क्या AI भारत में स्वास्थ्य सेवाओं का भविष्य है? जानिए कैसे बदल रही है इलाज की तस्वीर

Gaon Connection | Feb 13, 2026, 18:52 IST
Share
भारत सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में बड़ी सफलता हासिल की है। इंडियाएआई मिशन के तहत टीबी, डायबिटीज और अन्य बीमारियों की पहचान में AI का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे लाखों लोगों को फायदा मिल रहा है।
Image Feb 13, 2026, 06_34_58 PM
भारत में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने एक नया अध्याय शुरू किया है। सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं में AI का इस्तेमाल करने से टीबी के गंभीर मामलों में 27% की कमी आई है और बीमारियों की पहचान में 12-16% का इजाफा हुआ है। मार्च 2024 में शुरू किए गए इंडियाएआई मिशन का मकसद देश के हर कोने में, खासकर गांवों और कम सुविधा वाले इलाकों में, आधुनिक तकनीक से इलाज की सुविधा पहुंचाना है। इस मिशन के लिए सरकार ने 10,371 करोड़ रुपये का बजट रखा है।

टेलीमेडिसिन में बड़ी छलांग

ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा के जरिए अब तक 28.2 करोड़ से ज्यादा लोगों को घर बैठे डॉक्टर की सलाह मिल चुकी है। इसमें AI की मदद से मरीज की समस्या को समझकर संभावित बीमारियों का पता लगाया जाता है, जिससे डॉक्टरों को सही इलाज देने में आसानी होती है। मधुनेत्रएआई नाम की तकनीक से डायबिटीज के मरीजों की आंखों की जांच की जा रही है।

इसमें साधारण स्वास्थ्य कर्मचारी भी आंख की तस्वीर लेकर AI की मदद से यह पता लगा सकते हैं कि मरीज को विशेषज्ञ डॉक्टर के पास भेजने की जरूरत है या नहीं। अब तक 38 केंद्रों में 7,100 से ज्यादा मरीजों को इसका फायदा मिल चुका है। डीप सीएक्सआर नाम की AI तकनीक से छाती के एक्स-रे को पढ़कर टीबी की पहचान की जाती है। यह तकनीक 8 राज्यों में लागू है और सरकारी अस्पतालों में मुफ्त में उपलब्ध है। इससे उन जगहों पर भी टीबी की जांच हो पा रही है जहां रेडियोलॉजी के विशेषज्ञ नहीं हैं। मीडिया डिजीज सर्विलांस सिस्टम AI की मदद से समाचारों में बीमारियों के फैलने की खबरों पर नजर रखता है। अप्रैल 2022 से अब तक इस सिस्टम ने 4,500 से ज्यादा चेतावनियां जारी की हैं, जिससे बीमारियों को फैलने से रोका जा सका।

स्कूलों में कुपोषण रोकने में AI की भूमिका

महाराष्ट्र के एटापल्ली जिले में एक अनोखा प्रयोग किया गया। यहां आश्रम स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले भोजन की जांच के लिए AI युक्त मशीन लगाई गई। यह मशीन खाने की तस्वीर लेकर 2,100 से ज्यादा बातों को जांचती है - जैसे खाना सही तापमान पर है या नहीं, सभी चीजें हैं या नहीं। इस मशीन से पता चला कि कई बार बच्चों को फल या प्रोटीन वाली चीजें नहीं मिल रही थीं। इसके बाद सख्त कार्रवाई की गई और बच्चों के पोषण में सुधार आया। अब इस मॉडल को जिले के कई स्कूलों में लागू किया जा रहा है।

निजी कंपनियों का योगदान

सरकारी प्रयासों के साथ-साथ निजी कंपनियां भी AI से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बना रही हैं। Qure.ai कंपनी की तकनीक से एक्स-रे और सीटी स्कैन में 35 से ज्यादा बीमारियों का पता सेकंडों में लगाया जा सकता है। यह तकनीक 1,000 से ज्यादा जगहों पर इस्तेमाल हो रही है और हर साल 1.5 करोड़ मरीजों की मदद कर रही है। केयरएनएक्स नाम की कंपनी ने गर्भवती महिलाओं के लिए पोर्टेबल जांच किट बनाई है। इससे स्वास्थ्य कर्मचारी घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं की जांच कर सकते हैं। अब तक 20 से ज्यादा राज्यों में 5 लाख से ज्यादा माताओं को इसका लाभ मिला है।

यह भी पढ़ें:पहाड़ों में गूंज रही 'मंदाकिनी की आवाज़', ग्रामीण बने रेडियो जॉकी

नवजात शिशुओं की देखभाल

निमोकेयर रक्षा नाम का AI युक्त जुराब जैसा उपकरण नवजात शिशुओं के पैर में पहनाया जाता है। यह दिल की धड़कन, सांस लेने की गति, खून में ऑक्सीजन और शरीर के तापमान पर लगातार नजर रखता है। इसकी मदद से एक नर्स 40-50 बच्चों पर एक साथ निगरानी रख सकती है। 2022 से अब तक 20,000 से ज्यादा नवजात शिशुओं को इससे फायदा मिला है। पारंपरिक आयुर्वेद चिकित्सा को भी आधुनिक बनाने के लिए AI का इस्तेमाल किया जा रहा है। आयुर्जेनोमिक्स योजना में शरीर की बनावट और जीन की जानकारी के आधार पर बीमारियों की पहचान की जाती है। जुलाई 2025 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे दुनिया भर के लिए एक मॉडल के रूप में मान्यता दी।

डिजिटल हेल्थ आईडी

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत अब तक 79.9 करोड़ डिजिटल हेल्थ आईडी जारी की जा चुकी हैं। 4.1 लाख से ज्यादा स्वास्थ्य केंद्र और 6.7 लाख से ज्यादा स्वास्थ्य कर्मचारी इस सिस्टम से जुड़े हैं। अब तक 67.1 करोड़ से ज्यादा स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित किए जा चुके हैं।16 से 20 फरवरी तक नई दिल्ली में ग्लोबल साउथ का पहला अंतरराष्ट्रीय AI शिखर सम्मेलन हो रहा है। इसमें दुनिया भर के नेता, वैज्ञानिक और तकनीक कंपनियों के प्रतिनिधि AI के इस्तेमाल पर चर्चा करेंगे।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि 2047 तक विकसित भारत बनने के लक्ष्य में स्वास्थ्य सेवाओं में AI की भूमिका बहुत अहम है। इससे गांवों में भी शहरों जैसी इलाज की सुविधा मिल रही है और आम लोगों को कम खर्च में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल पा रही हैं।
Tags:
  • AI in Indian Healthcare
  • Artificial Intelligence in Medicine
  • Digital Health India
  • AI Doctors Future
  • Smart Hospitals India
  • Medical Technology Innovation
  • AI Diagnosis System
  • HealthTech India 2026
  • Robotic Surgery India
  • Future of Healthcare India