संसद ने दी आतंकवाद रोधी UAPA संशोधन बिल को मंजूरी

संसद ने दी आतंकवाद रोधी UAPA संशोधन बिल को मंजूरीएनआईए बिल पर राज्यसभा को संबोधित करते अमित शाह (फोटो सोर्स- राज्यसभा टीवी)

संसद ने शुक्रवार को आतंकवाद संबंधी UAPA (Unlawful Activities (Prevention) Amendment Bill, 2019) संशोधन बिल को मंजूरी दे दी है। इस बिल में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को विशेषाधिकार दिए गए हैं। इस बिल के पक्ष में 147 और विपक्ष में 42 वोट पड़े।

विपक्ष ने इस बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजने की सिफारिश की थी लेकिन यह प्रस्ताव 85 के मुकाबले 104 मतों से खारिज हो गया। लोकसभा से इसे पिछले सप्ताह ही मंजूरी मिल गई थी। इस बिल में एनआईए को किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करने और आतंकवाद की जांच के मामले में संपत्ति जब्त करने सहित कई अधिकार दिए गए हैं।

आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होताः अमित शाह

गृह मंत्री अमित शाह ने बिल पर पेश करते हुए कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। उन्होंने कहा कि संसद के हर सदस्य को इस बिल का समर्थन करना चाहिए ताकि आतंकवाद के खिलाफ सख्त से सख्त कदम उठाए जा सके।

अमित शाह ने इस बिल के प्रावधानों के दुरुपयोग की आशंकाओं को निराधार करार देते हुए कहा कि इसके प्रावधान जांच एजेंसियों को आतंकवाद से चार कदम आगे रखने के लिए हैं। उन्होंने समझौता एक्सप्रेस विस्फोट मामले का उदाहरण देते हुए कांग्रेस पर आरोप लगाया कि तत्कालीन यूपीए सरकार ने आतंकवाद को एक धर्म विशेष से जोड़ने की कोशिश की थी।

गृह मंत्री ने कहा कि कानून में यदि इस तरह का प्रावधान 2009 में ही रहा होता तो कोलकाता पुलिस की ओर से पकड़ा गया कुख्यात आतंकवाद यासीन भटकल कभी नहीं छूट पाता और आज एनआईए की गिरफ्त में होता।

कांग्रेस ने कहा- बिल के कुछ प्रावधान अस्पष्ट

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा कि इस विधेयक में किसी व्यक्ति को कब और किस स्थिति में आतंकवादी घोषित किया जाएगा, इसे लेकर कोई स्पष्टता नहीं है। इस पर गृह मंत्री ने कहा कि बिल में कुछ अस्पष्टता अवश्य है लेकिन यह स्थिति की जटिलता के कारण है। उन्होंने कहा कि परिस्थितिजन्य आधार पर जांच एजेंसियां तय करेंगी कि कौन आतंकवादी है और कौन नहीं।

चर्चा को आगे बढ़ाते हुए सीपीआई (एम) के ई. करीम ने कहा कि सरकार द्वारा आतंकवाद को थोपा जा रहा है और इस बिल के पास होने के बाद असहमति जताने वालों को आतंकवादी घोषित किया जा सकता है। इससे बड़े पैमाने पर उत्पीड़न और अन्याय होगा। उन्होंने कहा कि इस संशोधन से एनआईए को किसी भी राज्य सरकार की अनुमति लिए बिना या उसे सूचित किए बिना उस राज्य में जाने और किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने का खुला लाइसेंस मिल जाएगा।

बिल पर किसने क्या कहा?

चर्चा में हिस्सा लेते हुए आरजेडी के मनोज झा ने कहा कि किसी को भी आतंकवादी कह देना बहुत आसान होता है लेकिन देखना चाहिए कि इसके बाद उस व्यक्ति की जिंदगी और उसका परिवार किस तरह के हालात का सामना करता है। संशोधन विधेयक के प्रावधानों को कठोर बताते हुए झा ने कहा कि यह विधेयक उस विचारधारा का संकेत करता है कि अगर मैं सरकार की आलोचना करता हूं तो मैं राष्ट्रविरोधी कहलाऊंगा।

अमित शाह ने सभी सवालों के जवाब देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करने के बाद भी कई स्तर पर इसकी समीक्षा होगी। यह समीक्षा चार स्तरों पर होगी इसलिए इसे लेकर शंका नहीं की जानी चाहिए। शाह ने कहा कि संशोधन के बाद इस कानून के तहत एनआईए के साथ केन्द्र और राज्य की एजेंसियां भी आतंकवादी गतिविधियों की जांच कर सकेंगी।

गृह मंत्री ने कहा कि आतंकवाद के मामले में प्राय: यह देखने में आता है कि एक संगठन पर प्रतिबंध लगाने पर व्यक्ति दूसरा संगठन खोल लेते हैं। लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आतंकवाद संगठन नहीं, व्यक्ति करता है।


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