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मास्क बनाकर कोरोना से लड़ाई में मदद कर रहीं बुंदेलखंड की महिलाएं

मास्क बनाकर कोरोना से लड़ाई में मदद कर रहीं बुंदेलखंड की महिलाएं

ललितपुर (उत्तर प्रदेश)। जब पूरी दुनिया कोरोना से लड़ रही है, हर कोई किसी न किसी तरह इस लड़ाई को जीतने में सहयोग कर रहा है। बुंदेलखंड की ये महिलाएं मास्क बनाकर कोरोना को हराने में मदद कर रही हैं।

स्वयं सहायता समूह चलाने वाली रसीका के समूह में दस महिलाएं हैं, जो सिलाई का काम करके अपने - अपने परिवार का भरण पोषण करती हैं। कोरोना के चलते देश लाॅकडाउन होने की घोषणा के बाद रसीका के समूह की तरह सिलाई का काम करने वाले जिले के सभी समूहों के सिलाई करने का काम ठप हो गया।

ऐसे में ललितपुर जनपद से 7 किलोमीटर दूर उत्तर पश्चिम दिशा सिलगन गाँव की भारत माता स्वयं सहायता समूह की सचिव रसीका (42 वर्ष) ने कुछ अलग करने को सोचा।


समूह के खाते में 15 हज़ार रुपए थे, रसीका को लगा कि कोरोना की लड़ाई में मास्क बनाकर हम देश का साथ दे सकते हैं! फिर क्या रसीका ने समूह के पैसे निकाल कर समूह की महिलाओं के सहयोग से मास्क बनाने की बात करते हुए रसीका कहती हैं, "करीब 270 मास्क गाँव के गरीब लोगों में फ्री में बांट दिये, जिनको बांटे हैं वो सहरिया जाति के थे ज्यादा गरीब होने की बजह से वो मास्क खरीद नहीं सकते। करीब 200 से ज्यादा मास्क विकास विभाग के अधिकारियों को दे दिए।"

अधिकारियों ने समूह द्वारा निर्मित मास्क को देखकर सिलाई करने वाले 6 ब्लॉक के 60 स्वयं सहायता समूहों को मास्क बनाने का काम आजीविका मिशन के अंतर्गत जिला प्रशासन ने दे दिया। समूह की सिलाई करने वाली कईयों सैकड़ा महिलाओं को घर पर मास्क बनाने का काम मिला, जिसके लिए एक कमेटी भी बनायी गई है।


रसीका के पास प्रशासन द्वारा मास्क बनाने का कच्चा माल पहुँचने पर खुशी का इजहार करते हुए कहती हैं, "हम तो निठल्ले बैठे थे, अब तो मास्क बनाने का काम मिल गया है। अधिकारी कह रहे थे मास्क तैयार करो हम ही खरीद करेगें, तुमें कहीं जाने की जरूरत नहीं है। चार रूपया मास्क के हिसाब से वो हमें खाते में पैसा भेजेंगे।"

समाज को कोरोना से बचने के लिए मास्क पहनना बहुत जरूरी है। जिससे सांस लेते समय या छीकते समय अपने आपको और दूसरों को कोरोना से बचा सकें, जिसमें ग्रामीण परिवेश में सिलाई करने वाले महिला समूह अहम भूमिका निभा रहे हैं। घर में बैठकर उन्हे रोजगार मिलने से महिलाएं खुश हैं। कि इस विपत्ति के समय घर पर ही काम मिल गया।


स्वयं सहायता समूह से मास्क बनाने के लिए कपड़ा और इलास्टिक जिला प्रशासन के द्वारा जिला मिशन प्रबंधन इकाई को उपलब्ध कराये जाने की बात करते हुए ललितपुर उपायुक्त स्वरोजगार इंद्रमणि त्रिपाठी कहते हैं, "कोरोना के संकट से समूहों की महिलाओं पर आर्थिक संकट आया हैं ऐसे में वो घर पर मास्क बनाकर कुछ आर्थिक मदद ले पायेगी, जिसके लिए समूहों को 38 सौ मीटर कपड़ा उपलब्ध करा दिया है। अभी दो लाख मास्क बनाने का काम समूह कर रहे हैं। प्रति मास्क 4 रूपया की दर से उनके खाते में पैसा दिया जायेगा।"

समूह की महिलाएं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रही हैं। अपने अपने घर पर मास्क बनाने में जुट गई हैं उन्हे पहली बार खुशी हो रही कि वो सिलाई देश हित में कर रही हैं। ललितपुर से पश्चिम दिशा 20 किमी दूर बाँसी गाँव में आजीविका मिशन से संचालित शंकरा माता स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष रानी पुलईया (36 वर्ष) कहती हैं, "पहले हम खाली बैठे थे कि घर कैसे चलेगा कोई साधन नही हैं। हम गरीब लोग हैं, महनत मजदूरी से ही घर का चूल्हा जलता हैं! प्रशासन से समूह को मास्क सिलने का काम दिया हैं, सभी सदस्य अपने - अपने घर मास्क बना रहे हैं! एक मास्क बनाने में पाँच से छै मिनट लगते हैं।"


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