ओलावृष्टि और बारिश से गेहूं, आलू, सरसों समेत कई फसलों को नुकसान

ओलावृष्टि और बारिश से गेहूं, आलू, सरसों समेत कई फसलों को नुकसान

उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश सहित देश के कई उत्तरी राज्यों में मौसम ने करवट ली है। इन इलाकों में बारिश और ओलावृष्टि होने का दौर जारी है। मौसम विभाग (आईएमडी) ने तूफान की भी चेतावनी जारी की है। फिलहाल उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सहित कई जिलों में भारी बारिश और ओलावृष्टि से किसानों के आलू, गेहूं, सरसों, समेत कई फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।

फरवरी और मार्च में हो रही इस बेमौसम की बारिश ने किसानों की होली फीकी कर दी है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बीकेटी ब्लॉक के ग्राम रामपुर देवरई निवासी नागेंद्र बहादुर सिंह के गेहूं की फसल को काफी नुकसान हुआ है। गांव कनेक्शन को उन्होंने बताया कि गेहूं में बालिया आने लगी थी। लेकिन भारी बारिश और ओलों के गिरने से इन बालियों को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा सरसों, दलहन, तिलहन की फसलों को भी काफी नुकसान हुआ है। नागेंद्र ने बताया कि इस बेमौसम आंधी-पानी ने हम जैसे किसानों का हिसाब-किताब गड़बड़ कर दिया है।

मौसम विभाग के मुताबिक ऐसा ईरान और अफगानिस्तान में पश्चिमी विक्षोभ के बनने के कारण हो रहा है। इसके प्रभाव के कारण दक्षिण पश्चिमी राजस्थान और पड़ोस के राज्यों में कम दबाव के क्षेत्र बन रहे हैं, जिससे बारिश की संभावना बन रही है। वहीं अरब सागर की आर्द्रता के कारण इस संभावना में और वृद्धि हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार इस वजह से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में 7 मार्च तक भारी बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है। यह संभावना पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश राज्यों के लिए जताई गई। हालांकि मौसम विभाग के इस भविष्यवाणी के अनुसार यह बारिश राज्यों के बिखरे-बिखरे हिस्सों में होगी।

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आईएमडी पुणे के मौसम वैज्ञानिक डीएस पई ने 'गांव कनेक्शन' को फोन पर बताया कि ऐसा पश्चिमी विक्षोभ की वजह से हो रहा है, जिसकी भविष्यवाणी आईएमडी ने पहले ही कर दी थी। हालांकि उन्होंने इसे ग्लोबल वार्मिंग या क्लाइमेट चेंज से जोड़ने से इनकार किया। उनका कहना है कि हर 4-5 साल पर ऐसी भौगोलिक स्थिति उत्पन्न होती है, जब फरवरी और मार्च के समय में ओलावृष्टि और बारिश हो। यह बिल्कुल भी असमान्य नहीं है।

पुणे स्थित कृषि मौसम विज्ञान प्रभाग के प्रमुख डॉ. कृपाण घोष ने ओलावृष्टि से बचने के लिए हेल नेट (ओलों से बचने के लिए जाल) का सहारा लेने का सुझाव दिया। वहीं कानपुर में मौसम विभाग से जुड़े नोडल अफसर और सीएसएयू में कृषि विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. संजीव कुमार ने कहा कि इस बारिश से गेहूं और सरसों की फसलों के साथ जायद और दलहन के किसानों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि मौसम विभाग की ओर से ब्लॉक स्तर पर किसानों को एसएमएस के जरिए फसलों के बचाव करने का सुझाव दिया जा रहा है। उन्होंने किसानों को इस समय में बुवाई और सिंचाई न करने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने कीटनाशकों के प्रयोग की सलाह दी ताकि फसलों को बारिश के बाद के कीट-पतंगों से बचाया जा सके।

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