Cotton Season: कपास की MSP फंडिंग पर ₹1,718 करोड़ की मंजूरी, जानिए किसानों के लिए क्यों है अहम ये फैसला?
Gaon Connection | Mar 19, 2026, 11:45 IST
Cotton MSP: किसानों के लिए सरकार ने एक शानदार पहल की है। कैबिनेट कमेटी ने 2023-24 कपास सीजन के लिए कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया को 1718.56 करोड़ रुपये की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) फंडिंग देने का निर्णय लिया है। यह राशि सीधा किसानों के खातों में जमा होगी, जिससे उन्हें कपास की खेती के लिए प्रेरणा मिलेगी।
CCEA approves ₹1,718.56 cr funding to CCI for cotton procurement operations
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में सरकार ने कपास किसानों के हित में बड़ा फैसला लिया है। आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने 2023-24 के कपास सीजन के लिए कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) को ₹1,718.56 करोड़ की MSP फंडिंग को मंजूरी दी है। यह राशि सीधे तौर पर किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए है, ताकि उन्हें अपनी उपज का सही दाम मिल सके और वे कपास की खेती जारी रखने के लिए प्रोत्साहित हों।
दरअसल, जब बाजार में कपास की कीमतें गिरकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे चली जाती हैं, तो सरकार की एजेंसी CCI किसानों से उनकी फसल सीधे MSP पर खरीद लेती है। इससे किसानों को मजबूरी में अपनी फसल सस्ते दाम पर बेचने की जरूरत नहीं पड़ती और उन्हें एक तय न्यूनतम आय की गारंटी मिलती है। यही वजह है कि MSP को किसानों के लिए एक तरह का “सुरक्षा कवच” माना जाता है।
कपास भारत की एक प्रमुख नकदी फसल है, जिससे करीब 60 लाख किसानों की आजीविका जुड़ी हुई है। इतना ही नहीं, कपास से जुड़े व्यापार, प्रोसेसिंग और टेक्सटाइल इंडस्ट्री में लगभग 4 से 5 करोड़ लोग रोजगार पाते हैं। ऐसे में कपास की कीमतों में स्थिरता बनाए रखना सिर्फ किसानों ही नहीं, बल्कि पूरे ग्रामीण और औद्योगिक ढांचे के लिए बेहद जरूरी हो जाता है।
अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो 2023-24 सीजन में देश में लगभग 114.47 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती की गई और उत्पादन 325.22 लाख गांठ रहने का अनुमान है। यह वैश्विक उत्पादन का करीब 25 प्रतिशत है, जिससे साफ है कि भारत कपास उत्पादन में दुनिया के बड़े खिलाड़ियों में शामिल है। ऐसे में अच्छी गुणवत्ता के कपास में आत्मनिर्भर बनना भी सरकार की प्राथमिकता है।
सरकार द्वारा तय MSP दरें कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर तय की जाती हैं, ताकि किसानों को उनकी लागत के अनुसार उचित लाभ मिल सके। इसके बाद कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया को जिम्मेदारी दी जाती है कि वह जरूरत पड़ने पर किसानों से पूरी मात्रा में “फेयर एवरेज क्वालिटी” (FAQ) का कपास खरीद सके।
इस बार CCI ने अपनी तैयारी को और मजबूत किया है। देश के 11 प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में 152 जिलों के भीतर 508 से ज्यादा खरीद केंद्र बनाए गए हैं, ताकि किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए दूर न जाना पड़े। इसके साथ ही पारदर्शिता और सुविधा बढ़ाने के लिए टेक्नोलॉजी का भी सहारा लिया जा रहा है। “Cott-Ally” मोबाइल ऐप और Bale Identification and Traceability System (BITS) जैसे कदम किसानों को बेहतर जानकारी और सेवाएं देने में मदद कर रहे हैं।
कुल मिलाकर यह फैसला सिर्फ एक फंडिंग मंजूरी नहीं, बल्कि कपास किसानों के लिए एक भरोसा है—कि अगर बाजार साथ न दे, तब भी सरकार उनके साथ खड़ी है। इससे न सिर्फ किसानों की आय सुरक्षित होगी, बल्कि देश में कपास उत्पादन को भी नई मजबूती मिलेगी।
MSP ऑपरेशन होता क्या है और किसानों के लिए इतना जरूरी क्यों है?
4 से 5 करोड़ लोग कपास के रोजगार से जुड़े
वैश्विक उत्पादन का करीब 25 प्रतिशत कपास भारत में
सरकार द्वारा तय MSP दरें कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर तय की जाती हैं, ताकि किसानों को उनकी लागत के अनुसार उचित लाभ मिल सके। इसके बाद कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया को जिम्मेदारी दी जाती है कि वह जरूरत पड़ने पर किसानों से पूरी मात्रा में “फेयर एवरेज क्वालिटी” (FAQ) का कपास खरीद सके।
52 जिलों के भीतर 508 से ज्यादा खरीद केंद्र
कुल मिलाकर यह फैसला सिर्फ एक फंडिंग मंजूरी नहीं, बल्कि कपास किसानों के लिए एक भरोसा है—कि अगर बाजार साथ न दे, तब भी सरकार उनके साथ खड़ी है। इससे न सिर्फ किसानों की आय सुरक्षित होगी, बल्कि देश में कपास उत्पादन को भी नई मजबूती मिलेगी।