चार फीसदी ब्याज़ पर मिल रहा कर्ज, मछली पालकों के लिए डिजिटल ख़ुशख़बरी:19 हजार लोगों ने किया आवेदन
Gaon Connection | Feb 09, 2026, 15:33 IST
देश के 30 लाख मछुआरों और मछली पालकों के लिए कर्ज लेना अब बेहद आसान हो गया है। राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए घर बैठे मोबाइल से 15 हजार रुपये से लेकर 5 करोड़ रुपये तक का बैंक लोन मिल रहा है। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना के तहत सिर्फ 4 फीसदी की कम ब्याज दर पर कर्ज मिल रहा है। सबसे बड़ी राहत यह है कि 12.5 करोड़ रुपये तक का लोन बिना किसी संपत्ति गिरवी रखे मिल सकता है। देश के सभी 12 राष्ट्रीयकृत बैंक इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं। अब तक 350 लोगों को कर्ज मिल चुका है। कर्ज लेने वालों को 5,000 रुपये का सफलता शुल्क भी अलग से मिल रहा है। भारत अब विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है। वित्त वर्ष 2024-25 में मछली उत्पादन 197 लाख टन तक पहुंच गया और निर्यात से 62,408 करोड़ रुपये की कमाई हुई। इस सेक्टर से जुड़े करीब 3 करोड़ लोगों की जिंदगी बदल रही है।
देश के मछुआरों और मछली पालन करने वाले किसानों के लिए अब कर्ज लेना बेहद आसान हो गया है। अपने मोबाइल या कंप्यूटर से घर बैठे बैंक में लोन के लिए आवेदन किया जा सकता है और कुछ ही दिनों में पैसा सीधे खाते में आ जाता है। यह बदलाव उन करोड़ों लोगों के लिए राहत की खबर है जो मछली पालन और मछली पकड़ने के काम से अपना और अपने परिवार का पेट पालते हैं।
मछली पालन और मछली पकड़ने से जुड़े लोगों के लिए यह बदलाव बड़ी राहत लेकर आया है। अब आवेदन करने के कुछ ही दिनों के भीतर पैसा सीधे बैंक खाते में पहुंच रहा है। मत्स्य पालन विभाग द्वारा शुरू किए गए राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से अब तक करीब 30 लाख मछुआरे और मछली पालक जुड़ चुके हैं। इस प्लेटफॉर्म के जरिए 19 हजार से अधिक लोगों ने कर्ज के लिए आवेदन किया है और 350 से ज्यादा लोगों को 15 हजार रुपये से लेकर 5 करोड़ रुपये तक का लोन मिल चुका है। यह संख्या लगातार बढ़ रही है और हर दिन नए आवेदन आ रहे हैं।
भारत में मछली पालन अब सिर्फ आजीविका का साधन नहीं रहा, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बन चुका है। देश की 11,099 किलोमीटर लंबी तटरेखा, नदियां, तालाब और झीलें इस क्षेत्र को बड़ी संभावनाएं देती हैं। आज मछली पालन क्षेत्र देश के सकल मूल्य वर्धन में लगभग 1.12 प्रतिशत का योगदान दे रहा है और करीब 3 करोड़ लोगों को रोजगार दे रहा है।
पिछले एक दशक में मछली उत्पादन में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2013–14 में जहां मछली उत्पादन 95.79 लाख टन था, वहीं 2024–25 में यह बढ़कर 197 लाख टन तक पहुंच गया है। यानी उत्पादन लगभग दोगुना हो चुका है। इसमें सबसे बड़ा योगदान अंतर्देशीय मत्स्य पालन का है, जिसकी हिस्सेदारी कुल उत्पादन में 75 प्रतिशत से अधिक है। तालाबों, झीलों और नदियों में मछली पालन करने वाले किसानों की मेहनत अब साफ नजर आने लगी है। यह भी पढ़ें: Banana Farming: केले की खेती से बंपर कमाई के लिए किसान क्या करें? रोपाई से लेकर फसल कटाई की पूरी जानकारी
मछली और मछली उत्पादों के निर्यात से भी देश को बड़ी कमाई हो रही है। वित्त वर्ष 2024–25 में भारत ने मछली निर्यात से 62,408 करोड़ रुपये यानी करीब 7.45 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा अर्जित की। इसमें फ्रोजन झींगा का योगदान सबसे ज्यादा है। अमेरिका और चीन भारतीय मछली उत्पादों के बड़े खरीदार हैं। सरकार ने घरेलू बाजार और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मछली उत्पादों पर जीएसटी को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है, जिससे भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो गए हैं।
मछली पालन के लिए किसान क्रेडिट कार्ड योजना किसानों और मछुआरों के लिए सबसे प्रभावी साबित हो रही है। जून 2025 तक 4.76 लाख किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जिनके जरिए 3,214 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज दिया गया है। समय पर कर्ज चुकाने पर ब्याज दर सिर्फ 4 प्रतिशत रह जाती है, जो छोटे किसानों के लिए बड़ी राहत है। छोटे स्तर पर 15 हजार रुपये से लेकर बड़े किसानों को 15 लाख रुपये तक का लोन इसी योजना के तहत मिल रहा है।
