अध्यापक नहीं खोलते समय से ताला
गाँव कनेक्शन | Sep 16, 2016, 16:26 IST
अध्यापक नहीं खोलते समय से ताला
पीलीभीत। प्रदेश में दो जुलाई से प्राथमिक विद्यालयों में 2016-17 का शिक्षा सत्र शुरू हो चुका है, जनपद में अधिकतर विद्यालयों में 72 हज़ार टीचरों की भर्ती में अधिकतर टीचर गैर जनपदों से यहां के विद्यालयों में नियुक्त हुए हैं जो अपने ग्रह जनपद में ही रहते हैं।
पिछले वर्ष यह अध्यापक विभाग से साठ-गांठ करके विद्यालय जाते ही नहीं थे। इसी को देखते हुए इस वर्ष प्रदेश सरकार ने अधिकतर जनपदों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों का स्थानान्तरण कर दिया है, इसी कड़ी में जनपद में बीएसए जेपी सिंह जो इससे पहले बाराबंकी डायट पर प्रधानाचार्य के रूप में नियुक्त थे पीलीभीत जिले में बीएसए के रूप में नियुक्त किए गए हैं।
नवनियुक्त बीएसए ने जनपद में अपनी आमद दर्ज कराते हुए विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी कार्यप्रणाली से अवगत करा दिया था, लेकिन जनपद के प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्त अध्यापक अपनी कार्य प्रणाली बदलते नजर नहीं आ रहे हैं। ज़िला मुख्यालय से 40 किमी दूर पूरनपुर ब्लाॅक के ग्राम सिसैइया प्राथमिक विद्यालय का दौरा किया गया तो विद्यालय के 8:30 बजे तक ताले नहीं खुले थे, जबकि बच्चे विद्यालय में अपने अध्यापकों का इंतजार कर रहे थे।
गाँव के नवनिर्वाचित प्रधान रामऔतार दिवाकर ने बताया, “अध्यापक अक्सर विद्यालय में देर से आते हैं, कई बार इस बारे में अध्यापकों से बात भी की, लेकिन अध्यापक अपनी पुरानी कार्यप्रणाली पर ही चल रहे हैं।”
रिपोर्टर - अनिल चौधरी
पिछले वर्ष यह अध्यापक विभाग से साठ-गांठ करके विद्यालय जाते ही नहीं थे। इसी को देखते हुए इस वर्ष प्रदेश सरकार ने अधिकतर जनपदों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों का स्थानान्तरण कर दिया है, इसी कड़ी में जनपद में बीएसए जेपी सिंह जो इससे पहले बाराबंकी डायट पर प्रधानाचार्य के रूप में नियुक्त थे पीलीभीत जिले में बीएसए के रूप में नियुक्त किए गए हैं।
नवनियुक्त बीएसए ने जनपद में अपनी आमद दर्ज कराते हुए विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी कार्यप्रणाली से अवगत करा दिया था, लेकिन जनपद के प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्त अध्यापक अपनी कार्य प्रणाली बदलते नजर नहीं आ रहे हैं। ज़िला मुख्यालय से 40 किमी दूर पूरनपुर ब्लाॅक के ग्राम सिसैइया प्राथमिक विद्यालय का दौरा किया गया तो विद्यालय के 8:30 बजे तक ताले नहीं खुले थे, जबकि बच्चे विद्यालय में अपने अध्यापकों का इंतजार कर रहे थे।
गाँव के नवनिर्वाचित प्रधान रामऔतार दिवाकर ने बताया, “अध्यापक अक्सर विद्यालय में देर से आते हैं, कई बार इस बारे में अध्यापकों से बात भी की, लेकिन अध्यापक अपनी पुरानी कार्यप्रणाली पर ही चल रहे हैं।”
रिपोर्टर - अनिल चौधरी