आंगनवाड़ी केंद्रों की सूरत बदलने की तैयारी, बुनियादी सुविधाओं पर जोर
Gaon Connection | Feb 04, 2026, 17:42 IST
टूटी-फूटी दीवारें, पानी की किल्लत और शौचालय की कमी यही थी देश के ज्यादातर आंगनवाड़ी केंद्रों की तस्वीर। लेकिन अब सरकार ने इन्हें 'सक्षम आंगनवाड़ी' में बदलने का बीड़ा उठाया है। पेयजल के लिए बजट 70% बढ़ाकर 17,000 रुपये और शौचालय के लिए तीन गुना करके 36,000 रुपये कर दिया गया है। अगले पांच सालों में मनरेगा के साथ मिलकर 50,000 नए आंगनवाड़ी भवन बनेंगे - हर साल 10,000 की रफ्तार से। खास बात यह कि अब आंगनवाड़ी केंद्रों में LED स्क्रीन, वाटर प्यूरीफायर, रंग-बिरंगी दीवारें और आधुनिक शिक्षण सामग्री भी होगी। जनजातीय इलाकों और सीमावर्ती क्षेत्रों पर विशेष फोकस है, जहां हजारों नए केंद्र बनाए जा रहे हैं।
देश भर में फैले आंगनवाड़ी केंद्रों की हालत सुधारने के लिए सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं। मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत इन केंद्रों में पानी, शौचालय और बुनियादी ढांचे जैसी जरूरी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर खास ध्यान दिया जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि अब आंगनवाड़ी में पेयजल सुविधा के लिए पहले जहां 10,000 रुपये मिलते थे, वहीं अब 17,000 रुपये दिए जा रहे हैं। इसी तरह शौचालय निर्माण के लिए राशि 12,000 रुपये से तीन गुना बढ़ाकर 36,000 रुपये कर दी गई है।
सरकार ने मनरेगा योजना के साथ तालमेल बिठाते हुए अगले पांच सालों में 50,000 नए आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण का लक्ष्य रखा है, यानी हर साल 10,000 नए केंद्र बनेंगे। इसके लिए फंडिंग का एक खास मॉडल तैयार किया गया है - हर आंगनवाड़ी केंद्र के निर्माण के लिए 8 लाख रुपये मनरेगा से, 2 लाख रुपये 15वें वित्त आयोग या किसी अन्य अनटाइड फंड से और 2 लाख रुपये महिला एवं बाल विकास मंत्रालय देगा। इस राशि को केंद्र और राज्यों के बीच तय अनुपात में बांटा जाएगा।
राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह भी सलाह दी गई है कि वे आंगनवाड़ी भवन बनाने के लिए दूसरी योजनाओं से भी पैसा जुटाएं। इसमें सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना, ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष, पंचायती राज संस्थाओं को मिलने वाले वित्त आयोग अनुदान और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम जैसी योजनाएं शामिल हैं। इससे आंगनवाड़ी निर्माण की रफ्तार तेज होने की उम्मीद है।
15वें वित्त आयोग के चक्र में सरकार दो लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को 'सक्षम आंगनवाड़ी केंद्र' के रूप में तब्दील कर रही है। ये वो केंद्र हैं जो सरकारी भवनों में स्थित हैं और इन्हें हर साल 40,000 की दर से अपग्रेड किया जा रहा है। सक्षम आंगनवाड़ी केंद्रों को पारंपरिक केंद्रों से बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं - एलईडी स्क्रीन, पानी साफ करने की मशीन, बच्चों की शुरुआती देखभाल और शिक्षा के लिए खास सामग्री और दीवारों पर रंग-बिरंगी बाला पेंटिंग। इससे बच्चों के लिए सीखने का माहौल ज्यादा आकर्षक और प्रभावी बनेगा।
खास समुदायों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत देश की 75 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के विकास के लिए कुल 2,500 आंगनवाड़ी केंद्रों के निर्माण को मंजूरी मिल चुकी है। इसके अलावा धरती आभा जनजाति ग्राम उन्नत अभियान के तहत जनजातीय समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थितियों को बेहतर बनाने के लिए 875 आंगनवाड़ी केंद्र बनाए जाएंगे। विशेष बात यह है कि उत्तरी सीमावर्ती इलाकों पर विशेष ध्यान देते हुए विभिन्न जीवन ग्राम कार्यक्रम के पहले चरण में 101 आंगनवाड़ी केंद्रों का निर्माण भी शुरू हो गया है।
एक अहम पहल यह भी की गई है कि अब आंगनवाड़ी केंद्रों को सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के साथ जोड़ा जा रहा है। शिक्षा मंत्रालय के विद्यालय शिक्षा और साक्षरता विभाग के सहयोग से 3 सितंबर 2025 को इस बारे में दिशा-निर्देश जारी किए गए। इसका मकसद शुरुआती बाल्यावस्था की देखभाल, शिक्षा और बच्चों में बुनियादी साक्षरता तथा गणित के कौशल को मजबूत करना है। जहां संभव हो, वहां आंगनवाड़ी केंद्रों को प्राथमिक स्कूलों के परिसर में ही स्थापित किया जाएगा, और जहां यह संभव नहीं है, वहां उन्हें निकटतम प्राथमिक विद्यालय से जोड़ा जाएगा।
