बिहार कृषि ऐप: किसानों का डिजिटल साथी, जानिए कैसे उठाएं पूरा फायदा

Gaon Connection | Feb 24, 2026, 13:46 IST
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बिहार सरकार का कृषि ऐप राज्य के किसानों के लिए एक बड़ा बदलाव लेकर आया है। यह ऐप सरकारी सब्सिडी, बीज, कृषि यंत्र और फसल मुआवजे जैसी दर्जनों सेवाओं को सीधे किसान के मोबाइल तक पहुँचाता है। इस लेख में जानिए यह ऐप क्या है, कैसे काम करता है और किसान इसे स्टेप बाय स्टेप कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं।
Bihar Krishi app
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बिहार में लगभग दो करोड़ से ज्यादा किसान परिवार हैं जिनमें से अधिकतर छोटे और सीमांत किसान हैं यानी जिनके पास दो हेक्टेयर से कम जमीन है। इन किसानों के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ लेना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। ब्लॉक दफ्तर तक पहुँचने में आधा दिन जाता था, फॉर्म भरने में गलतियाँ होती थीं, बिचौलिए कमीशन माँगते थे और सब्सिडी का पैसा महीनों बाद आता था। इस पूरी व्यवस्था में सबसे ज्यादा नुकसान उस किसान को होता था जिसकी दिहाड़ी दफ्तर के चक्करों में बर्बाद हो जाती थी।

इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए बिहार सरकार के कृषि विभाग ने DBT Agriculture Bihar पोर्टल और उसके मोबाइल वर्जन यानी बिहार कृषि ऐप को विकसित किया।

यह ऐप आखिर है क्या?

बिहार कृषि ऐप को समझने का सबसे आसान तरीका यह है कि इसे एक "डिजिटल कृषि दफ्तर" मानें जो चौबीसों घंटे आपकी जेब में रहता है। यह ऐप DBT यानी Direct Benefit Transfer प्रणाली से जुड़ा है। DBT का मतलब यह है कि सरकार जो भी सब्सिडी या मुआवजा देती है वो पैसा बिना किसी बिचौलिए के सीधे किसान के बैंक खाते में जाता है। इससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाती है और पैसा पूरा और सही वक्त पर मिलता है। यह ऐप एक "वन स्टॉप सॉल्यूशन" है जिसका अर्थ है कि बीज सब्सिडी से लेकर कृषि यंत्र, डीजल अनुदान से लेकर फसल बीमा तक, सब कुछ एक ही जगह मिलता है।

ऐप इस्तेमाल करने से पहले क्या तैयार रखें?

किसी भी सरकारी डिजिटल सेवा की तरह इस ऐप के लिए भी कुछ जरूरी दस्तावेजों की जरूरत होती है और इन्हें पहले से तैयार रखना समझदारी है। सबसे पहला और सबसे जरूरी दस्तावेज है आधार कार्ड, लेकिन सिर्फ आधार कार्ड होना काफी नहीं है। आधार से एक चालू मोबाइल नंबर जुड़ा होना अनिवार्य है क्योंकि पंजीकरण के वक्त OTP उसी नंबर पर आएगा। इसके साथ बैंक



पासबुक की जरूरत होगी जिसमें खाता नंबर और IFSC कोड साफ दिखता हो। जमीन के लिए LPC यानी लगान पावती रसीद या जमाबंदी की जरूरत होगी जिसमें खाता नंबर, खेसरा नंबर और रकबा यानी जमीन का क्षेत्रफल लिखा हो। अंत में एक पासपोर्ट साइज फोटो भी काम आएगी। अगर आधार से मोबाइल नंबर नहीं जुड़ा है तो पहले नजदीकी आधार केंद्र जाकर यह काम जरूर करवाएं। यह एक बार की मेहनत है जो आगे बहुत काम आएगी।

स्टेप बाय स्टेप गाइड: ऐसे करें ऐप का इस्तेमाल

पहला कदम: ऐप डाउनलोड करना

अपने एंड्रॉयड स्मार्टफोन में Google Play Store खोलें और सर्च बार में "DBT Agriculture Bihar" टाइप करें। बिहार सरकार का आधिकारिक ऐप आएगा जिसे डाउनलोड और इंस्टॉल करें। यह ऐप पूरी तरह मुफ्त है और इसे डाउनलोड करने के लिए कोई शुल्क नहीं लगता। हमेशा सरकारी ऐप ही डाउनलोड करें और किसी अनजान लिंक से ऐप इंस्टॉल करने से बचें।

दूसरा कदम: किसान पंजीकरण

ऐप खोलने पर सबसे पहले "किसान पंजीकरण" का विकल्प दिखाई देगा। यह पूरी प्रक्रिया की नींव है इसलिए इसे ध्यान से करें। अपना 12 अंकों का आधार नंबर डालें जिसके बाद आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक OTP आएगा। OTP डालते ही आपकी पहचान सत्यापित हो जाएगी। इसके बाद अपना नाम, पूरा पता, जिला, ब्लॉक और गाँव की जानकारी सावधानी से भरें।

