AI Impact Summit 2026: महानगरों से गाँव तक, AI कैसे बदल रही है खेती और रोजगार की तस्वीर?

Preeti Nahar | Feb 17, 2026, 10:31 IST
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नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI Impact Summit 2026 ने यह साफ कर दिया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ बड़े शहरों और लैब तक सीमित नहीं रहा। इस पांच दिवसीय समिट में खेती, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे क्षेत्रों में AI के जमीनी इस्तेमाल पर फोकस किया गया। इंडियाAI मिशन, ‘Create in India’ पहल और कृषि क्षेत्र के लिए तैयार की गई AI केसबुक के जरिए यह समिट दिखाता है कि तकनीक कैसे किसानों की आमदनी बढ़ाने, खेती को टिकाऊ बनाने और भारत को वैश्विक AI नेतृत्व की दिशा में आगे ले जा रही है।
AI इम्पैक्ट समिट 2026
AI Impact Summit 2026: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ लैब या बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि खेती, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोज़गार जैसे आम लोगों से जुड़े क्षेत्रों में भी अपनी जगह बना रहा है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में सोमवार से AI इम्पैक्ट समिट 2026 की शुरुआत हुई। पाँच दिन तक चलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। समिट परिसर में एआई से जुड़े स्टार्टअप्स, तकनीकी कंपनियों और सरकारी संस्थानों के पेश किए गए कई सारे इनोवेशन देखे गए।

“भारत के युवाओं की ताकत दिखाता है यह समिट”

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने AI इम्पैक्ट समिट को भारत के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन देश के युवाओं की प्रतिभा, नवाचार की क्षमता और वैश्विक तकनीकी मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। प्रधानमंत्री ने संस्कृत के एक श्लोक का उल्लेख करते हुए कहा कि विज्ञान, ज्ञान और विनय, तीनों का संतुलन जरूरी है। उनका कहना था कि तकनीक तभी सार्थक है, जब उसका सीधा फायदा समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचे, चाहे वह किसान हो, मजदूर हो या ग्रामीण युवा।

‘क्रिएट इन इंडिया’ मिशन: रोजगार और हुनर पर फोकस

AI इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ‘क्रिएट इन इंडिया’ मिशन की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ही इस मिशन को लॉन्च करेगी, जिसका मकसद देश में एआई आधारित उद्योगों को मजबूत करना और युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर तैयार करना है। मंत्री के मुताबिक, आने वाले समय में सिर्फ टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करने वाले नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी बनाने वाले प्रोफेशनल्स की जरूरत होगी। ‘क्रिएट इन इंडिया’ मिशन इसी दिशा में देश की प्रतिभा को तैयार करने की कोशिश है, ताकि भारत वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद टेक्नोलॉजी और इनोवेशन प्लेटफॉर्म बन सके।

खेती, स्वास्थ्य और शिक्षा में AI की नई तस्वीर

समिट के दूसरे दिन एप्लाइड AI पर केंद्रित सेमिनार आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें स्वास्थ्य, ऊर्जा, शिक्षा, कृषि, जेंडर सशक्तिकरण और दिव्यांगजनों से जुड़े मुद्दों पर खास चर्चा होगी। इन विषयों पर आधारित ज्ञान सार-संग्रह यानी केसबुक्स भी जारी की जाएंगी। खास बात यह है कि इनमें कृषि क्षेत्र के लिए तैयार की गई एक विशेष एआई केसबुक भी शामिल है, जिसे इंडिया AI मिशन, महाराष्ट्र सरकार और विश्व बैंक के सहयोग से तैयार किया गया है।

खेतों तक पहुंचती AI तकनीक

अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिर्फ कंप्यूटर स्क्रीन या बड़े दफ्तरों तक सीमित नहीं रह गई है। इसका सीधा असर खेतों की मिट्टी, फसलों की सेहत और किसानों की आमदनी पर दिखने लगा है। इसी सोच के साथ इंडियाAI मिशन, महाराष्ट्र सरकार के एआई और एग्रीटेक इनोवेशन सेंटर और विश्व बैंक के सहयोग से कृषि में एआई के वास्तविक असर को दिखाने वाली एक खास केसबुक तैयार की गई है। इस केसबुक में उन उपयोग मामलों को शामिल किया गया है, जहाँ एआई तकनीक जमीन पर लागू हो चुकी है और किसानों को मापने योग्य फायदा मिल रहा है।

