Basant Panchmi: पीले रंग से सजे खेत, माँ सरस्वती की पूजा में चढ़ते हैं पीले फूल
Preeti Nahar | Jan 23, 2026, 10:43 IST
आज हम बसंत पंचमी का उत्सव खुशियों के साथ मना रहे हैं। इस खास मौके पर पीले रंग की फसलों की बात करें तो, सरसों, सूरजमुखी, गेंदा, अरहर और सनई हमारे साथ हैं। ये फसलें बसंत ऋतु की खुशबू और नए जीवन का संकेत देती हैं। चलिए, इनके अद्भुत उपयोगों को जानकर इस पर्व को और भी खास बनाते हैं।
Basant Panchmi 2026: आज पूरे देश में बसंत पंचमी का पर्व हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है। इसी दिन से बसंत ऋतु का आगमन होता है, जो अपने साथ कई खास बातें लेकर आती है। बसंत का एक खास रंग है पीला, जो दूर-दूर तक खिले फूलों की तरह मन मोह लेता है। इस खास मौके पर, हम आपको पीले रंग की पांच प्रमुख फसलों के बारे में बता रहे हैं, जो बसंत के मौसम से गहराई से जुड़ी हैं।
बसंत के मौसम में सरसों के खेत पीले फूलों से लहलहा उठते हैं। खेतों के किनारे से गुजरते हुए यह पीला रंग देखते ही बनता है। उत्तराखंड के कुछ इलाकों में तो इस दिन सरसों के फूलों की पूजा करने और उन्हें कानों में लगाने की भी परंपरा है। सरसों सिर्फ एक फसल नहीं, बल्कि देश की महत्वपूर्ण तिलहनी फसलों में से एक है। इससे तेल तो मिलता ही है, इसके हरे पत्ते साग के रूप में खाए जाते हैं और डंडियां पशुओं के चारे के काम आती हैं। बीज, तेल और खली पशु आहार के रूप में भी इस्तेमाल होते हैं।
सूरजमुखी के बड़े-बड़े पीले फूल, जिनके बीच में काला गोला होता है, किसी सोशल मीडिया इमोजी की तरह लगते हैं। आपने सुना होगा कि सूरजमुखी का फूल सूरज की दिशा में घूमता है। इस प्रक्रिया को 'हीलियोट्रोपिज्म' कहते हैं। हालांकि, यह सिर्फ नए फूलों में होता है। पुराने फूलों का मुँह हमेशा पूर्व दिशा में ही रहता है।
गेंदा का फूल, जो पीले और नारंगी रंगों में आता है, पीले रंग के कारण बसंत से खास जुड़ाव रखता है। पूजा-पाठ, शादी-ब्याह और त्योहारों में गेंदे के फूलों का इस्तेमाल खूब होता है। सजावटी फूलों में इसकी मांग सबसे ज्यादा है। आजकल गेंदे के फूल का उपयोग मुर्गी दाने के रूप में भी हो रहा है। इससे अंडों की जर्दी का रंग पीला हो जाता है, जिससे अंडे न केवल आकर्षक दिखते हैं, बल्कि उनकी गुणवत्ता भी बढ़ती है। भारत में मुख्य रूप से अफ्रीकन और फ्रेंच गेंदा उगाया जाता है।
अरहर, भारत की एक प्रमुख दलहनी फसल है, जिसके फूल भी पीले रंग के होते हैं। अरहर की दाल प्रोटीन का एक बेहतरीन स्रोत है। मध्य प्रदेश में यह लगभग 4.75 लाख हेक्टेयर में बोई जाती है, जिससे प्रति हेक्टेयर औसतन 842 किलोग्राम उत्पादन होता है। उत्तर प्रदेश में भी यह 30 लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में उगाई जाती है। यह बारिश के मौसम में बोई जाती है और दिसंबर-जनवरी तक पक जाती है।
सनई के फूल भी पीले रंग के होते हैं और इनका उपयोग खाने में किया जाता है। देश के कई हिस्सों में सनई के फूलों की सब्जी बनाई जाती है। उत्तरी राज्यों में यह खरीफ की फसल है, जबकि दक्षिणी राज्यों में रबी की। इसके पौधे से हरी खाद बनती है और तने को सड़ाकर उससे निकलने वाले रेशों से रस्सी बनाई जाती है।
सरसों/Musturd के फूल
सरसों का फूल
सूरजमुखी/Sunflower के फूल
सूरजमुखी के फूल
गेंदा/Marigold का फूल
गेंदा के फूल
अरहर दाल/Pigeon Pea के फूल
अरहर के फूल
सनई/Sanai के फूल
सनई के फूल