पंजीकरण सफलतापूर्वक होने पर आपको एक 13 अंकों की किसान आईडी मिलेगी। यह नंबर आपकी सबसे कीमती डिजिटल पहचान है। इसे अपनी डायरी में या फोन में किसी सुरक्षित जगह लिख कर जरूर रखें क्योंकि हर बार लॉगिन और हर योजना में यही नंबर काम आएगा।

तीसरा कदम: बैंक और जमीन की जानकारी जोड़ना

पंजीकरण के बाद लॉगिन करके अपनी प्रोफाइल में जाएं। यहाँ अपने बैंक खाते की जानकारी भरें जिसमें खाता नंबर और IFSC कोड शामिल हैं। इसके बाद जमीन की जानकारी भरें जैसे खाता नंबर, खेसरा नंबर और रकबा। यह जानकारी आपकी LPC रसीद पर होती है। इसे बिल्कुल सही भरें क्योंकि गलत जानकारी आगे चलकर आवेदन रद्द करवा सकती है और सब्सिडी रुक सकती है।

चौथा कदम: योजना चुनना और आवेदन करना

प्रोफाइल पूरी होने के बाद आपके सामने एक डैशबोर्ड खुलता है जिसमें अलग-अलग योजनाओं के आइकन दिखते हैं। यहाँ से आप अपनी जरूरत की योजना चुन सकते हैं।

बीज सब्सिडी के तहत किसान उन्नत किस्म के बीजों के लिए कम दाम पर आवेदन कर सकते हैं और बीज या तो घर पर आएगा या नजदीकी वितरण केंद्र से मिलेगा। डीजल अनुदान योजना के तहत सिंचाई के लिए डीजल पर सरकारी मदद ली जा सकती है जो खासकर खरीफ और रबी सीजन में बहुत काम आती है। कृषि यंत्र सब्सिडी के जरिए ट्रैक्टर, थ्रेशर, पंपसेट या अन्य आधुनिक उपकरण खरीदने पर सरकारी छूट के लिए आवेदन होता है।

फसल सहायता योजना उन किसानों के लिए है जिनकी फसल बाढ़, सूखा या ओलावृष्टि से बर्बाद हो गई हो। इस योजना में नुकसान की जानकारी और कुछ फोटो अपलोड करके मुआवजे के लिए आवेदन किया जा सकता है। इसके अलावा मिट्टी परीक्षण के लिए भी इसी ऐप से अनुरोध किया जा सकता है जिसके बाद सॉइल हेल्थ कार्ड मिलता है जो यह बताता है कि आपकी मिट्टी में कौन से पोषक तत्व कम हैं और कौन सी फसल ज्यादा फायदेमंद रहेगी।

पाँचवाँ कदम: आवेदन की स्थिति जाँचते रहें

फॉर्म सबमिट करने के बाद एक रेफरेंस नंबर मिलता है। इसी नंबर से आप ऐप में "Application Status" वाले विकल्प से यह देख सकते हैं कि आपका आवेदन किस चरण में है। आवेदन के बाद कृषि समन्वयक यानी Agriculture Coordinator आपकी जानकारी की जाँच करते हैं। सब सही पाए जाने पर सब्सिडी या मुआवजे की राशि सीधे आपके बैंक खाते में आ जाती है।

स्मार्टफोन नहीं है तो क्या करें?

यह एक जायज सवाल है क्योंकि बिहार के हर किसान के पास स्मार्टफोन नहीं है। ऐसे किसानों के लिए सरकार ने CSC यानी Common Service Centre या वसुधा केंद्र की व्यवस्था की है। ये केंद्र लगभग हर पंचायत में मौजूद हैं जहाँ का संचालक आपकी तरफ से ऐप पर काम कर सकता है। बस अपने सभी जरूरी कागजात साथ ले जाएं।

क्यों भरोसेमंद है यह ऐप?

कुछ किसान डिजिटल सेवाओं पर भरोसा करने में हिचकिचाते हैं और यह स्वाभाविक भी है। लेकिन यह ऐप बिहार सरकार के कृषि विभाग का आधिकारिक प्लेटफॉर्म है और DBT प्रणाली से जुड़ा होने की वजह से इसमें पारदर्शिता पूरी तरह बनी रहती है। हर लेनदेन का रिकॉर्ड रहता है और किसान खुद अपने आवेदन की स्थिति देख सकता है।

बिहार कृषि ऐप सिर्फ एक तकनीकी सुविधा नहीं है बल्कि यह उस व्यवस्था का हिस्सा है जो किसान को उसका हक दिलाने के लिए बनाई गई है। जो किसान अभी तक इससे दूर हैं उनसे गुजारिश है कि आज ही इस ऐप को आजमाएं क्योंकि आपकी मेहनत का फल अब किसी और की जेब में नहीं, सीधे आपके खाते में आना चाहिए।
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