Asha Bhosle: 92 साल की उम्र में निधन, बचपन में सांगली जिले के इस गाँव को क्यों छोड़ना पड़ा?
Gaon Connection | Apr 12, 2026, 14:26 IST
RIP Asha Tai: स्वर कोकिला लता मंगेशकर की छोटी बहन और जानी-मानी गायिका आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। आशा ताई का जाना भारतीय संगीत के एक सुनहरे युग का अंत माना जा रहा है। उन्होंने अपनी आवाज़ से संगीत की दुनिया में अमिट छाप छोड़ी।
आशा भोसले का निधन
Asha Bhosle death: संगीत की दुनिया की एक जानी-मानी आवाज़, स्वर कोकिला लता मंगेशकर की छोटी बहन और दिग्गज गायिका आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने रविवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली, जहाँ उन्हें कार्डियक अरेस्ट के बाद शनिवार को भर्ती कराया गया था। आशा ताई का जाना भारतीय संगीत के एक सुनहरे युग का अंत माना जा रहा है।
आशा भोसले का जन्म सांगली के गोआर में संगीतकार दीनानाथ मंगेशकर के घर हुआ था। बचपन में वे अपनी बड़ी बहन लता के पीछे-पीछे चलती थीं। जब आशा महज़ नौ साल की थीं, तब उनके पिता का निधन हो गया। इस दुखद घटना के बाद पूरा मंगेशकर परिवार आर्थिक तंगी से गुज़रने लगा। 1945 में परिवार पुणे और कोल्हापुर से होते हुए मुंबई आ गया। उस समय 14 साल की लता ने परिवार की ज़िम्मेदारी संभाली, वहीं नन्ही आशा भी संघर्ष के रास्ते पर चल पड़ीं।
आशा भोसले के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी एक अलग पहचान बनाना था। उस दौर में लता मंगेशकर सफलता की ऊंचाइयों पर थीं। आशा को अक्सर ऐसी फिल्में या गाने मिलते थे जिन्हें बड़ी गायिकाओं ने ठुकरा दिया होता था। उनकी 'मराठी मिश्रित हिंदी' को लेकर भी सवाल उठे, लेकिन आशा ने हार नहीं मानी। 16 साल की उम्र में गणपतराव भोसले से शादी करने के बाद उन्होंने परिवार से दूरी बना ली, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गईं। बाद में, उन्होंने 1980 में मशहूर संगीतकार आर.डी. बर्मन (पंचम दा) से दूसरी शादी की, जो उनके निधन तक चली।
ओ.पी. नैयर और एस.डी. बर्मन के साथ उनकी जोड़ी ने संगीत जगत में धूम मचा दी। 'नया दौर' के चुलबुले गीतों से लेकर 'उमराव जान' की संजीदा गज़लों तक, आशा ने साबित कर दिया कि उनकी आवाज़ का दायरा बहुत बड़ा है। जब उन्होंने 'रंगीला' में 60 के दशक के पार 'तन्हा-तन्हा' गाया, तो दुनिया उनकी जादुई ऊर्जा देखकर हैरान रह गई।
आज भले ही वह आवाज़ खामोश हो गई हो, लेकिन 'दिल चीज़ क्या है' और 'दम मारो दम' जैसे उनके अमर नगमे हमेशा फिज़ाओं में गूंजते रहेंगे। सुरों के प्रति उनका जुनून और संघर्ष की यह कहानी भारतीय सिनेमा के इतिहास में हमेशा याद रखी जाएगी। आशा भोसले का जीवन जितना सुरों से सजा था, उतना ही संघर्षों की आग में तपकर निखरा था। उनका सांगली के एक छोटे से गांव से गहरा नाता रहा है।
संघर्षों से भरी एक असाधारण यात्रा
आशा भोसले और लता मंगेशकर
अपनी पहचान बनाने की चुनौती
यंग ऐज में आशा भोसले
संगीत की दुनिया में अमिट छाप
आशा भोसले, दिग्गज गायिका
अमर नगमे जो हमेशा गूंजते रहेंगे
हमेशा रहेंगी याद