राजस्थान: बढ़ते टिड्डी दलों पर काबू पाने के लिए हो सकता है आसमान से छिड़काव

राजस्थान के कृषि मंत्री लाल चंद कटारिया ने विधानसभा में माना कि टिड्डी किसानों के लिए भारी संकट पैदा कर सकते हैं।

राजस्थान: बढ़ते टिड्डी दलों पर काबू पाने के लिए हो सकता है आसमान से छिड़काव

जयपुर/लखनऊ। पाकिस्तान से आए टिड्डियों के दलों से राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में किसानों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। राजस्थान के कृषि मंत्री लाल चंद कटारिया ने भी माना कि ये किसानों के लिए भारी संकट पैदा कर सकता है। इन पर काबू पाने के लिए हवाई छिड़काव की अनुमति मांगी गई है।

मई के आखिरी हफ्ते में राजस्थान के बाड़मेर, जोधपुर, जैसलमेर और जालोर समेत कई जिलों में टिड्डियों के दल का हमला हुआ था, जिसके बाद से रोकथाम के इंतजाम जारी हैं। सोमवार को विधानसभा के शून्यकाल में कटारिया ने कहा, "टिड्डी दल ने पाकिस्तान, यमन और ईरान के रास्ते भारत में प्रवेश किया है और ये किसानों के लिए भारी संकट बन सकता है।"

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से लगती जिलों में आए इन टिड्डियों के नियंत्रण के लिए कोशिश की जा रही हैं। जंगली इलाकों में काबू पाने के लिए हवाई छिड़काव भी किया जा सकता है। फिलहाल आसपास के जिलों से अतिरिक्त कर्मचारियों और वाहनों की मदद से टिट्डी और कृषि विभाग निगरानी और छिड़काव कर रहे हैं। केंद्र की एक टीम भी वहां तैनात की गई है।

कृषि मंत्री ने कहा कि जालोर के कुछ क्षेत्रों में कांटे वाली झाड़ियां बहुत अधिक होने के कारण गाडि़यां पंक्चर हो जाती हैं और छिड़काव के लिए आगे नहीं जा पा रही हैं। इस क्षेत्र में हवाई छिड़काव के लिए केन्द्र सरकार से अनुमति ली जा रही है।

टिड्डियों के दल लाखों की संख्या में हमला करते हैं और जितनी टिड्डियों को नष्ट किया जाता है कुछ समय में उससे ज्यादा पैदा हो जाती हैं। जैसलमेर के रामगढ समेत कई इलाकों में ज्यादा नुकसान हुआ है।

जैसलमेर के किसान रंजीत सिंह ने गांव कनेक्शन को फोन पर बताया, "राजस्थान के कई इलाकों में बाजरे की फसल लगी है। टिड्डियां सबसे ज्यादा उसे ही नुकसान पहुंचा रही हैं। हालात बिगड़ रही हैं।"

वहीं जैसलमेर के ही भउवा गांव के मूलसिंह ने बताया, "टिड्डियों का दल पोखरण इलाके में लाठी गांव के आसपास है, अभी हमारे गांवों के तरफ नहीं आया है। पहले के (1993) हमले की तुलना में ये कुछ भी नहीं है, उस बार पूरे के पूरे खेत चौपट हो गए थे। हम लोग टिट्डी विभाग के साथ ही छिड़काव करते थे, जब तो दवा छिड़कने वाली मशीनें भी हाथ से चलानी पड़ती थीं।"

1993 के बाद 2019 में हुआ बड़ा हमला

इससे पहले 1993 में सितंबर-अक्टूबर के महीने में टिड्डियों ने राजस्थान में हमला किया था, जब देखते ही देखते पूरी फसल चौपट हो गई थी। कुछ दी दिनों में ये कीड़े पूरी फसल चौपट कर गए थे। साल 2019 में पहली बार 21 मई को जैसलमेर के फलौदी इलाके में टिड्डियों का हमला देखा गया था, जिसके बाद केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने एक विशेष दल राजस्थान भेजा था। इसके बाद से जहां एक तरफ छिड़काव जारी है वहीं राजस्थान के रास्ते नए टिड्डी दल राजस्थान पहुंच रहे हैं। इससे किसान सहमे हुए हैं। पाकिस्तान से सटी राजास्थान की 1070 किलीमोटर की इंटरनेशनल सीमा के गांवों को अलर्ट पर रखा गया है।

टिड्डियों के बारे में माना जाता है कि इनका एक दल एक दिन में 150 किलोमीटर तक हवा के साथ उड़ सकता है और एक दल एक दिन में 35000 लोगों जितना भोजना खा सकता है।

मानसून की देरी के चलते राजस्थान दलहन की बुवाई पिछ़ड़ी है वर्ना उसे भी नुकसान हो सकता था।

(न्यूज एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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