मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026, अब उत्तर प्रदेश के हर गाँव तक पहुंचेगी बस सेवा
Gaon Connection | Mar 10, 2026, 16:27 IST
उत्तर प्रदेश के हर एक गांव में अब बसें चलेंगी! मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026 को कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी है। इस योजना के अंतर्गत अनुबंधित बसों को परमिट और टैक्स से मुक्त रखा जाएगा, जिससे ग्रामीण महिलाओं और पुरुषों को यात्रा करने में आसानी होगी। यह कदम छात्रों और यात्रियों के लिए राहत की एक नई लहर लाएगा।
अब उत्तर प्रदेश के हर गाँव तक पहुंचेगी बस सेवा
उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण इलाकों में परिवहन सुविधा को बेहतर बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। राज्य कैबिनेट ने मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026 को मंजूरी दे दी है। इस योजना का उद्देश्य प्रदेश के हर गाँव तक बस सेवा पहुंचाना है, ताकि ग्रामीण लोगों को शहरों और जिला मुख्यालय तक आने-जाने में आसानी हो सके।
मंगलवार को लखनऊ के लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कुल 31 प्रस्तावों पर चर्चा हुई, जिनमें से 30 को मंजूरी दी गई। इन्हीं में से एक अहम फैसला मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना को लेकर लिया गया। सरकार का कहना है कि इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सस्ती और सुगम परिवहन सुविधा मिलेगी।
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के अनुसार अभी तक प्रदेश के करीब 12,200 गाँवों तक बस सेवा नहीं पहुंच पाती थी। नई योजना लागू होने के बाद अब प्रदेश की सभी 59,163 ग्राम सभाओं तक बसें पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के तहत चलने वाली बसों को परमिट और टैक्स से छूट दी जाएगी, जिससे बस संचालकों को भी आर्थिक राहत मिलेगी और ग्रामीण लोगों को कम किराये में यात्रा करने का मौका मिलेगा।
सरकार ने इस योजना के तहत निजी लोगों को भी बस संचालन की अनुमति देने का फैसला किया है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। बसों के संचालन के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें मुख्य विकास अधिकारी, पुलिस अधीक्षक, एआरटीओ और एआरएम सदस्य होंगे। यही समिति बसों के रूट, संचालन और अन्य व्यवस्थाओं को तय करेगी।
योजना के तहत बसें रात में गांव में ही रुकेंगी और सुबह गाँव से चलकर ब्लॉक और तहसील होते हुए सुबह 10 बजे तक जिला मुख्यालय पहुंच जाएंगी। इससे छात्रों, नौकरीपेशा लोगों, अदालत या सरकारी दफ्तरों में काम से जाने वालों और किसानों को अपने उत्पाद बेचने के लिए शहर आने-जाने में सुविधा मिलेगी।
कई गाँवों में सड़कें संकरी होने के कारण बड़ी बसों का संचालन मुश्किल होता है। ऐसे में जिन 12,200 गांवों में बड़ी बसें नहीं पहुंच सकतीं, उनमें से करीब 5,000 गाँवों के लिए छोटी बसें चलाई जाएंगी। इन बसों की अधिकतम लंबाई करीब 7 मीटर होगी और इनमें 28 सीटें होंगी। ये बसें दिन में जरूरत के हिसाब से अलग-अलग रूट पर चलेंगी और शाम तक वापस गाँव लौट आएंगी।
इन बसों में ड्राइवर, कंडक्टर और क्लीनर के तौर पर स्थानीय गांव के लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे गाँव के युवाओं को रोजगार मिलेगा और बस संचालन भी सुचारु तरीके से हो सकेगा। बसों की अधिकतम आयु 15 साल तय की गई है, हालांकि शुरुआती तौर पर इन्हें 10 साल के लिए संचालन की अनुमति दी जाएगी। जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली कमेटी स्थानीय स्तर पर किराया तय करेगी, जो ग्रामीण लोगों की क्षमता को ध्यान में रखते हुए रखा जाएगा। परमिट और टैक्स से छूट मिलने के कारण बस संचालकों पर भी ज्यादा आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
योजना के तहत बस संचालन के लिए आने वाले आवेदनों की जांच 15 दिनों के भीतर पूरी कर ली जाएगी। चयनित आवेदक को बस उपलब्ध कराने के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा। इस तरह पूरी प्रक्रिया करीब 45 दिनों के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के संचालन और निगरानी की जिम्मेदारी क्षेत्रीय प्रबंधकों को दी जाएगी, जो हर महीने प्रगति रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजेंगे। सरकार का मानना है कि मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना लागू होने से गाँव और शहर के बीच दूरी कम होगी। इससे छात्रों, किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों को रोजमर्रा के कामों के लिए बेहतर और सस्ती यात्रा सुविधा मिल सकेगी।
मंगलवार को लखनऊ के लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कुल 31 प्रस्तावों पर चर्चा हुई, जिनमें से 30 को मंजूरी दी गई। इन्हीं में से एक अहम फैसला मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना को लेकर लिया गया। सरकार का कहना है कि इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सस्ती और सुगम परिवहन सुविधा मिलेगी।