देश की सर्वश्रेष्ठ पंचायतें: विकास की नई मिसाल कायम कर रही हैं ग्राम पंचायतें

Gaon Connection | Feb 11, 2026, 18:15 IST
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पंचायती राज मंत्रालय द्वारा देश भर की उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है। इन पुरस्कारों के माध्यम से गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य, शिक्षा, जल प्रबंधन और स्वच्छता जैसे क्षेत्रों में बेहतरीन काम करने वाली पंचायतों को 50 लाख रुपये से लेकर 5 करोड़ रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। साथ ही, डिजिटल तकनीक के जरिए पंचायतों में पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जा रहा है।
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देश की ग्राम पंचायतें अब विकास की नई कहानी लिख रही हैं। पंचायती राज मंत्रालय की प्रोत्साहन योजना के तहत उत्कृष्ट कार्य करने वाली पंचायतों को हर साल राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार देकर सम्मानित किया जा रहा है। यह योजना राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान का एक अहम हिस्सा है, जिसका मकसद गांवों में सतत विकास को बढ़ावा देना है।

पुरस्कारों की श्रेणियां और राशि

राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार विभिन्न श्रेणियों में दिए जाते हैं। इनमें गरीबी मुक्त और उन्नत आजीविका वाली पंचायत, स्वस्थ पंचायत, बाल हितैषी पंचायत, जल-पर्याप्त पंचायत, स्वच्छ और हरित पंचायत, आत्मनिर्भर बुनियादी ढांचा वाली पंचायत, सामाजिक रूप से संरक्षित पंचायत, सुशासन वाली पंचायत और महिला हितैषी पंचायत शामिल हैं। पुरस्कार विजेता पंचायतों को उनके स्तर और श्रेणी के आधार पर 50 लाख रुपये से लेकर 5 करोड़ रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। यह राशि पंचायतें अपने विकास कार्यों में लगा सकती हैं।

2023-25 के पुरस्कार विजेता

पिछले तीन सालों में कई पंचायतों ने अपने उत्कृष्ट कार्यों से देश में मिसाल कायम की है। वर्ष 2023 में महाराष्ट्र की खंडोबाचीवाड़ी ग्राम पंचायत को गरीबी मुक्ति और आजीविका सुधार की श्रेणी में पहला स्थान मिला। इसी तरह तेलंगाना की गौतमपुर पंचायत ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

वर्ष 2024 में कर्नाटक की गलीबीडु पंचायत ने आजीविका सुधार में पहला स्थान हासिल किया, जबकि आंध्र प्रदेश की बोम्मासमुद्रम पंचायत को स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतरीन काम के लिए पुरस्कृत किया गया। वर्ष 2025 के पुरस्कारों में विशेष श्रेणियां शामिल की गईं। महाराष्ट्र की दव्वा एस पंचायत को क्लाइमेट एक्शन श्रेणी में पहला स्थान मिला, जबकि तेलंगाना की मल्ल पंचायत ने आत्मनिर्भरता में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

सर्वश्रेष्ठ जिला और ब्लॉक पंचायतें

सिर्फ ग्राम पंचायतें ही नहीं, बल्कि ब्लॉक और जिला पंचायतों को भी उनके समग्र प्रदर्शन के आधार पर सम्मानित किया जा रहा है। वर्ष 2023 में ओडिशा के गंजम जिले को सर्वश्रेष्ठ जिला पंचायत का खिताब मिला और उसे 5 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि दी गई। वर्ष 2024 में त्रिपुरा के गोमती जिले ने यह स्थान हासिल किया।

पंजाब के लिए विशेष प्रावधान

पंजाब में पंचायतों के विकास के लिए कई कदम उठाए गए हैं। राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत पंजाब में 759 ग्राम पंचायत भवनों और 4,300 कंप्यूटर तथा सहायक उपकरणों को मंजूरी दी गई है। इससे पंचायतों में बुनियादी ढांचे में सुधार होगा।भारतनेट कार्यक्रम के तहत पंजाब की 13,236 ग्राम पंचायतों में से 12,807 पंचायतों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी उपलब्ध करा दी गई है। यह संख्या 5 फरवरी 2026 तक की है। इसके अलावा, 500 ग्राम पंचायत भवनों में कॉमन सर्विस सेंटर स्थापित किए गए हैं, जहां से ग्रामीण डिजिटल सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।

ई-पंचायत: पारदर्शिता की नई पहल

पंचायती राज मंत्रालय ने ई-पंचायत मिशन मोड प्रोजेक्ट के तहत कई डिजिटल एप्लीकेशन विकसित किए हैं। ई-ग्रामस्वराज ऐप के जरिए पंचायतों में डिजिटल योजना, लेखांकन, निगरानी और ऑनलाइन भुगतान की सुविधा मिल रही है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश भर की 2,53,992 ग्राम पंचायतों ने अपनी विकास योजनाएं ऑनलाइन अपलोड कीं। इसी अवधि में पंचायतों ने ई-ग्रामस्वराज के माध्यम से विक्रेताओं को 44,000 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया, जिसमें से पंजाब की पंचायतों ने 1,000 करोड़ रुपये का हस्तांतरण किया।

'मेरी पंचायत' और अन्य ऐप

'मेरी पंचायत' ऐप के जरिए आम नागरिक अपनी पंचायत की योजनाओं, गतिविधियों और कार्यों की प्रगति की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इससे पंचायत प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ी है। 'पंचायत निर्णय' ऐप ग्राम सभाओं के संचालन में पारदर्शिता लाता है, जबकि एआई-सक्षम 'सभासार' ऐप ग्राम सभा की बैठकों के कार्यवृत्त रिकॉर्ड करने में मदद करता है।

ऑडिट में भी पारदर्शिता

पंचायतों के वित्तीय प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए 'ऑडिटऑनलाइन' ऐप विकसित किया गया है। इसके जरिए पंचायतों के खातों का ऑनलाइन ऑडिट होता है। वर्ष 2023-24 की ऑडिट अवधि के लिए पंजाब की 13,272 ग्राम पंचायतों की ऑडिट रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है। यह पुरस्कार योजना संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अनुरूप है। इसका उद्देश्य गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य सुधार, महिला और बाल विकास, जल प्रबंधन, जलवायु कार्रवाई, स्वच्छ पर्यावरण, बुनियादी ढांचे का विकास और सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में पंचायतों के प्रदर्शन को बढ़ावा देना है।

पंचायती राज मंत्रालय की यह पहल देश की ग्राम पंचायतों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दे रही है। पुरस्कार और प्रोत्साहन राशि पाने के लिए पंचायतें विकास कार्यों में अधिक सक्रिय हो रही हैं। डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से पंचायतों में पारदर्शिता आई है और आम नागरिक अब अपनी पंचायत के कामकाज की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। यह योजना ग्रामीण भारत के विकास में मील का पत्थर साबित हो रही है।
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