Rice Export: ग्लोबल बाजार में भारत का दबदबा! चीन ने फिर शुरू की टूटे चावल की खरीद

Gaon Connection | Apr 17, 2026, 12:43 IST
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चीन ने भारत से टूटे चावल खरीदना फिर से शुरू कर दिया है। भारत के चावल के दाम वैश्विक बाजार में सबसे कम हैं। हालांकि, ईरान युद्ध के कारण शिपिंग लागत बढ़ गई है। इससे निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है। अल नीनो का असर भी चावल बाजार पर पड़ सकता है। भारत की रबी धान की फसल अच्छी है।
भारत का चावल बना चीन की नंबर-1 पसंद
भारत का चावल बना चीन की नंबर-1 पसंद
चीन ने एक बार फिर भारत से टूटे (ब्रोकन) चावल की खरीद शुरू कर दी है, जबकि हाल ही में उसने जीएमओ (Genetically Modified Organism) की आशंका जताते हुए कई खेपों को खारिज कर दिया था। इसके बावजूद वैश्विक बाजार में भारत के प्रतिस्पर्धी दामों ने चीनी खरीदारों को दोबारा आकर्षित किया है। हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी ईरान युद्ध के चलते बढ़ी शिपिंग लागत ने निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी है। राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (TREA) के अध्यक्ष बीवी कृष्णा राव ने बताया कि हमारा चावल निर्यात पश्चिम अफ्रीका के साथ-साथ चीन को भी जारी है। हम टूटे चावल को 300-310 डॉलर प्रति टन (FOB) पर ऑफर कर रहे हैं, लेकिन बंकर फ्यूल महंगा होने से कंटेनर फ्रेट बढ़ गया है।

कीमत में बढ़त के बावजूद भारत बना सबसे सस्ता विकल्प

वैश्विक बाजार में इस समय भारत का चावल सबसे प्रतिस्पर्धी बना हुआ है। 5 प्रतिशत ब्रोकन सफेद चावल की कीमत 335-339 डॉलर प्रति टन है, जो थाईलैंड (423 डॉलर), वियतनाम (344-348 डॉलर) और पाकिस्तान (345-349 डॉलर) से कम है। चेन्नई स्थित राजाठी ग्रुप के निदेशक एम. मदन प्रकाश ने बताया, “चीन टूटे चावल की खरीद कर रहा है, लेकिन 20 फीट कंटेनर का खर्च 75-80 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गया है, हालांकि अभी कोई वॉर सरचार्ज नहीं लगाया गया है। निर्यातकों के अनुसार, पश्चिम अफ्रीका के देशों के साथ-साथ चीन से भी मांग स्थिर बनी हुई है।

ईरान युद्ध से बढ़ी शिपिंग लागत, निर्यात पर दबाव

ईरान युद्ध के कारण जहाजों में इस्तेमाल होने वाले बंकर फ्यूल की कीमतों में करीब 50 प्रतिशत तक उछाल आया है, जिससे शिपिंग लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसका असर खासकर लॉजिस्टिक्स पर पड़ा है। बीवी कृष्णा राव ने कहा, “नॉन-बासमती चावल के निर्यात पर अभी ज्यादा असर नहीं है, लेकिन बासमती चावल की खेप, खासकर पश्चिम एशिया के लिए, प्रभावित हुई है।” इससे निर्यातकों के मार्जिन पर दबाव बढ़ रहा है, भले ही वैश्विक मांग बनी हुई हो।

‘अल नीनो’ और उत्पादन का गणित भी अहम

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘अल नीनो’ का असर आने वाले महीनों में वैश्विक चावल बाजार को प्रभावित कर सकता है। नई दिल्ली के ट्रेड एनालिस्ट एस. चंद्रशेखरन ने कहा, “थाईलैंड और वियतनाम की फसल आने के बाद कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है, लेकिन सुपर अल नीनो का खतरा कीमतों में तेज गिरावट को रोक सकता है।” उन्होंने बताया कि अल नीनो आमतौर पर एशिया में सूखा और लंबा शुष्क मौसम लाता है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है। वहीं भारत में रबी धान की फसल फिलहाल अच्छी स्थिति में है और 2025-26 में कुल उत्पादन 150 मिलियन टन से अधिक रहने का अनुमान है।
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