नर्मदा में 11 हजार लीटर दूध बहाए जाने पर उठे पर्यावरणीय सवाल, विशेषज्ञों ने जताए ये खतरे
Gaon Connection | Apr 10, 2026, 12:54 IST
सीहोर जिले में एक धार्मिक कार्यक्रम में नर्मदा नदी में 11,000 लीटर दूध बहाया गया। इस पर पर्यावरणविदों ने चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि इससे नदी की पारिस्थितिकी पर बुरा असर पड़ेगा। जलीय जीवों को खतरा हो सकता है और पानी की गुणवत्ता भी गिरेगी।
नर्मदा में 11 हजार लीटर दूध बहाया गया
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में एक धार्मिक अनुष्ठान के तहत करीब 11,000 लीटर दूध नर्मदा नदी में प्रवाहित किया गया, जिसके बाद पर्यावरणविदों ने इस पर चिंता जताई है। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। यह आयोजन भैरुंदा क्षेत्र के सतदेव गांव में 21 दिन तक चले धार्मिक कार्यक्रम के समापन पर महायज्ञ के साथ किया गया।
आयोजकों के अनुसार, यह दूध नर्मदा नदी की पवित्रता, श्रद्धालुओं के कल्याण और समृद्धि की कामना के लिए अर्पित किया गया। दूध को टैंकरों के जरिए नदी किनारे लाया गया और मंत्रोच्चार के बीच बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं की उपस्थिति में बहते पानी में प्रवाहित किया गया।
हालांकि, पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस पर गंभीर चिंता जताई है। पर्यावरणविद और वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में जैविक पदार्थ पानी में मिलने से घुलित ऑक्सीजन का स्तर कम हो सकता है, जिससे नदी की पारिस्थितिकी पर नकारात्मक असर पड़ता है। इससे पीने के पानी पर निर्भर स्थानीय समुदायों, जलीय जीवों और पालतू पशुओं को भी खतरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था के तहत चढ़ावे प्रतीकात्मक और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील होने चाहिए।
एक अन्य पर्यावरणविद सुभाष पांडेय ने बताया कि 11,000 लीटर दूध एक बड़ा जैविक प्रदूषक बन सकता है। इससे पानी में ऑक्सीजन की मांग बढ़ जाती है, जिससे ऑक्सीजन की कमी, जलीय जीवों की मृत्यु, यूट्रोफिकेशन (पानी की सतह पर पौधों की अत्यधिक वृद्धि) और पानी की गुणवत्ता में गिरावट जैसे प्रभाव हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रभाव डेयरी अपशिष्ट के रसायन विज्ञान के आधार पर पहले भी कई जगह देखे जा चुके हैं।
तरूण नामक X यूजर ने कहा, "इंसान पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इतना ज्यादा दूध पानी में बहाने से जल में रहने वाले जीवों को नुकसान होगा। अगर यही दूध गरीब बच्चों में बांट दिया जाता, तो मां नर्मदा ज्यादा प्रसन्न होतीं।"
वहीं, एक अन्य ने लिखा, "यह पाखंड है—इससे जलीय जीवों पर असर पड़ेगा। अगर किसी जीव को कष्ट हो रहा है, तो यह किस तरह की पूजा या किसी देवता को प्रसन्न करने का तरीका है?"
गौरतलब है कि नर्मदा नदी का उद्गम मध्य प्रदेश के अमरकंटक से होता है और यह करीब 1,312 किलोमीटर पश्चिम की ओर बहते हुए महाराष्ट्र और गुजरात से होकर खंभात की खाड़ी के रास्ते अरब सागर में मिलती है। यह प्रायद्वीपीय भारत की सबसे बड़ी पश्चिम की ओर बहने वाली नदी है और मध्य प्रदेश, गुजरात तथा महाराष्ट्र में सिंचाई के लिए एक महत्वपूर्ण जल स्रोत मानी जाती है।
आयोजकों ने क्या कहा
नदी की पारिस्थितिकी पर नकारात्मक असर
पानी में ऑक्सीजन की कमी
क्या बोले लोग
वहीं, एक अन्य ने लिखा, "यह पाखंड है—इससे जलीय जीवों पर असर पड़ेगा। अगर किसी जीव को कष्ट हो रहा है, तो यह किस तरह की पूजा या किसी देवता को प्रसन्न करने का तरीका है?"
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