Wheat Procurement: गेहूं खरीद में ढील, इस राज्य के किसानों को राहत, सरकार ने बदले ये नियम
Gaon Connection | Apr 17, 2026, 10:05 IST
हरियाणा के किसानों को बड़ी राहत मिली है। बेमौसम बारिश से गेहूं की फसल को हुए नुकसान के बाद केंद्र सरकार ने खरीद नियमों में छूट दी है। लस्टर लॉस और सिकुड़े दानों की सीमा बढ़ाई गई है। इससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा। सरकार ने यह फैसला किसानों को संकट से उबारने के लिए लिया है।
गाड़ी से गेहूं को खाली करता किसान
हरियाणा में हाल ही में हुई बेमौसम बारिश ने गेहूं की फसल को बड़ा नुकसान पहुंचाया है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई थी। दानों की चमक और गुणवत्ता प्रभावित होने के कारण किसानों को अपनी उपज कम कीमत पर बेचने का खतरा था। ऐसे में केंद्र सरकार ने बड़ा राहत भरा कदम उठाते हुए रबी विपणन सत्र (RMS) 2026-27 के लिए गेहूं खरीद के नियमों में विशेष छूट देने का फैसला किया है। इस फैसले का उद्देश्य किसानों को संकटपूर्ण बिक्री (Distress Sale) से बचाना और उन्हें उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाना है।
हरियाणा सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर गेहूं के एकरूप गुणवत्ता मानकों में ढील देने की मांग की थी। राज्य सरकार ने बताया था कि प्रदेश के लगभग सभी जिलों में बारिश के कारण गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित हुई है, जिससे बड़ी मात्रा में फसल सरकारी मानकों पर खरी उतरने में असमर्थ हो सकती है। इस स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने पूरे राज्य के लिए एक समान रूप से नियमों में ढील देने का निर्णय लिया, जो खरीद सत्र की शुरुआत से लागू होगा।
सरकार के नए फैसले के तहत ‘लस्टर लॉस’ यानी गेहूं की चमक कम होने की सीमा को 70 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है। इसका मतलब यह है कि बारिश के कारण फीका पड़ा गेहूं भी अब सरकारी खरीद में स्वीकार किया जाएगा। इसके अलावा ‘सिकुड़े और टूटे दानों’ (Shrivelled & Broken Grains) की सीमा, जो पहले 6 प्रतिशत थी, उसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे उन किसानों को सीधा फायदा मिलेगा जिनकी फसल मौसम के असर से प्रभावित हुई है।
हालांकि गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कुछ सीमाएं भी तय की गई हैं। क्षतिग्रस्त और हल्के क्षतिग्रस्त दानों की कुल मात्रा 6 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती, ताकि पूरी तरह खराब गेहूं की खरीद से बचा जा सके।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि शिथिल मानकों के तहत खरीदे गए गेहूं को सामान्य स्टॉक से अलग रखा जाएगा और उसका अलग से रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। भंडारण के दौरान यदि इस गेहूं की गुणवत्ता में और गिरावट आती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी हरियाणा सरकार की होगी। इसके साथ ही ऐसे स्टॉक का निपटान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा, ताकि लंबे समय तक भंडारण से नुकसान न बढ़े।
इस फैसले को किसानों के लिए राहत पैकेज के रूप में देखा जा रहा है। खराब मौसम के कारण फसल की गुणवत्ता गिरने से किसान पहले ही आर्थिक दबाव में थे। अगर यह छूट नहीं मिलती, तो बड़ी मात्रा में गेहूं सरकारी खरीद से बाहर हो सकता था, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता। अब इस निर्णय के बाद किसानों के लिए अपनी उपज बेचने का रास्ता आसान हो गया है और उन्हें बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है।
राज्य की मांग पर केंद्र का निर्णय
किन नियमों में दी गई बड़ी छूट
हालांकि गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कुछ सीमाएं भी तय की गई हैं। क्षतिग्रस्त और हल्के क्षतिग्रस्त दानों की कुल मात्रा 6 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती, ताकि पूरी तरह खराब गेहूं की खरीद से बचा जा सके।