बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के किसानों के लिए चेतावनी सूखे में फसल बचाने के लिए अभी करें ये काम
Gaon Connection | Feb 17, 2026, 17:07 IST
इस साल जनवरी से फरवरी के बीच बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में बारिश बेहद कम रही है। मौसम विभाग (IMD) और कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने 16 फरवरी 2026 को जारी अपने बुलेटिन में किसानों को सतर्क किया है कि अगले दो हफ्तों में भी बारिश नहीं होगी और तापमान सामान्य से ज़्यादा रहेगा। इसलिए गेहूं, सरसों, मक्का और बागवानी फसलों में अभी सही देखभाल बेहद ज़रूरी है।
बिहार में इस बार 1 जनवरी से 15 फरवरी के बीच एक बूंद बारिश नहीं हुई यह सामान्य से 99% कम है। अगले दो हफ्तों यानी 13 से 26 फरवरी तक भी बारिश होने की कोई उम्मीद नहीं है। इस सूखे में देर से बोई गई गेहूं की फसल में दीमक लगने का खतरा बढ़ गया है। किसान भाई शाम के वक्त 20 से 30 किलो रेत में Chlorpyriphos 20EC दवाई (2 लीटर प्रति एकड़) मिलाकर खेत में डालें और उसके बाद सिंचाई करें।
सरसों की फसल में भी इन दिनों माहू (एफिड) कीड़ों का प्रकोप देखा जा रहा है। ये नन्हे कीड़े पत्तियों, तनों और फलियों का रस चूस लेते हैं जिससे पूरा पौधा कमज़ोर पड़ जाता है। इसके अलावा तना छेदक कीड़े से भी सावधान रहें यह पहले पत्ते की बाहरी परत खाता है और फिर अंदर घुसकर पौधे की बढ़त को पूरी तरह रोक देता है। इसलिए किसानों को अपनी सरसों की फसल की नियमित निगरानी करनी चाहिए।
बागवानी के मामले में बिहार के किसानों के लिए एक ज़रूरी बात यह है कि इन दिनों आम और लीची के पेड़ों में फूल आने का समय शुरू हो गया है। इसलिए अभी बागों में कोई भी गुड़ाई या जुताई का काम न करें, वरना फूल झड़ सकते हैं और फल कम लगेंगे।
उत्तर प्रदेश में भी हालात चिंताजनक हैं। पूर्वी UP में सामान्य से 74% और पश्चिमी UP में 16% कम बारिश हुई है। आने वाले दो हफ्तों में बारिश की कोई उम्मीद नहीं है और तापमान भी सामान्य से ज़्यादा रहने का अनुमान है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गेहूं की खड़ी फसल में जिंक की कमी दिखने लगी है अगर पत्तियां पीली पड़ रही हों तो 5 किलो जिंक सल्फेट और 16 किलो यूरिया को 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें। अगर यूरिया पहले ही डाल चुके हों तो जिंक सल्फेट को 2.5 किलो चूने के पानी में मिलाकर छिड़कें।
सरसों में माहू और पेंटेड बग कीट दिखें तो Oxydemeton Methyl 25% EC या Imidacloprid 17.8 SL का छिड़काव करें। अरहर की फलियों में छेद होने पर Dimethoate 30 EC का उपयोग करें।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में तापमान ज़्यादा रहने की वजह से गेहूं, जौ और मक्का की फसलों में समय पर हल्की सिंचाई बेहद ज़रूरी है। गेहूं में कल्ले फूटने, बाली बनने और फूल आने के वक्त सिंचाई करें और सही नमी पर यूरिया डालें। जौ में बाली और फूल बनते समय खेत में नमी बनाए रखें। रबी मक्का में सिल्किंग के समय हल्की सिंचाई और यूरिया छिड़काव करें। जिन खेतों में मटर या अगेती आलू की फसल खत्म हो चुकी है, वहां अब ज़ायद मक्का की बुवाई का सही समय है। बीज को Thiram दवाई से उपचारित करके 18-20 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से बोएं।
हरियाणा में इस बार तुलनात्मक रूप से थोड़ी बेहतर स्थिति है जहा 20.9 मिमी बारिश हुई जो सामान्य से केवल 12% कम है। लेकिन 13-19 फरवरी के दौरान बारिश नहीं होगी और 20-26 फरवरी में भी बहुत कम बारिश की संभावना है। गेहूं किसानों के लिए सलाह है कि मौसम बदल रहा है इसलिए सिंचाई करने से पहले मौसम का हाल ज़रूर देख लें और जरूरत से ज़्यादा पानी न दें।
