Animal Care: अब जानवरों के लिए भी मिलेगी Ambulance, पशुपालक घर बैठे 1962 पर करें कॉल
Gaon Connection | Mar 24, 2026, 10:51 IST
उत्तर प्रदेश सरकार ने नया सेवा अभियान शुरू किया है, जिसमें 1962 नंबर पर कॉल करके घर में मुफ्त पशु चिकित्सा सेवा प्राप्त की जा सकती है। इस सेवा में मोबाइल वैन में तैनात पशु चिकित्सक, आवश्यक दवाएं और छोटे ऑपरेशंस की सुविधाएं उपलब्ध हैं।
जानवरों को भी एंबुलेंस जैसी सुविधा उपलब्ध
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने पशुपालकों को बड़ी राहत देते हुए जानवरों के लिए एंबुलेंस जैसी सुविधा शुरू की है, जिसके तहत 1962 डायल कर घर बैठे मुफ्त पशु चिकित्सा सेवा प्राप्त की जा सकती है। यह मोबाइल वैन जीपीएस से लैस है और इसमें पशु चिकित्सक, सहायक, आवश्यक दवाइयां, छोटे ऑपरेशन, कृत्रिम गर्भाधान और बीमार पशुओं के लिए ड्रिप की व्यवस्था है।
1962 मोबाइल वैन के तहत पशुपालकों को उनके घर पर ही मुफ्त पशु चिकित्सा सेवा प्रदान की जाती है। यह जीपीएस से लैस एक चलता-फिरता अस्पताल है, जिसमें पशु चिकित्सक, सहायक, आवश्यक दवाइयां, छोटे ऑपरेशन की सुविधा, कृत्रिम गर्भाधान और बीमार पशुओं को ड्रिप लगाने की व्यवस्था होती है। यह सेवा 1962 पर कॉल करने पर उपलब्ध होती है।
इस सुविधा से पशुपालकों को अपने पशुओं को अस्पताल ले जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, क्योंकि डॉक्टर और आवश्यक दवाइयाँ उनके दरवाजे पर पहुँच जाती हैं। वहीं बीमार पशुओं का मुफ्त इलाज किया जाता है और दवाइयां भी प्रदान की जाती हैं। वैन में छोटे ऑपरेशन के लिए औजार, मरहम-पट्टी और इंजेक्शन जैसी चिकित्सा उपकरण भी उपलब्ध हैं।
मोबाइल वैन में कई प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके अलावा, मोबाइल वैन में पशुओं में होने वाली बीमारियों जैसे खुरपका-मुंहपका (FMD) और गलघोंटू सहित अन्य संक्रामक रोगों से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण की सुविधा भी मिलती है। पशुओं की नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा भी प्रदान की जाती है।
वैन में पशुओं के खून, गोबर समेत जाँच के लिए एक छोटा लैब की सुविधा भी उपलब्ध है। इस एंबुलेंस सेवा में डॉक्टर और स्टाफ गाँव तक पहुँचकर पशुओं का इलाज करते हैं। बड़े पशुओं के इलाज के लिए प्रति पशु 150 रुपये का शुल्क लिया जाता है। यह सुविधा खासतौर पर दूरस्थ क्षेत्रों के पशुपालकों के लिए राहत लेकर आई है। किसान 1962 टोल-फ्री नंबर पर कॉल करके बीमार पशुओं के लिए आपातकालीन सेवा का लाभ उठा सकते हैं।
यह पहल पशुधन के स्वास्थ्य की देखभाल में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे पशुपालकों को अपने जानवरों के लिए समय पर और सुलभ चिकित्सा सहायता मिल सकेगी। इस सेवा के माध्यम से पशुओं के रोगों का शीघ्र निदान और उपचार संभव होगा, जिससे पशुधन की उत्पादकता और स्वास्थ्य में सुधार होगा। दूरदराज के इलाकों में रहने वाले पशुपालकों को विशेष रूप से इसका लाभ मिलेगा, जिन्हें पहले अपने बीमार पशुओं को इलाज के लिए दूर स्थित अस्पतालों तक ले जाने में कठिनाई होती थी।
इसमें न केवल बीमार पशुओं का इलाज शामिल है, बल्कि संक्रामक रोगों से बचाव के लिए टीकाकरण और पशुधन की नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान जैसी निवारक और विकासात्मक सेवाएं भी प्रदान की जाती हैं। वैन में मौजूद छोटा लैब पशुओं के नमूनों की जांच करने में सक्षम है, जिससे रोगों के कारणों का पता लगाने और प्रभावी उपचार योजना बनाने में मदद मिलती है। यह सुविधा पशु चिकित्सकों को सटीक निदान करने और उचित दवाएं निर्धारित करने में सहायता करती है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि बड़े पशुओं के इलाज के लिए एक मामूली शुल्क निर्धारित किया गया है, जो इस सेवा की स्थिरता और विस्तार में योगदान देगा। हालांकि, यह शुल्क भी पशुपालकों पर अधिक बोझ नहीं डालेगा, खासकर जब बीमार पशुओं के इलाज की तुलना में।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल पशुपालकों के लिए एक वरदान साबित हो रही है। यह न केवल पशुओं के स्वास्थ्य की रक्षा करती है, बल्कि पशुपालकों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करने में सहायक है, क्योंकि स्वस्थ पशुधन अधिक उत्पादक होता है। 1962 टोल-फ्री नंबर पर कॉल करके कोई भी पशुपालक इस आपातकालीन सेवा का लाभ उठा सकता है।
कैसे काम करती है ये सुविधा?
इस सुविधा से पशुपालकों को अपने पशुओं को अस्पताल ले जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, क्योंकि डॉक्टर और आवश्यक दवाइयाँ उनके दरवाजे पर पहुँच जाती हैं। वहीं बीमार पशुओं का मुफ्त इलाज किया जाता है और दवाइयां भी प्रदान की जाती हैं। वैन में छोटे ऑपरेशन के लिए औजार, मरहम-पट्टी और इंजेक्शन जैसी चिकित्सा उपकरण भी उपलब्ध हैं।
मोबाइल वैन में होंगी क्या-क्या सुविधाएँ
इन तकलीफों की होगी जाँच
क्यों जरूरी है ये कदम?
इसमें न केवल बीमार पशुओं का इलाज शामिल है, बल्कि संक्रामक रोगों से बचाव के लिए टीकाकरण और पशुधन की नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान जैसी निवारक और विकासात्मक सेवाएं भी प्रदान की जाती हैं। वैन में मौजूद छोटा लैब पशुओं के नमूनों की जांच करने में सक्षम है, जिससे रोगों के कारणों का पता लगाने और प्रभावी उपचार योजना बनाने में मदद मिलती है। यह सुविधा पशु चिकित्सकों को सटीक निदान करने और उचित दवाएं निर्धारित करने में सहायता करती है।
कहाँ लगेगा शुल्क?
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल पशुपालकों के लिए एक वरदान साबित हो रही है। यह न केवल पशुओं के स्वास्थ्य की रक्षा करती है, बल्कि पशुपालकों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करने में सहायक है, क्योंकि स्वस्थ पशुधन अधिक उत्पादक होता है। 1962 टोल-फ्री नंबर पर कॉल करके कोई भी पशुपालक इस आपातकालीन सेवा का लाभ उठा सकता है।