यह समझना जरूरी है कि मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका असल कार्यान्वयन राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के हाथ में है। लाभार्थियों तक सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार राज्यों के साथ नियमित रूप से बातचीत करती रहती है। खासतौर पर कर्मचारियों की रिक्तियों को भरने के मुद्दे पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए चर्चा होती रहती है, क्योंकि बिना पर्याप्त स्टाफ के आंगनवाड़ी केंद्र ठीक से काम नहीं कर सकते। बुनियादी ढांचे और कर्मचारियों की रिक्तियों का राज्यवार और केंद्र शासित प्रदेशवार पूरा ब्योरा पोषण ट्रैकर वेबसाइट (poshantracker.in/statistics) पर उपलब्ध है, जहां कोई भी जाकर देख सकता है कि किस राज्य में क्या स्थिति है।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने मंगलवार को राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में यह सारी जानकारी दी। यह स्पष्ट है कि सरकार आंगनवाड़ी केंद्रों को सिर्फ औपचारिकता के तौर पर नहीं, बल्कि बच्चों के पोषण और विकास के असली केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है।
सरकार ने मनरेगा योजना के साथ तालमेल बिठाते हुए अगले पांच सालों में 50,000 नए आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण का लक्ष्य रखा है, यानी हर साल 10,000 नए केंद्र बनेंगे। इसके लिए फंडिंग का एक खास मॉडल तैयार किया गया है - हर आंगनवाड़ी केंद्र के निर्माण के लिए 8 लाख रुपये मनरेगा से, 2 लाख रुपये 15वें वित्त आयोग या किसी अन्य अनटाइड फंड से और 2 लाख रुपये महिला एवं बाल विकास मंत्रालय देगा। इस राशि को केंद्र और राज्यों के बीच तय अनुपात में बांटा जाएगा।
राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह भी सलाह दी गई है कि वे आंगनवाड़ी भवन बनाने के लिए दूसरी योजनाओं से भी पैसा जुटाएं। इसमें सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना, ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष, पंचायती राज संस्थाओं को मिलने वाले वित्त आयोग अनुदान और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम जैसी योजनाएं शामिल हैं। इससे आंगनवाड़ी निर्माण की रफ्तार तेज होने की उम्मीद है।
15वें वित्त आयोग के चक्र में सरकार दो लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को 'सक्षम आंगनवाड़ी केंद्र' के रूप में तब्दील कर रही है। ये वो केंद्र हैं जो सरकारी भवनों में स्थित हैं और इन्हें हर साल 40,000 की दर से अपग्रेड किया जा रहा है। सक्षम आंगनवाड़ी केंद्रों को पारंपरिक केंद्रों से बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं - एलईडी स्क्रीन, पानी साफ करने की मशीन, बच्चों की शुरुआती देखभाल और शिक्षा के लिए खास सामग्री और दीवारों पर रंग-बिरंगी बाला पेंटिंग। इससे बच्चों के लिए सीखने का माहौल ज्यादा आकर्षक और प्रभावी बनेगा।
खास समुदायों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत देश की 75 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के विकास के लिए कुल 2,500 आंगनवाड़ी केंद्रों के निर्माण को मंजूरी मिल चुकी है। इसके अलावा धरती आभा जनजाति ग्राम उन्नत अभियान के तहत जनजातीय समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थितियों को बेहतर बनाने के लिए 875 आंगनवाड़ी केंद्र बनाए जाएंगे। विशेष बात यह है कि उत्तरी सीमावर्ती इलाकों पर विशेष ध्यान देते हुए विभिन्न जीवन ग्राम कार्यक्रम के पहले चरण में 101 आंगनवाड़ी केंद्रों का निर्माण भी शुरू हो गया है।
एक अहम पहल यह भी की गई है कि अब आंगनवाड़ी केंद्रों को सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के साथ जोड़ा जा रहा है। शिक्षा मंत्रालय के विद्यालय शिक्षा और साक्षरता विभाग के सहयोग से 3 सितंबर 2025 को इस बारे में दिशा-निर्देश जारी किए गए। इसका मकसद शुरुआती बाल्यावस्था की देखभाल, शिक्षा और बच्चों में बुनियादी साक्षरता तथा गणित के कौशल को मजबूत करना है। जहां संभव हो, वहां आंगनवाड़ी केंद्रों को प्राथमिक स्कूलों के परिसर में ही स्थापित किया जाएगा, और जहां यह संभव नहीं है, वहां उन्हें निकटतम प्राथमिक विद्यालय से जोड़ा जाएगा।
यह समझना जरूरी है कि मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका असल कार्यान्वयन राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के हाथ में है। लाभार्थियों तक सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार राज्यों के साथ नियमित रूप से बातचीत करती रहती है। खासतौर पर कर्मचारियों की रिक्तियों को भरने के मुद्दे पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए चर्चा होती रहती है, क्योंकि बिना पर्याप्त स्टाफ के आंगनवाड़ी केंद्र ठीक से काम नहीं कर सकते। बुनियादी ढांचे और कर्मचारियों की रिक्तियों का राज्यवार और केंद्र शासित प्रदेशवार पूरा ब्योरा पोषण ट्रैकर वेबसाइट (poshantracker.in/statistics) पर उपलब्ध है, जहां कोई भी जाकर देख सकता है कि किस राज्य में क्या स्थिति है।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने मंगलवार को राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में यह सारी जानकारी दी। यह स्पष्ट है कि सरकार आंगनवाड़ी केंद्रों को सिर्फ औपचारिकता के तौर पर नहीं, बल्कि बच्चों के पोषण और विकास के असली केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है।