यह पैसा मछली बीज खरीदने, चारा लेने, तालाब की मरम्मत कराने, जाल और अन्य उपकरण खरीदने जैसे रोजमर्रा के कामों में इस्तेमाल किया जा रहा है। छोटे निवेश के अलावा बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए सरकार ने मत्स्य अवसंरचना विकास कोष की व्यवस्था की है, जिसके तहत बड़े तालाब, कोल्ड स्टोरेज, आइस प्लांट और प्रोसेसिंग यूनिट जैसी परियोजनाओं को फंड मिल रहा है। इस योजना में ब्याज पर छूट दी जाती है, जिससे कर्ज की लागत कम हो जाती है।
पहले मछुआरों की सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि बैंक कर्ज के बदले जमीन या संपत्ति गिरवी रखने की शर्त रखते थे। इसे दूर करने के लिए सरकार ने क्रेडिट गारंटी फंड की व्यवस्था की है, जिसके तहत अब 12.5 करोड़ रुपये तक का लोन बिना किसी गिरवी के मिल सकता है। इससे छोटे और गरीब मछुआरों को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है और वे बिना डर के कर्ज लेकर अपना काम बढ़ा पा रहे हैं।
लोन लेने वाले किसानों और मछुआरों को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 5,000 रुपये तक की अतिरिक्त सहायता भी दी जा रही है। यह रकम कर्ज लेने के दौरान होने वाले कागजी और दस्तावेजी खर्चों में मदद के लिए दी जाती है और यह कर्ज की रकम से अलग होती है। इससे किसानों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता।
राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म ने कर्ज की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बना दिया है। अब आवेदक अपने आवेदन की स्थिति रीयल टाइम में देख सकता है और जान सकता है कि उसका आवेदन किस स्तर पर है। देश के सभी 12 राष्ट्रीयकृत बैंक इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं और योग्य आवेदनों को तेजी से मंजूरी दी जा रही है।
इन योजनाओं से महिलाओं और युवाओं को भी नए अवसर मिल रहे हैं। महिलाएं अब घर बैठे मोबाइल से आवेदन कर पा रही हैं और युवा मछली पालन को एक आधुनिक और लाभकारी व्यवसाय के रूप में अपना रहे हैं। सरकार प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए किसानों और बैंकरों दोनों को मछली पालन से जुड़ी जानकारी दे रही है ताकि कर्ज का सही इस्तेमाल हो और जोखिम कम हो।
सरकार ने वित्त वर्ष 2025–26 तक मछली उत्पादन को 220 लाख टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए आधुनिक लैंडिंग सेंटर, कोल्ड चेन, प्रोसेसिंग यूनिट और गहरे समुद्र में मछली पकड़ने की सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। पूर्वोत्तर और पहाड़ी क्षेत्रों में ठंडे पानी की मछलियों के पालन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
मछली पालन और मछली पकड़ने से जुड़े लोगों के लिए यह बदलाव बड़ी राहत लेकर आया है। अब आवेदन करने के कुछ ही दिनों के भीतर पैसा सीधे बैंक खाते में पहुंच रहा है। मत्स्य पालन विभाग द्वारा शुरू किए गए राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से अब तक करीब 30 लाख मछुआरे और मछली पालक जुड़ चुके हैं। इस प्लेटफॉर्म के जरिए 19 हजार से अधिक लोगों ने कर्ज के लिए आवेदन किया है और 350 से ज्यादा लोगों को 15 हजार रुपये से लेकर 5 करोड़ रुपये तक का लोन मिल चुका है। यह संख्या लगातार बढ़ रही है और हर दिन नए आवेदन आ रहे हैं।
भारत में मछली पालन अब सिर्फ आजीविका का साधन नहीं रहा, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बन चुका है। देश की 11,099 किलोमीटर लंबी तटरेखा, नदियां, तालाब और झीलें इस क्षेत्र को बड़ी संभावनाएं देती हैं। आज मछली पालन क्षेत्र देश के सकल मूल्य वर्धन में लगभग 1.12 प्रतिशत का योगदान दे रहा है और करीब 3 करोड़ लोगों को रोजगार दे रहा है।
पिछले एक दशक में मछली उत्पादन में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2013–14 में जहां मछली उत्पादन 95.79 लाख टन था, वहीं 2024–25 में यह बढ़कर 197 लाख टन तक पहुंच गया है। यानी उत्पादन लगभग दोगुना हो चुका है। इसमें सबसे बड़ा योगदान अंतर्देशीय मत्स्य पालन का है, जिसकी हिस्सेदारी कुल उत्पादन में 75 प्रतिशत से अधिक है। तालाबों, झीलों और नदियों में मछली पालन करने वाले किसानों की मेहनत अब साफ नजर आने लगी है। यह भी पढ़ें: Banana Farming: केले की खेती से बंपर कमाई के लिए किसान क्या करें? रोपाई से लेकर फसल कटाई की पूरी जानकारी