किसानों के काम की AI केसबुक

इंडियाAI मिशन द्वारा तैयार की गई यह केसबुक सिर्फ तकनीकी प्रयोगों का दस्तावेज नहीं है। इसमें ऐसे एआई समाधान शामिल हैं, जो बड़े और छोटे दोनों स्तर के किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं। इसका मकसद यह दिखाना है कि एआई किस तरह खेती को ज्यादा उत्पादक, टिकाऊ और लाभकारी बना सकता है, चाहे वह फसल की सही योजना हो, पानी की बचत हो या कीट-रोगों से समय रहते बचाव। इस केसबुक का औपचारिक विमोचन 17 फरवरी को इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में किया जाएगा। इस मंच पर दुनिया भर के नीति निर्माता, एग्रीटेक विशेषज्ञ और विकास साझेदार इन अनुभवों को साझा करेंगे।

केसबुक में क्या-क्या होगा खास ?

इस कृषि एआई केसबुक में कई अहम उप-विषयों को शामिल किया गया है।

  1. बुद्धिमान फसल नियोजन के तहत जलवायु और बाजार के हिसाब से खेती की योजना पर फोकस किया गया है।
  2. स्मार्ट फार्मिंग और एग्रीकल्चर में मिट्टी की जांच, कीट-रोगों की भविष्यवाणी और सिंचाई के बेहतर प्रबंधन को शामिल किया गया है।
  3. इसके अलावा खेत से बाजार तक कनेक्टिविटी, फसल के दामों का पूर्वानुमान, गुणवत्ता वर्गीकरण, डिजिटल बाजार और ट्रेसबिलिटी जैसे विषय भी केसबुक का हिस्सा हैं।
  4. किसानों के लिए एआई आधारित क्रेडिट आकलन, फसल बीमा और आजीविका सुरक्षा समाधान भी इसमें शामिल किए गए हैं।

सुरक्षा, गवर्नेंस और सॉवेरन AI पर चर्चा

समिट में एआई की सुरक्षा, गवर्नेंस, नैतिक उपयोग, डेटा सुरक्षा और सॉवेरन AI जैसे अहम मुद्दों पर भी गहन मंथन हो रहा है। खास बात यह है कि इसमें ‘युवा AI’ ग्लोबल यूथ चैलेंज को भी शामिल किया गया है। इस चैलेंज में 38 से अधिक देशों से 2,500 से ज्यादा आवेदन आए, जिनमें से 20 टीमों को फाइनलिस्ट के रूप में चुना गया है। इनमें 15 टीमें भारत की हैं, जो देश के युवाओं की तकनीकी क्षमता को दिखाता है।

दुनिया भर की नजर भारत पर

इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो 2026 में ऑस्ट्रेलिया, जापान, फ्रांस, जर्मनी, यूके और रूस सहित 13 देशों के पवेलियन लगाए गए हैं। यहां 600 से ज्यादा स्टार्टअप्स स्वास्थ्य, एग्रीटेक, शिक्षा, ऊर्जा, साइबर सुरक्षा और शहरी विकास से जुड़े अपने समाधान पेश कर रहे हैं। इस समिट को कवर करने के लिए 300 से अधिक विदेशी पत्रकार भारत पहुंचे हैं। भारत मंडपम में मीडिया के लिए खास हॉल, स्टूडियो, वर्चुअल पॉडकास्ट ज़ोन और सैकड़ों कंप्यूटर लगाए गए हैं। AI इम्पैक्ट समिट 2026 इस बात का संकेत है कि भारत अब सिर्फ तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि समाधान देने वाला देश बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है और इस बदलाव में किसान और ग्रामीण भारत भी पीछे नहीं है।
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