खेती में AI क्रांति: भारत बन रहा दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा AI देश
Gaon Connection | Feb 14, 2026, 15:20 IST
भारत AI के क्षेत्र में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। खेती में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। सरकार ने बजट 2026-27 में भारत-विस्तार नाम का नया AI टूल लॉन्च करने का ऐलान किया है। यह टूल किसानों को उनकी भाषा में सलाह देगा। 7.63 करोड़ किसानों का डिजिटल आईडी बन चुका है। किसान ई-मित्र चैटबॉट रोज 8,000 से ज्यादा सवालों के जवाब दे रहा है। AI की मदद से फसल बीमा, कीट नियंत्रण और मौसम की जानकारी में भी सुधार हो रहा है।
भारत अब आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की 2025 की ग्लोबल AI रिपोर्ट के अनुसार, भारत AI के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब खेती के क्षेत्र में भी AI अब बड़ा बदलाव ला रहा है।
केंद्रीय बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत-विस्तार (Bharat-VISTAAR) नाम के एक नए AI टूल की घोषणा की। इसका पूरा नाम है - वर्चुअली इंटीग्रेटेड सिस्टम टू एक्सेस एग्रीकल्चरल रिसोर्सेज। यह एक बहुभाषी AI टूल होगा जो एग्रीस्टैक पोर्टल और ICAR (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) के कृषि तरीकों को AI सिस्टम के साथ जोड़ेगा।
वित्त मंत्री ने कहा, "यह टूल खेती की उत्पादकता बढ़ाएगा, किसानों को बेहतर फैसले लेने में मदद करेगा और जोखिम कम करेगा। किसानों को उनकी जरूरत के हिसाब से सलाह मिलेगी।" भारत-विस्तार प्लेटफॉर्म किसानों को उनकी अपनी भाषा में सलाह देगा। इससे छोटे और सीमांत किसानों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। किसानों को मौसम की जानकारी, मिट्टी की सेहत, फसल की सलाह और सरकारी योजनाओं की जानकारी एक ही जगह मिलेगी। किसान कॉल सेंटर से भी सीधे जुड़ने की सुविधा होगी।
2024 में शुरू किए गए डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत अब तक 7.63 करोड़ किसानों का डिजिटल आईडी बन चुका है। इसमें 1.93 करोड़ महिला किसानों के आईडी भी शामिल हैं और 2026- 27 तक 11 करोड़ किसान आईडी बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। डिजिटल क्रॉप सर्वे के तहत रबी 2024-25 में 492 जिलों में 23.5 करोड़ से ज्यादा खेतों का सर्वे किया गया। इस सर्वे में फसल का प्रकार और खेती के क्षेत्र की जानकारी जुटाई गई। 2025-26 में इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा।
2023 में शुरू किए गए किसान ई-मित्र चैटबॉट ने अब तक 93 लाख से ज्यादा सवालों के जवाब दिए हैं। यह आवाज से चलने वाला AI चैटबॉट है जो 11 क्षेत्रीय भाषाओं में काम करता है। रोजाना 8,000 से ज्यादा किसान इससे अपने सवाल पूछते हैं। यह चैटबॉट PM किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसी सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देता है। 2024 में शुरू की गई राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली (NPSS) AI और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करके कीटों और बीमारियों का जल्दी पता लगाती है। किसान अपने मोबाइल ऐप के जरिए प्रभावित फसल या कीट की तस्वीर अपलोड कर सकते हैं। सिस्टम तुरंत पहचान करके सलाह देता है कि क्या करना है। दिसंबर 2025 तक 10,000 से ज्यादा कृषि विस्तार कर्मी इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। यह 66 फसलों और 432 से ज्यादा कीट प्रजातियों को कवर करता है।
