Census 2027 online registration: देश भर में जनगणना के लिए स्व-गणना (Self Enumeration) की अवधि तय कर दी गई है। यह प्रक्रिया अप्रैल से शुरू होकर अगस्त तक चलेगी, जिससे परिवारों को अपनी जानकारी देने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। इस स्व-गणना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी नागरिक जनगणना में भाग ले सकें और सटीक डेटा एकत्र किया जा सके।
अप्रैल में शुरू होगी प्रक्रिया
कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्व-गणना अप्रैल में शुरू हो रही है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दिल्ली (नई दिल्ली नगर पालिका परिषद और दिल्ली छावनी बोर्ड सहित), गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम में यह 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक चलेगी। इसके बाद, गुजरात, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव में 5 अप्रैल से 19 अप्रैल तक स्व-गणना होगी। उत्तराखंड में यह अवधि 10 अप्रैल से 24 अप्रैल तक है। मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़ और हरियाणा में 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक स्व-गणना की जाएगी।
मई तक बढ़ेगा शेड्यूल
कुछ क्षेत्रों में स्व-गणना की अवधि मई तक बढ़ाई गई है। बिहार में स्व-गणना 17 अप्रैल से 1 मई तक होगी। तेलंगाना में यह 26 अप्रैल से 10 मई तक चलेगी, और पंजाब में 30 अप्रैल से 14 मई तक स्व-गणना निर्धारित है। यह अलग-अलग समय-सीमा देश के विभिन्न हिस्सों में डेटा संग्रह के लिए एक चरणबद्ध दृष्टिकोण दर्शाती है।
मई-जून में भी जारी रहेगी गणना
झारखंड, दिल्ली (दिल्ली नगर निगम), महाराष्ट्र, मेघालय और राजस्थान में स्व-गणना 1 मई से 15 मई तक होगी। उत्तर प्रदेश में यह 7 मई से 21 मई तक चलेगी। जम्मू और कश्मीर, लद्दाख और पुडुचेरी में 17 मई से 31 मई तक स्व-गणना होगी। हिमाचल प्रदेश में यह अवधि 1 जून से 15 जून तक है।
जून-जुलाई में कुछ राज्यों की बारी
केरल और नागालैंड में स्व-गणना 16 जून से 30 जून तक चलेगी। तमिलनाडु और त्रिपुरा में यह 17 जुलाई से 31 जुलाई तक होगी। ये अलग-अलग अवधियां सुनिश्चित करती हैं कि विभिन्न क्षेत्रों के परिवारों को स्व-गणना प्रक्रिया में भाग लेने के लिए पर्याप्त समय मिले।
अगस्त में भी जारी रहेगा अभियान
कुछ राज्यों में स्व-गणना की प्रक्रिया गर्मी के महीनों में भी जारी रहेगी। असम में यह 2 अगस्त से 16 अगस्त तक होगी। मणिपुर में यह 17 अगस्त से 31 अगस्त तक चलेगी। ये अवधियां इन विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों के परिवारों से डेटा एकत्र करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
पश्चिम बंगाल की तारीखें अभी तय नहीं
पश्चिम बंगाल के लिए स्व-गणना की अवधि 'तय की जानी है' के रूप में चिह्नित है। इसका मतलब है कि इस राज्य में स्व-गणना की विशिष्ट तिथियां अभी तक तय नहीं हुई हैं। पश्चिम बंगाल के लिए स्व-गणना कार्यक्रम जानने के लिए आगे की जानकारी की आवश्यकता होगी।
| राज्य/केंद्र शासित प्रदेश | स्व-गणना अवधि |
|---|
| अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दिल्ली, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा, सिक्किम | 1 अप्रैल - 15 अप्रैल |
| गुजरात, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव | 5 अप्रैल - 19 अप्रैल |
| उत्तराखंड | 10 अप्रैल - 24 अप्रैल |
| मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, हरियाणा | 16 अप्रैल - 30 अप्रैल |
| बिहार | 17 अप्रैल - 1 मई |
| तेलंगाना | 26 अप्रैल - 10 मई |
| पंजाब | 30 अप्रैल - 14 मई |
| झारखंड, दिल्ली (MCD), महाराष्ट्र, मेघालय, राजस्थान | 1 मई - 15 मई |
| उत्तर प्रदेश | 7 मई - 21 मई |
| जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, पुडुचेरी | 17 मई - 31 मई |
| हिमाचल प्रदेश | 1 जून - 15 जून |
| केरल, नागालैंड | 16 जून - 30 जून |
| तमिलनाडु, त्रिपुरा | 17 जुलाई - 31 जुलाई |
| असम | 2 अगस्त - 16 अगस्त |
| मणिपुर | 17 अगस्त - 31 अगस्त |
| पश्चिम बंगाल | तय की जानी है |
क्यों जरूरी है स्व-गणना?
इस पूरी प्रक्रिया का मकसद है कि हर नागरिक जनगणना में शामिल हो, उनका सही और सटीक डेटा मिले, सरकारी योजनाओं की बेहतर योजना बन सके। कुल मिलाकर, यह एक चरणबद्ध और व्यवस्थित प्रक्रिया है, जिससे देश के हर हिस्से में आसानी से जनगणना पूरी की जा सके।