बिहार सरकार देगी 75 प्रतिशत अनुदान: सब्जी विकास योजना से छोटे किसानों की आय में आएगा बड़ा बदलाव
Gaon Connection | Feb 24, 2026, 15:53 IST
बिहार सरकार ने "सब्जी विकास योजना" के ज़रिए किसानों को एक नई राह दिखाई है। इस योजना में सब्जी और मसाला फसलों की खेती पर 75 प्रतिशत तक सरकारी मदद मिल रही है। करेला, टमाटर, शिमला मिर्च से लेकर अदरक और हल्दी तक अब छोटे किसान भी कम ज़मीन में ज़्यादा कमाई कर सकते हैं।
सब्जी विकास योजना
बिहार हमेशा से खेती-किसानी का राज्य रहा है। यहाँ का किसान पुश्तों से धान और गेहूं उगाता आया है। लेकिन इस पुरानी राह पर चलते-चलते न तो उसकी ज़मीन को आराम मिला, न उसकी जेब को। अब राज्य सरकार ने एक नई सोच के साथ "सब्जी विकास योजना" शुरू की है, जो इस तस्वीर को बदल सकती है। इस योजना का सीधा और सरल मतलब यह है कि अगर कोई किसान सब्जी की खेती करना चाहता है, तो उसे अपनी जेब से बहुत कम खर्च करना होगा। सरकार उस खर्च का 75 प्रतिशत तक खुद उठाएगी। यानी अगर खेती में 100 रुपये लगने हैं, तो किसान को केवल 25 रुपये देने होंगे, बाकी सरकार देगी।
योजना में कई तरह की सब्जियाँ शामिल हैं जैसे करेला, भिंडी, तुरई, टमाटर, फूलगोभी, बैंगन, शिमला मिर्च, हरा मटर, ब्रोकली और कद्दू जैसी दर्जनों फसलें। इससे किसान अपने खेत, मिट्टी और मौसम के हिसाब से फसल चुन सकता है, जो पहले मुमकिन नहीं था।
सब्जियों के साथ-साथ अदरक, हल्दी और ओल जैसी मसाला फसलों को भी इस योजना में जगह मिली है। इन फसलों की माँग देश-विदेश दोनों जगह बढ़ रही है और बाज़ार में इनका दाम भी अच्छा मिलता है। सरकार मसाला फसलों के लिए प्रति हेक्टेयर 1,76,000 रुपये तक की मदद दे रही है, जो छोटे किसान के लिए किसी बड़े तोहफे से कम नहीं है।
योजना का एक और खास हिस्सा है क्लस्टर खेती जिसका मतलब यह है कि एक गाँव या इलाके के कई किसान मिलकर एक ही फसल उगाएं। जब कई किसान साथ मिलकर काम करते हैं, तो बीज, खाद और पानी की व्यवस्था सस्ती पड़ती है और माल को बाज़ार तक पहुँचाना भी आसान हो जाता है। इस तरह की खेती के लिए सरकार प्रति हेक्टेयर 50,000 रुपये तक की सहायता दे रही है।
जो किसान इस योजना का फायदा उठाना चाहते हैं, उन्हें कृषि विभाग की वेबसाइट पर जाकर आवेदन करना होगा। अपने खेत के कागज़ात और ज़रूरी दस्तावेज़ तैयार रखें। आवेदन की जाँच के बाद सरकारी अधिकारी मंज़ूरी देंगे और पैसा सीधे किसान के खाते में आएगा। इसके अलावा कृषि विभाग समय-समय पर प्रशिक्षण भी देता है ताकि किसान नई और वैज्ञानिक तरीके से खेती करना सीखें।
बिहार में ज़्यादातर किसानों के पास बहुत कम ज़मीन है। सब्जी की खेती की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह थोड़ी ज़मीन में भी अच्छी कमाई देती है। सब्जी की माँग हर रोज़ होती है, इसलिए बाज़ार की कमी नहीं। अगर किसान ड्रिप सिंचाई, अच्छे बीज और जैविक खाद का इस्तेमाल करें तो उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ सकते हैं। यह योजना सिर्फ पैसे देने की योजना नहीं है यह किसान की सोच बदलने की कोशिश है। जब किसान एक ही फसल की जगह अलग-अलग सब्जियाँ उगाएगा, तो एक फसल खराब होने पर दूसरी उसे सँभाल लेगी। यही फसल विविधीकरण का असली फायदा है। बिहार का किसान मेहनती है, ज़रूरत बस सही दिशा और सही मदद की थी और यही इस योजना की कोशिश है।
योजना में कई तरह की सब्जियाँ शामिल हैं जैसे करेला, भिंडी, तुरई, टमाटर, फूलगोभी, बैंगन, शिमला मिर्च, हरा मटर, ब्रोकली और कद्दू जैसी दर्जनों फसलें। इससे किसान अपने खेत, मिट्टी और मौसम के हिसाब से फसल चुन सकता है, जो पहले मुमकिन नहीं था।