खरीफ 2025 के लिए एक AI आधारित पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया जिसमें स्थानीय मानसून की भविष्यवाणी की गई। यह 13 राज्यों में 3.88 करोड़ किसानों तक SMS के जरिए पांच क्षेत्रीय भाषाओं में भेजी गई। मध्य प्रदेश और बिहार में किए गए सर्वे से पता चला कि 31 से 52 प्रतिशत किसानों ने इस जानकारी के आधार पर अपनी बुवाई का समय और फसल का चुनाव बदला।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में भी AI का इस्तेमाल बढ़ रहा है। YES-TECH सिस्टम रिमोट सेंसिंग और AI से फसल की पैदावार का सटीक अनुमान लगाता है। 2023 में धान और गेहूं के लिए शुरू किया गया, अब यह सोयाबीन के लिए भी काम कर रहा है। CROPIC एक AI टूल है जो फसल की सेहत की निगरानी और नुकसान का आकलन करता है। किसान अपने स्मार्टफोन से फसल की तस्वीर अपलोड करते हैं। ये तस्वीरें जियो-टैग और टाइम-स्टैम्प होती हैं।
PMFBY व्हाट्सएप चैटबॉट किसानों को बीमा योजना की जानकारी देता है। 2016-17 से 2024-25 (अक्टूबर 2025 तक) के बीच PMFBY और RWBCIS ने 78.51 करोड़ से ज्यादा किसान आवेदनों को कवर किया। इस दौरान 1,90,374 करोड़ रुपये के दावे दिए गए जिससे 23 करोड़ से ज्यादा किसानों को फायदा हुआ।
तमिलनाडु के किसान राजरत्नम कनकराजन की कहानी दिलचस्प है। उन्होंने फार्म अगेन नाम के स्टार्टअप की AI प्रणाली अपनाई। सौर ऊर्जा से चलने वाले सेंसर से मिट्टी की नमी, सिंचाई और खाद के इस्तेमाल की रीयल-टाइम निगरानी की। इस सिस्टम ने खेत के काम को ऑटोमेट किया, ज्यादा सिंचाई रोकी और खाद के इस्तेमाल को बेहतर बनाया। नतीजा - नारियल की पैदावार दोगुनी हो गई। यह तरीका अब तमिलनाडु में 4,000 एकड़ से ज्यादा जमीन पर 3,500 से ज्यादा किसान इस्तेमाल कर रहे हैं। देसी उपकरण की कीमत 2.5 लाख रुपये है जबकि आयातित उपकरण 25 लाख रुपये का आता है। इस तरीके से सालाना 4 लाख क्यूबिक मीटर पानी और 1.75 लाख किलोवाट बिजली की बचत हो रही है। साथ ही 20,000 टन CO2 उत्सर्जन भी कम हुआ है।
सॉयल एंड लैंड यूज सर्वे ऑफ इंडिया (SLUSI) देश भर में गांव स्तर पर मिट्टी की मैपिंग कर रहा है। सितंबर 2024 तक करीब 2.9 करोड़ हेक्टेयर की मैपिंग हो चुकी है। लक्ष्य 14.2 करोड़ हेक्टेयर कृषि भूमि की मैपिंग करने का है। इस काम के लिए उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश को 1,076 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
2018-19 से राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत एग्री-टेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा दिया जा रहा है। जनवरी 2026 तक 6,000 से ज्यादा एग्री-स्टार्टअप्स को प्रशिक्षण मिला है। 2019-20 से 2025-26 के बीच 2,282 स्टार्टअप्स को वित्तीय और तकनीकी मदद दी गई है। कुल मिलाकर 186.55 करोड़ रुपये की ग्रांट दी जा चुकी है। आइडिया स्टेज पर 5 लाख रुपये तक और सीड स्टेज पर 25 लाख रुपये तक की मदद मिलती है।
ICAR-इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट (IARI) का कृषि इंजीनियरिंग विभाग कृषि रोबोटिक्स पर काम कर रहा है। मिट्टी के नमूने लेने, बुवाई, कटाई और फसल निगरानी के लिए रोबोट विकसित किए जा रहे हैं। भारत में स्वचालित ट्रैक्टर, रोबोटिक हार्वेस्टिंग सिस्टम और AI आधारित फसल निगरानी के उपकरण भी आ रहे हैं।
बजट 2026-27 में बड़ा ऐलान: भारत-विस्तार
वित्त मंत्री ने कहा, "यह टूल खेती की उत्पादकता बढ़ाएगा, किसानों को बेहतर फैसले लेने में मदद करेगा और जोखिम कम करेगा। किसानों को उनकी जरूरत के हिसाब से सलाह मिलेगी।" भारत-विस्तार प्लेटफॉर्म किसानों को उनकी अपनी भाषा में सलाह देगा। इससे छोटे और सीमांत किसानों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। किसानों को मौसम की जानकारी, मिट्टी की सेहत, फसल की सलाह और सरकारी योजनाओं की जानकारी एक ही जगह मिलेगी। किसान कॉल सेंटर से भी सीधे जुड़ने की सुविधा होगी।
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किसान ई-मित्र: रोज 8,000 सवालों के जवाब
मानसून की सटीक भविष्यवाणी
फसल बीमा में AI का इस्तेमाल
PMFBY व्हाट्सएप चैटबॉट किसानों को बीमा योजना की जानकारी देता है। 2016-17 से 2024-25 (अक्टूबर 2025 तक) के बीच PMFBY और RWBCIS ने 78.51 करोड़ से ज्यादा किसान आवेदनों को कवर किया। इस दौरान 1,90,374 करोड़ रुपये के दावे दिए गए जिससे 23 करोड़ से ज्यादा किसानों को फायदा हुआ।