साथ ही खरपतवार हटाने के लिए निराई-गुड़ाई भी करते रहें। बरसीम और चारे की फसलों के लिए यह समय थोड़ा सावधानी का है क्योंकि हवा में नमी ज़्यादा है जिससे बीमारियां फैल सकती हैं। फिलहाल जल्दबाजी में सिंचाई न करें और बारिश होने के बाद ही सिफारिश के अनुसार खाद डालें।
नोट: यह लेख IMD और ICAR द्वारा जारी राष्ट्रीय कृषि मौसम परामर्श बुलेटिन (16 फरवरी 2026) पर आधारित है। कोई भी दवाई या खाद डालने से पहले अपने स्थानीय कृषि अधिकारी से सलाह लें।
सरसों की फसल में भी इन दिनों माहू (एफिड) कीड़ों का प्रकोप देखा जा रहा है। ये नन्हे कीड़े पत्तियों, तनों और फलियों का रस चूस लेते हैं जिससे पूरा पौधा कमज़ोर पड़ जाता है। इसके अलावा तना छेदक कीड़े से भी सावधान रहें यह पहले पत्ते की बाहरी परत खाता है और फिर अंदर घुसकर पौधे की बढ़त को पूरी तरह रोक देता है। इसलिए किसानों को अपनी सरसों की फसल की नियमित निगरानी करनी चाहिए।
बागवानी के मामले में बिहार के किसानों के लिए एक ज़रूरी बात यह है कि इन दिनों आम और लीची के पेड़ों में फूल आने का समय शुरू हो गया है। इसलिए अभी बागों में कोई भी गुड़ाई या जुताई का काम न करें, वरना फूल झड़ सकते हैं और फल कम लगेंगे।
उत्तर प्रदेश में भी हालात चिंताजनक हैं। पूर्वी UP में सामान्य से 74% और पश्चिमी UP में 16% कम बारिश हुई है। आने वाले दो हफ्तों में बारिश की कोई उम्मीद नहीं है और तापमान भी सामान्य से ज़्यादा रहने का अनुमान है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गेहूं की खड़ी फसल में जिंक की कमी दिखने लगी है अगर पत्तियां पीली पड़ रही हों तो 5 किलो जिंक सल्फेट और 16 किलो यूरिया को 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें। अगर यूरिया पहले ही डाल चुके हों तो जिंक सल्फेट को 2.5 किलो चूने के पानी में मिलाकर छिड़कें।
सरसों में माहू और पेंटेड बग कीट दिखें तो Oxydemeton Methyl 25% EC या Imidacloprid 17.8 SL का छिड़काव करें। अरहर की फलियों में छेद होने पर Dimethoate 30 EC का उपयोग करें।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में तापमान ज़्यादा रहने की वजह से गेहूं, जौ और मक्का की फसलों में समय पर हल्की सिंचाई बेहद ज़रूरी है। गेहूं में कल्ले फूटने, बाली बनने और फूल आने के वक्त सिंचाई करें और सही नमी पर यूरिया डालें। जौ में बाली और फूल बनते समय खेत में नमी बनाए रखें। रबी मक्का में सिल्किंग के समय हल्की सिंचाई और यूरिया छिड़काव करें। जिन खेतों में मटर या अगेती आलू की फसल खत्म हो चुकी है, वहां अब ज़ायद मक्का की बुवाई का सही समय है। बीज को Thiram दवाई से उपचारित करके 18-20 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से बोएं।
हरियाणा में इस बार तुलनात्मक रूप से थोड़ी बेहतर स्थिति है जहा 20.9 मिमी बारिश हुई जो सामान्य से केवल 12% कम है। लेकिन 13-19 फरवरी के दौरान बारिश नहीं होगी और 20-26 फरवरी में भी बहुत कम बारिश की संभावना है। गेहूं किसानों के लिए सलाह है कि मौसम बदल रहा है इसलिए सिंचाई करने से पहले मौसम का हाल ज़रूर देख लें और जरूरत से ज़्यादा पानी न दें।
साथ ही खरपतवार हटाने के लिए निराई-गुड़ाई भी करते रहें। बरसीम और चारे की फसलों के लिए यह समय थोड़ा सावधानी का है क्योंकि हवा में नमी ज़्यादा है जिससे बीमारियां फैल सकती हैं। फिलहाल जल्दबाजी में सिंचाई न करें और बारिश होने के बाद ही सिफारिश के अनुसार खाद डालें।
नोट: यह लेख IMD और ICAR द्वारा जारी राष्ट्रीय कृषि मौसम परामर्श बुलेटिन (16 फरवरी 2026) पर आधारित है। कोई भी दवाई या खाद डालने से पहले अपने स्थानीय कृषि अधिकारी से सलाह लें।