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क्या है पत्रकार कल्याण योजना, जिसमें नामांकन होने पर पत्रकारों को मिलेगा जीवन व दुर्घटना बीमा का लाभ

क्या है पत्रकार कल्याण योजना, जिसमें नामांकन होने पर पत्रकारों को मिलेगा जीवन व दुर्घटना बीमा का लाभ

प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और वेब मीडिया के पत्रकारों के लिए केंद्र सरकार 'पत्रकार कल्याण योजना' नाम से एक स्कीम लाई है, जिसमें मान्यता प्राप्त और कम से कम पांच साल के अनुभव वाले पत्रकारों को दुर्घटना और बीमा योजना का लाभ मिलता है।

इस योजना के तहत आने वाले पत्रकारों को कैंसर, बाई पास, ओपेन हार्ट सर्जरी, एंजियोप्लास्टी, ब्रेन हैमरेज और लकवाग्रस्त होने जैसी गम्भीर बीमारी की दशा में तीन लाख रुपये और किसी गम्भीर दुर्घटना के कारण उपचार हेतु अस्पताल में भर्ती होने पर दो लाख रुपये देने का प्रावधान है। इसके अलावा है। स्थाई दिव्यांगता के मामले में पत्रकार को 05 लाख रुपये और पत्रकार की मृत्यु होने की दशा में उनके आश्रितों को 05 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दिए जाने का प्रावधान भी किया गया है।

पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार द्वारा उपलब्ध करायी गयी जानकारी के अनुसार, योजना की पात्रता के लिए पत्रकार का भारत का नागरिक होना आवश्यक है। इसके साथ ही उन्हें भारत सरकार अथवा किसी राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश की सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त होना चाहिए। हालांकि जिनको यह मान्यता प्राप्त नहीं है लेकिन वे प्रिन्ट/इलेक्ट्रॉनिक या वेब मीडिया से कम से कम पांच वर्षों से जुड़े हैं तो भी वे इस योजना के दायरे में आएंगे।

गैर-मान्यता प्राप्त पत्रकारों को पांच वर्ष का अनुभव होने पर एक लाख रुपये और उसके बाद अगले प्रत्येक अतिरिक्त पांच वर्षों के लिए एक-एक लाख रुपये की मदद प्रदान किए जाने की व्यवस्था भी इस योजना में है। गम्भीर बीमारियों के इलाज के मामले में गैर-मान्यता प्राप्त पत्रकार को यह सुविधा 65 वर्ष की आयु तक ही मान्य होगी।

फ्रीलांस पत्रकार भी इस योजना के दायरे में आएंगे, लेकिन जो प्रबंधक की हैसियत से कार्य कर रहे हैं, वह इसके दायरे में नहीं आएंगे। पत्रकारों के परिजन भी इस योजना के दायरे में आएंगे। परिजन का अर्थ पति अथवा पत्नी, आश्रित माता-पिता अथवा आश्रित संतानों से होगा।

इस योजना का लाभ लेने के लिए पत्रकारों को पीआईबी की आधिकारिक वेबसाइट अथवा पीआईबी के किसी भी कार्यालय से आवेदन पत्र प्राप्त कर उसे संबंधित पीआईबी कार्यालय में जमा कराना होगा, जहां पीआईबी अधिकारी द्वारा मामले की जांच पड़ताल के बाद इसे पीआईबी के केंद्रीय मुख्यालय नई दिल्ली रिपोर्ट के साथ भेजा जाएगा।

पत्रकारों के लिए यह अति आवश्यक है कि इलाज के मामले में वे सभी रसीदों को मूल रूप में संबंधित अस्पतालों के प्रबंधन, मुख्य चिकित्सा अधिकारी से प्रमाणित कराकर ही प्रस्तुत करें। उत्तर प्रदेश में इस योजना के क्रियान्वयन हेतु आवश्यक समन्वय के लिए उपनिदेशक प्रेस, सूचना निदेशालय श्री त्रिलोकी राम को नोडल अधिकारी बनाया गया है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए उनके मोबाइल नंबर 9453005348 पर भी संपर्क किया जा सकता है। इसी तरह अन्य राज्यों के भी पत्रकार अपने राज्य के पीआईबी कार्यालय में संपर्क कर जानकारी ले सकते हैं।

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