AI Summit 2026: पीएम नरेंद्र मोदी का ‘मानव विजन’, AI में भारत के सुनहरे भविष्य का ऐलान
Gaon Connection | Feb 19, 2026, 19:39 IST
नई दिल्ली में आयोजित ग्लोबल AI इंपैक्ट समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधियों को संबोधित किया। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को मानव इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव बताया और कहा कि इसकी रफ्तार और पैमाना दोनों अभूतपूर्व हैं। पीएम मोदी ने समिट में AI के लिए 'मानव विजन' पेश किया जो नैतिकता, जवाबदेही, राष्ट्रीय संप्रभुता, समावेश और वैधता के पांच स्तंभों पर आधारित है। उन्होंने AI को सबके लिए खुला और साझा बनाने की वकालत की तथा डीपफेक और बच्चों की सुरक्षा पर भी जोर दिया। पीएम ने साफ कहा कि भारत को AI में भय नहीं बल्कि भाग्य और भविष्य दिखता है। उन्होंने दुनिया को भारत में आकर AI विकसित करने और पूरी मानवता तक पहुंचाने का निमंत्रण दिया।
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नई दिल्ली में आयोजित ऐतिहासिक ग्लोबल AI इंपैक्ट समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनियाभर के नेताओं, उद्योग जगत के दिग्गजों और युवा इनोवेटर्स को संबोधित किया। इस समिट में 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि मौजूद थे। पीएम मोदी ने अपने भाषण में AI को लेकर भारत की सोच, जिम्मेदारी और दुनिया के लिए एक नया रास्ता सुझाया।
पीएम मोदी ने सबसे पहले दुनिया को याद दिलाया कि यह समिट किस देश में हो रही है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की एक-छठी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। यहां दुनिया का सबसे बड़ा युवा वर्ग है, सबसे बड़ा टेक टैलेंट पूल है और तकनीक को अपनाने की सबसे तेज रफ्तार है। उन्होंने कहा कि इस समिट का भारत में होना सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरे ग्लोबल साउथ के लिए गर्व की बात है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हर कुछ सदियों में एक ऐसा मोड़ आता है जो पूरी सभ्यता की दिशा बदल देता है। जब पत्थरों से पहली बार आग जली, जब बोली को लिपि में लिखा गया, जब बेतार संकेत भेजे गए, तब भी किसी ने नहीं सोचा था कि ये बदलाव कितने बड़े होंगे। AI भी वैसा ही बदलाव है। लेकिन इस बार फर्क यह है कि इसकी रफ्तार और पैमाना दोनों अभूतपूर्व हैं। पहले किसी तकनीक का असर दशकों बाद दिखता था, AI का असर अभी और तेजी से दिख रहा है।
समिट का सबसे अहम पल तब आया जब पीएम मोदी ने AI के लिए 'MANAV मानव विजन' पेश किया। उन्होंने बताया कि मानव का मतलब है इंसान, और यह विजन पांच स्तंभों पर खड़ा है। पहला M यानी Moral and Ethical Systems, AI की नींव नैतिक होनी चाहिए। दूसरा A यानी Accountable Governance, पारदर्शी नियम और मजबूत निगरानी जरूरी है। तीसरा N यानी National Sovereignty, जिसका डेटा उसका अधिकार। चौथा A यानी Accessible and Inclusive, AI एकाधिकार नहीं बल्कि सबके लिए बढ़ावा देने वाला हो। और पांचवां V यानी Valid and Legitimate, AI कानूनी और सत्यापित हो। पीएम मोदी ने कहा कि यह मानव विजन 21वीं सदी में मानवता की भलाई की अहम कड़ी बनेगा।
बहुत से लोगों के मन में यह डर है कि AI नौकरियां छीन लेगा। इस पर पीएम मोदी ने कहा कि जब इंटरनेट आया था तब भी यही डर था, लेकिन इंटरनेट ने करोड़ों नई नौकरियां बनाईं। AI के साथ भी यही होगा। उन्होंने कहा कि हम एक ऐसे युग में प्रवेश कर रहे हैं जहां इंसान और AI मिलकर काम करेंगे, मिलकर नई चीजें बनाएंगे और साथ मिलकर आगे बढ़ेंगे। इसके लिए जरूरी है कि स्किलिंग और रिस्किलिंग को एक जन आंदोलन बनाया जाए।
पीएम मोदी ने कहा कि कुछ देश और कंपनियां AI को एक गोपनीय रणनीतिक संपत्ति मानती हैं, लेकिन भारत की सोच अलग है। उन्होंने कहा कि जब कोड खुले होंगे और साझा किए जाएंगे तभी लाखों युवा दिमाग उन्हें और बेहतर और सुरक्षित बना सकेंगे। उन्होंने AI को Global Common Good यानी वैश्विक साझा संपत्ति के रूप में विकसित करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
पीएम ने डीपफेक और नकली कंटेंट को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जैसे खाने के पैकेट पर न्यूट्रिशन लेबल होता है, वैसे ही डिजिटल कंटेंट पर भी ऑथेंटिसिटी लेबल होना चाहिए ताकि लोगों को पता चले कि क्या असली है और क्या AI से बनाया गया है। बच्चों की सुरक्षा पर भी उन्होंने जोर दिया और कहा कि जैसे स्कूल का पाठ्यक्रम बच्चों के लिए सोच-समझकर तैयार किया जाता है, वैसे ही AI की दुनिया भी बच्चों के लिए सुरक्षित होनी चाहिए।
अपने भाषण के सबसे यादगार हिस्से में पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया में दो तरह के लोग हैं, एक जिन्हें AI में भय दिखता है और दूसरे जिन्हें इसमें भाग्य नजर आता है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि भारत को AI में भय नहीं, भाग्य दिखता है, भविष्य दिखता है। भारत के पास टैलेंट भी है, ऊर्जा भी है और नीतिगत स्पष्टता भी है। अंत में पीएम मोदी ने दुनियाभर के निवेशकों और कंपनियों को भारत में आने का न्योता दिया। उन्होंने कहा कि भारत में जो AI मॉडल सफल होता है वह पूरी दुनिया में काम कर सकता है। इसलिए उनका संदेश था कि भारत में डिजाइन करो, भारत में बनाओ और पूरी दुनिया को दो।