरकार लिखित आश्वासन देगी।

८. बिजली बिल अभी ड्राफ्ट में है, लागू नहीं हुआ है।

९. एनसीआर में प्रदूषण वाले कानून पर किसानों की आपत्तियों को समुचित समाधान किया जाएगा।

१०. सरकार कृषि कानूनों को रद्द नहीं करेगी।

किसान संगठनों ने किया प्रस्ताव को खारिज, तेज होगा आंदोलन

सरकार के इन प्रस्तावों पर सिंघु बॉर्डर पर किसानों ने बैठक की और सरकार के इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। संयुक्त किसान मोर्चा ने बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि सरकार अपनी पुरानी बातों को ही गोल-गोल घुमा रही है। जो बातें सरकार की तरफ से पहले से की जा रही थी, उसे फिर से दोहराया जा रहा है। हम लगातार तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं और उस पर ही काबिज हैं। बिना कृषि कानूनों के रद्द करने और एमएसपी गारंटी कानून बनाने के बगैर आंदोलन को समाप्त नहीं किया जाएगा।

किसान नेताओं ने कहा कि देश भर में अब आंदोलन को और तेज किया जाएगा। 12 तारीख को पूरे देश भर के टोल प्लाजा को मुक्त किया जाएगा। अंबानी-अडानी और अन्य उद्योगपतियों के प्रतिष्ठानों, जियो सिम का बहिष्कार किया जाएगा और बीजेपी नेताओं, मंत्रियों और जिला कलेक्ट्रेट कार्यालयों का घेराव किया जाएगा। इसके अलावा 12 तारीख को दिल्ली-जयपुर हाईवे को भी पूरी तरह से चक्का जाम किया जाएगा। किसान मोर्चा ने इन प्रस्तावों को सरकार द्वारा किसानों का किया गया अपमान बताया और कहा कि 14 दिसंबर से पूरे देश भर में इस आंदोलन का विस्तार किया जाएगा और दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड के किसान जिला मुख्यालयों पर 1 दिन का धरना देंगे और अन्य राज्यों के किसान 14 दिसंबर से अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे।


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