मछली और मछली उत्पादों के निर्यात से भी देश को बड़ी कमाई हो रही है। वित्त वर्ष 2024–25 में भारत ने मछली निर्यात से 62,408 करोड़ रुपये यानी करीब 7.45 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा अर्जित की। इसमें फ्रोजन झींगा का योगदान सबसे ज्यादा है। अमेरिका और चीन भारतीय मछली उत्पादों के बड़े खरीदार हैं। सरकार ने घरेलू बाजार और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मछली उत्पादों पर जीएसटी को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है, जिससे भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो गए हैं।
मछली पालन के लिए किसान क्रेडिट कार्ड योजना किसानों और मछुआरों के लिए सबसे प्रभावी साबित हो रही है। जून 2025 तक 4.76 लाख किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जिनके जरिए 3,214 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज दिया गया है। समय पर कर्ज चुकाने पर ब्याज दर सिर्फ 4 प्रतिशत रह जाती है, जो छोटे किसानों के लिए बड़ी राहत है। छोटे स्तर पर 15 हजार रुपये से लेकर बड़े किसानों को 15 लाख रुपये तक का लोन इसी योजना के तहत मिल रहा है।
राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म<br>
यह पैसा मछली बीज खरीदने, चारा लेने, तालाब की मरम्मत कराने, जाल और अन्य उपकरण खरीदने जैसे रोजमर्रा के कामों में इस्तेमाल किया जा रहा है। छोटे निवेश के अलावा बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए सरकार ने मत्स्य अवसंरचना विकास कोष की व्यवस्था की है, जिसके तहत बड़े तालाब, कोल्ड स्टोरेज, आइस प्लांट और प्रोसेसिंग यूनिट जैसी परियोजनाओं को फंड मिल रहा है। इस योजना में ब्याज पर छूट दी जाती है, जिससे कर्ज की लागत कम हो जाती है।
पहले मछुआरों की सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि बैंक कर्ज के बदले जमीन या संपत्ति गिरवी रखने की शर्त रखते थे। इसे दूर करने के लिए सरकार ने क्रेडिट गारंटी फंड की व्यवस्था की है, जिसके तहत अब 12.5 करोड़ रुपये तक का लोन बिना किसी गिरवी के मिल सकता है। इससे छोटे और गरीब मछुआरों को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है और वे बिना डर के कर्ज लेकर अपना काम बढ़ा पा रहे हैं।
लोन लेने वाले किसानों और मछुआरों को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 5,000 रुपये तक की अतिरिक्त सहायता भी दी जा रही है। यह रकम कर्ज लेने के दौरान होने वाले कागजी और दस्तावेजी खर्चों में मदद के लिए दी जाती है और यह कर्ज की रकम से अलग होती है। इससे किसानों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता।
राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म ने कर्ज की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बना दिया है। अब आवेदक अपने आवेदन की स्थिति रीयल टाइम में देख सकता है और जान सकता है कि उसका आवेदन किस स्तर पर है। देश के सभी 12 राष्ट्रीयकृत बैंक इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं और योग्य आवेदनों को तेजी से मंजूरी दी जा रही है।
इन योजनाओं से महिलाओं और युवाओं को भी नए अवसर मिल रहे हैं। महिलाएं अब घर बैठे मोबाइल से आवेदन कर पा रही हैं और युवा मछली पालन को एक आधुनिक और लाभकारी व्यवसाय के रूप में अपना रहे हैं। सरकार प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए किसानों और बैंकरों दोनों को मछली पालन से जुड़ी जानकारी दे रही है ताकि कर्ज का सही इस्तेमाल हो और जोखिम कम हो।
सरकार ने वित्त वर्ष 2025–26 तक मछली उत्पादन को 220 लाख टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए आधुनिक लैंडिंग सेंटर, कोल्ड चेन, प्रोसेसिंग यूनिट और गहरे समुद्र में मछली पकड़ने की सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। पूर्वोत्तर और पहाड़ी क्षेत्रों में ठंडे पानी की मछलियों के पालन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।